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वो परमाणु हथियार जो यूक्रेन से सटे बेलारूस में तैनात करेंगे पुतिन, जानें कितने खतरनाक होते हैं ये?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐलान किया है कि वो बेलारूस में टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात करने जा रहे हैं. माना जा रहा है कि 1 जुलाई तक बेलारूस में इन हथियारों को रखने के लिए स्टोरेज तैयार हो जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि ये टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन क्या होते हैं? और ये कितने खतरनाक होते हैं?

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने बेलारूस में टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात करने का ऐलान किया है. (फाइल फोटो-PTI) रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने बेलारूस में टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात करने का ऐलान किया है. (फाइल फोटो-PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 9:10 PM IST

यूक्रेन से जंग के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐलान किया है कि वो बेलारूस में टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात करने जा रहे हैं. 1990 के दशक के बाद ये पहली बार होगा जब रूस अपनी सीमा के बाहर परमाणु हथियारों की तैनाती करेगा.

पुतिन ने ये ऐलान ऐसे समय किया है जब यूक्रेन जंग को लेकर उनका पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है. पुतिन ने शनिवार को टीवी पर ऐलान करते हुए बताया कि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको लंबे समय से टेक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों को तैनात करने का मुद्दा उठा रहे थे. बेलारूस की सीमा पोलैंड से लगती है, जो सैन्य गठबंधन नाटो का सदस्य है.

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पुतिन ने क्या कहा?

पुतिन ने कहा, 'इसमें कुछ भी अजीब नहीं है. अमेरिका दशकों से ऐसा करते आ रहा है. वो लंबे समय से अपने सहयोगी देशों के इलाकों में टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन की तैनाती कर रहा है.'

पुतिन ने दावा किया कि रूस ये सब परमाणु अप्रसार संधि का उल्लंघन किए बिना कर रहा है. हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि बेलारूस में इन हथियारों की तैनाती कब होगी. लेकिन न्यूज एजेंसी ने बताया कि 1 जुलाई तक बेलारूस में इन हथियारों के लिए स्टोरेज तैयार हो जाएगा.

ऐसे में जानते हैं कि ये टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन क्या होते हैं? ये कितने खतरनाक होते हैं? और इनकी तैनाती को लेकर रूस की पॉलिसी क्या है? 

क्या होते हैं टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन?

परमाणु हथियारों को दो कैटेगरी में बांटा गया है. एक है- स्ट्रैटजिक और दूसरा- टेक्टिकल. 

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स्ट्रैटजिक परमाणु हथियारों का इस्तेमाल लंबी दूरी के लिए किया जाता है. ज्यादा तबाही मचाने के लिए किया जाता है. दूसरी ओर, टेक्टिकल परमाणु हथियार कम दूरी के लिए और कम तबाही मचाने के लिए होता है.

टेक्टिकल परमाणु हथियारों का इस्तेमाल सीमित स्तर पर होता है. इनका इस्तेमाल जंग के मैदानों और सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया जाता है. इनमें छोटे बम, मिसाइलें और माइन्स भी शामिल होतीं हैं.

टेक्टिकल परमाणु हथियार छोटे साइज से लेकर बड़े साइज तक के हो सकते हैं. छोटे हथियारों का वजन एक किलो टन या उससे भी कम होता है, जबकि बड़े साइज के हथियार 100 किलो टन तक के हो सकते हैं.

बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के साथ पुतिन. (फाइल फोटो-AP/PTI)

रूस के पास कितने हथियार?

रूस के पास कितने टेक्टिकल परमाणु हथियार हैं? इसका कोई आंकड़ा नहीं है. हालांकि, अमेरिका का मानना है कि रूस के पास ऐसे दो हजार हथियार हो सकते हैं. जबकि, अमेरिका के पास ऐसे 200 हथियार ही हैं.

इन हथियारों को मिसाइल, टॉरपिडो और बमों के जरिए गिराया जा सकता है. हवा, पानी और जमीन पर इसका इस्तेमाल होता है. इतना ही नहीं, इन्हें किसी खास इलाके में भी ले जाया जा सकता है और वहां पर विस्फोट किया जा सकता है.

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अमेरिका ने अपने टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन कई यूरोपीय देशों में तैनात कर रखे हैं. ये हथियार इटली, जर्मनी, तुर्की, बेल्जियम और नीदरलैंड्स में हैं. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन हथियारों का वजन 0.3 से लेकर 170 किलो टन तक है.

कितने खतरनाक हैं ये हथियार?

