
अफगानिस्तान में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से ही दुनिया के कई मुल्क अफगानिस्तान के हालात के साथ तालमेल बैठाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं. अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जा होने के बाद से ही भारत समेत अधिकतर देशों ने वहां से अपने दूतावास कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया था लेकिन रूस उन चुनिंदा देशों में से था जिसने ना तो अफगानिस्तान से अपने दूतावास बंद किया था और ना ही रूस तालिबान सरकार को लेकर चिंतित दिखा था. अब रूस तालिबान को मॉस्को आने के लिए आमंत्रित कर रहा है.
अफगानिस्तान के लिए रूसी राष्ट्रपति के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने इसकी पुष्टि की है. रूस के पत्रकारों ने जमीर से पूछा कि क्या अफगानिस्तान के मसले पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में तालिबान को भी आमंत्रित किया जाएगा? उन्होंने कहा कि रूस 20 अक्टूबर को मॉस्को में अफगानिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय वार्ता के लिए तालिबान को आमंत्रित करने जा रहा है. गौरतलब है कि इससे पहले मार्च में मॉस्को में अफगानिस्तान मसले पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी. इसमें रूस, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त बयान जारी करते हुए अफगानिस्तान में सभी पक्षों को हिंसा रोकने और शांति समझौते पर पहुंचने की अपील की थी.
अफगानिस्तान को मदद पहुंचाने की तैयारी में भी है रूस
संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को चेतावनी भरे अंदाज में कहा था कि अफगानिस्तान में मानवीय संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में क्या रूस अफगानिस्तान को मदद भी मुहैया कराएगा? इस पर काबुलोव ने बात करते हुए कहा कि रूस अफगानिस्तान की मदद करेगा लेकिन अब तक इस मसले पर चीजें पूरी तरह से फाइनल नहीं हुई हैं और इसे लेकर काम किया जा रहा है.
बता दें कि एक तरफ जहां तालिबान को रूस में एक आतंकी संगठन के तौर पर प्रतिबंध लगाया गया है वहीं दूसरी तरफ रूसी प्रशासन तालिबान के साथ बातचीत को लेकर भी सकारात्मक रवैया अपना रहा है. काबुलोव ने इस बारे में कहा कि तालिबान पर जो यूएन प्रतिबंध लगाए गए हैं, उन्हें हटाने को लेकर कोई कोशिश नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि अभी हम जिस स्टेज पर हैं, मुझे लगता है कि अभी किसी भी तरह की जल्दबाजी करना सही नहीं होगा.
अफगानिस्तान की अमेरिका की वापसी से रूस को हो सकता है फायदा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी खत्म होने पर इस इलाके में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है. इससे पहले मॉस्को स्थित राजनीतिक विश्लेषक आर्कादी दुबनोव ने फाइनैंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा था कि 'जो हमारे लिए अच्छा है वो अमेरिकियों के लिए बुरा है और उनके लिए जो अच्छा है वो हमारे लिए बुरा है. मौजूदा वक्त अमेरिकियों के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन ये रूस के हित में जा सकता है.'