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'इस्लामिक देशों के संगठन में भी...', मोदी सरकार के इस कदम के कायल हुए पाकिस्तान के पूर्व डिप्लोमैट

विदेश मंत्री एस जयशंकर भारत-खाड़ी सहयोग सगंठन के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में शामिल होने के लिए सऊदी अरब पहुंचे हैं. उनके इस दौरे पर पाकिस्तान के पूर्व डिप्लोमैट ने टिप्पणी की है. उन्होंने कहा है कि कूटनीति कोई इवेंट नहीं बल्कि सतत प्रक्रिया है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर सऊदी के प्रोटोकॉल मामलों के उप मंत्री अब्दुलमजीद अल स्मरी के साथ रियाद में (Photo- @DrSJaishankar/X) विदेश मंत्री एस जयशंकर सऊदी के प्रोटोकॉल मामलों के उप मंत्री अब्दुलमजीद अल स्मरी के साथ रियाद में (Photo- @DrSJaishankar/X)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:38 PM IST

विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को खाड़ी सहयोग संगठन (Gulf Cooperation Council, GCC) की बैठक में शामिल होने के लिए दो दिवसीय दौरे पर सऊदी अरब पहुंचे हैं. सोमवार को हुई बैठक भारत-जीसीसी विदेश मंत्रियों की पहली बैठक है जिसमें रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है. सऊदी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने जीसीसी के विदेश मंत्रियों से द्विपक्षीय मुलाकात भी की है. जीसीसी में विदेश मंत्री के शामिल होने को लेकर पाकिस्तान से प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

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खाड़ी सहयोग संगठन खाड़ी के छह देशों, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन का संगठन है. भारत-जीसीसी की बैठक को लेकर भारत में उच्चायुक्त रह चुके पाकिस्तान के पूर्व डिप्लोमैट अब्दुल बासित ने कहा है कि ये भारत की बहुत बड़ी कामयाबी है.

उन्होंने एक वीडियो में कहा, 'भारत में जब से नरेंद्र मोदी आए हैं, उन्होंने बहुत ही सिस्टमैटिक तरीके से गल्फ देशों के साथ संबंधों को बढ़ाया है और इसलिए आज हम देखते हैं कि इन देशों में रहने वाले भारतीयों की संख्या भी तकरीबन 80-90 लाख हो गई है. '

मार्च 2022 में विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों में कहा गया था कि विदेशों में रहने वाले 1.34 करोड़ भारतीयों (NRI) में से 66% लोग खाड़ी देशों में रहते हैं. मंत्रालय ने बताया था कि 88.8 लाख से ज्यादा भारतीय 6 खाड़ी देशों में रह रहे हैं.

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'भारत ने कभी हार नहीं मानी...'

खाड़ी देशों में भारतीयों की बढ़ती संख्या और इन देशों में भारत की विदेश नीति की धाक पर अब्दुल बासित ने आगे कहा, 'भारत ने कभी हार नहीं मानी... कूटनीति एक प्रक्रिया है, कोई इवेंट नहीं है. ऐसे में पीएम मोदी की यह बड़ी कामयाबी रही है कि जीसीसी खास तौर से, यूएई और सऊदी के साथ संबंधों को बढ़ाया गया. और अब भारत और खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हो रही है तो उनके लिए बड़ी कामयाबी है.'

अब्दुल बासित ने आगे कहा कि यह बैठक भारत के लिए अहम इसलिए भी है क्योंकि इसमें भारत की यह कोशिश होगी कि जीसीसी देशों को ओआईसी (57 इस्लामिक देशों का संगठन- इस्लामिक सहयोग संगठन) को खासतौर पर कश्मीर जैसे मुद्दों से दूर किया जाए. 

'OIC में शामिल होने पर भारत का हो सकता है जोर'

पाकिस्तानी डिप्लोमैट ने कहा कि बैठक के दौरान भारत ओआईसी में शामिल होने पर एक बार फिर जोर दे सकता है. सऊदी अरब ओआईसी का सबसे प्रभावशाली सदस्य माना जाता है और संगठन का मुख्यालय भी सऊदी के शहर जेद्दा में है. यूएई, कतर जैसे खाड़ी देश भी संगठन में अहम स्थान रखते हैं और इन सभी देशों से ही भारत अपने संबंध बढ़ा रहा है.

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2021 की जनगणना के अनुसार, भारत में 20 करोड़ मुसलमान हैं और सबसे अधिक मुसलमान आबादी के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है. इसे देखते हुए भारत ने एक बार ओआईसी में शामिल होने की कोशिश भी की थी.

साल 2019 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को 'गेस्ट ऑफ ऑनर' के तौर पर यूएई में आयोजित ओआईसी की बैठक में बुलाया गया था. इस दौरान सुषमा स्वराज ने ओआईसी में भारत के शामिल होने की वकालत की थी. पाकिस्तान ने ओआईसी में भारत के शामिल होने के विरोध में बैठक का बहिष्कार किया था.

अब्दुल बासित ने कहा, 'जीसीसी की बैठक के दौरान भारत की कोशिश होगी कि सदस्य देश  ओआईसी में उसे शामिल करने को लेकर तेजी दिखाएं, पहले उसे ऑब्जर्वर देश बनाएं और फिर उसे पूर्ण सदस्यता दें.'

'संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण सदस्यता के लिए समर्थन जुटा सकता है भारत'

अब्दुल बासित ने बैठक को लेकर कयास लगाए कि इस दौरान जयशंकर चाहेंगे कि सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करें. संयुक्त राष्ट्र में 5 देशों, अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस को ही स्थायी सदस्यता हासिल है. दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के बावजूद भारत को इसकी पूर्ण सदस्यता नहीं मिली है.

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भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए अब्दुल बासित ने अंत में कहा कि उम्मीद है, पाकिस्तान भी इसी तरह से कुछ करेगा.

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