परमाणु हथियार कितने खतरनाक होंगे और इससे कितनी तबाही होगी? ये उनके साइज पर निर्भर करता है. 

विश्लेषकों का मानना है कि स्ट्रैटजिक परमाणु हथियारों को ज्यादा तबाही मचाने के लिए तैयार किया गया है, जबकि टेक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल कम तबाही के लिए होता है. लेकिन टेक्टिकल न्यूक्लियर हथियार भी कम तबाही लेकर नहीं आते.

इन हथियारों से होने वाले नुकसान का अनुमान लगाना हो तो उसकी तुलना हिरोशिमा में गिरे परमाणु बम से की जा सकती है. हिरोशिमा पर 15 किलो टन का बम गिरा था और उससे डेढ़ लाख लोगों की मौत हो गई थी. जबकि, अमेरिका ने यूरोप में जो सबसे बड़ा टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात किया है, उसका वजन 170 किलो टन है.

कोल्ड वॉर के बाद अमेरिका और रूस, दोनों ने ही अपने परमाणु हथियारों की संख्या कम कर दी थी, लेकिन अब भी दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार इन्हीं दोनों देशों के पास है. फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट का अनुमान है कि रूस के पास 5,977 और अमेरिका के पास 5,428 परमाणु हथियार हैं.

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क्या पुतिन इन्हें लॉन्च कर सकते हैं?

रूस की परमाणु नीति के मुताबिक, चाहे स्ट्रैटजिक हो या फिर टेक्टिकल... किसी भी तरह के परमाणु हथियार को लॉन्च करने का आदेश सिर्फ राष्ट्रपति ही दे सकते हैं.

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 1991 में जब सोवियत संघ टूटा था, तब उसके पास करीब 22 हजार और अमेरिका के पास 11,500 टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन थे. हालांकि, उसके बाद इनमें से ज्यादा हथियारों का या तो नष्ट किया जा चुका है या फिर नष्ट किया जाना है.

रूस के पास अब जितने भी टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन हैं, वो 30 मिलिट्री बेस और 12वें डायरेक्टोरेट ऑफ डिफेंस मिनिस्ट्री के कंट्रोल में हैं, जिनके प्रमुख इगोर कोलेश्निकोव हैं. कोलेश्निकोव सीधे रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करते हैं.

अगर पुतिन ऐसे परमाणु हथियारों से हमला करने का आदेश देते हैं, तो उससे पहले वो रूस की सिक्योरिटी काउंसिल से सलाह-मशविरा जरूर करेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि पुतिन को नहीं पता कि अगर उन्होंने हथियार लॉन्च किए तो अमेरिका इस पर कैसी प्रतिक्रिया देगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पुतिन परमाणु हमले का आदेश देते हैं तो इसके बाद रूस के परमाणु हथियारों के जखीरे की तैनाती में बदलाव देखने को मिलेगा. समुद्र में सबमरीन की तैनाती की जाएगी. मिसाइल फोर्सेज को अलर्ट पर रख दिया जाएगा और मिलिट्री बेसों में स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स देखने को मिलेंगे, जो किसी भी वक्त हमला कर सकते हैं.

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पहली बार रूसी सीमा के बाहर परमाणु हथियार

जब सोवियत संघ एक था, तो उसके परमाणु हथियार सदस्य देशों में तैनात थे. 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद यूक्रेन, बेलारूस और कजाकिस्तान समेत बाकी सदस्यों ने सभी परमाणु हथियार रूस को सौंप दिए थे.

इसके बाद से रूस ने अपनी सीमा के बाहर कभी भी परमाणु हथियारों की तैनाती नहीं की. पुतिन ने शनिवार को कहा कि बेलारूस में हथियारों की तैनाती करने का फैसला परमाणु अप्रसार संधि का उल्लंघन नहीं है.

परमाणु अप्रसार संधि पर सोवियत संघ ने भी दस्तखत किए थे. ये संधि कहती है कि कोई परमाणु संपन्न देश किसी गैर-परमाणु देश को न तो परमाणु हथियार दे सकता है और न ही इन्हें बनाने की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर सकता है. हालांकि, परमाणु संपन्न देश गैर-परमाणु संपन्न देश में परमाणु हथियारों को तैनात जरूर कर सकता है, लेकिन उसका कंट्रोल अपने पास ही रखना होगा. 

अमेरिका ने यूरोप में भले ही टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात कर रखे हैं, लेकिन उनका पूरा कंट्रोल उसके पास ही है. इसी तरह बेलारूस में टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात होने के बाद उनका कंट्रोल रूस के पास ही होगा.

 

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