
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा की एक बयान से भारत की सियासत में हलचल बढ़ गई है. उन्होंने अमेरिका के इन्हेरिटेंस टैक्स यानी विरासत कर की वकालत करते हुए कहा कि ये बहुत ही रोचक कानून है.
उन्होंने कहा कि अमेरिका में इन्हेरिटेंस टैक्स लगता है. इसका मतलब है कि अगर किसी के पास 10 करोड़ डॉलर की संपत्ति है, तो उसके मरने के बाद बच्चों को सिर्फ 45 फीसदी संपत्ति ही मिलेगी और बाकी 55 फीसदी सरकार ले लेती है.
पित्रोदा ने कहा कि भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है. यहां अगर किसी के पास 10 अरब रुपये की संपत्ति है, तो मरने के बाद उसके बच्चों को सारी संपत्ति मिल जाती है, जनता के लिए कुछ नहीं बचता.
सैम पित्रोदा का पूरा नाम सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा है. उनकी पहचान टेलीकॉम इन्वेंटर और एंटरप्रेन्योर के तौर पर है. वो लगभग 50 साल से टेलीकॉम और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं. भारत के ओडिशा के तितिलागढ़ में गुजराती परिवार में 1942 में उनका जन्म हुआ था. सात भाई-बहनों में पित्रोदा तीसरे नंबर पर हैं. गुजरात के एक बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने वड़ोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी से फिजिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर्स डिग्री ली. आगे की पढ़ाई के लिए वो अमेरिका चले गए. 1964 में शिकागो के इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने फिजिक्स में मास्टर्स डिग्री हासिल की.
1975 में पहला पेटेंट
पढ़ाई पूरी करने के बाद 1965 में वो टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़ गए. 1975 में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक डायरी का आविष्कार किया था. ये उनका पहला पेटेंट था. अपने करियर में उन्होंने कई पेटेंट दाखिल किए. उन्होंने मोबाइल फोन पर बेस्ट ट्रांजेक्शन टेक्नोलॉजी का पेटेंट भी दायर किया था.
जब छोड़ी अमेरिकी नागरिकता
पित्रोदा का परिवार गांधीवादी रहा है. कांग्रेस से उनकी नजदीकियां भी रही थीं. 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम पित्रोदा को भारत लौटने को कहा. इंदिरा गांधी के कहने पर वो भारत लौट आए. भारतीय नागरिकता लेने के लिए उन्होंने अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी. वो इसलिए क्योंकि भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है.
भारत लौटने के बाद 1984 में ही उन्होंने टेलीकॉम पर काम करने वाली एक स्वायत्त संस्था सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स की शुरुआत की.
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तो पित्रोदा उनके सलाहकार बन गए. 1987 में राजीव गांधी ने उन्हें टेलीकॉम, वाटर, शिक्षा, इम्युनाइजेशन, डेरी और ऑयलसीड्स से जुड़े छह टेक्नोलॉजी मिशन का हेड नियुक्त किया. भारत की इन्फोर्मेशन इंडस्ट्री में बदलाव करने के लिए उन्होंने राजीव गांधी के साथ मिलकर कई सालों तक काम किया. उनका काम भारक के हर कोने तक डिजिटल टेलीकॉम का विस्तार करना था.
वापस लौटे अमेरिका
भारत में कई सालों तक काम करने के बाद 1990 के दशक में पित्रोदा वापस अमेरिका लौट आए. यहां शिकागो में रहते हुए उन्होंने कई कंपनियां शुरू कीं. मई 1995 में वो इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन WorldTel इनिशिएटिव के पहले चेयरमैन बने.
2004 में जब कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए सरकार बनी, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पित्रोदा को नेशनल नॉलेज कमीशन का अध्यक्ष बनने के लिए आमंत्रित किया. मनमोहन सिंह के न्योते पर पित्रोदा दोबारा भारत लौटे. 2005 से 2009 तक पित्रोदा नेशनल नॉलेज कमीशन के अध्यक्ष रहे.
2009 के चुनाव के बाद यूपीए सरकार जब दोबारा सत्ता में आई तो अक्टूबर 2009 में उन्हें मनमोहन सिंह का सलाहकार नियुक्त किया गया. इसके साथ ही उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया.
100 से ज्यादा पेटेंट्स कर चुके हैं दाखिल
सैम पित्रोदा की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, वो इंडिया फूड बैंक, द ग्लोबल नॉलेज इनिशिएटिव और द इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसडिसिप्लीनरी हेल्थ जैसे पांच एनजीओ भी शुरू कर चुके हैं.
इसके अलावा वो यूनाइटेड नेशंस ब्रॉडबैंड कमीशन फॉर डिजिटल डेवलपमेंट के फाउंडिंग कमिश्नर भी रहे हैं. पित्रोदा इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के एम-पावरिंग डेवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, जिसका काम विकासशील देशों में मोबाइल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना है.
उन्होंने अमेरिका में कई कंपनियां शुरू की हैं. इसके साथ ही उन्होंने दुनियाभर में 100 से ज्यादा पेटेंट्स दाखिल किए हैं. पांच किताबें भी अब तक लिख चुके हैं. फिलहाल सैम पित्रोदा शिकागो के इलिनोइस में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं.