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रमजान को लेकर सऊदी अरब ने उठाया ऐसा कदम, भड़के मुस्लिम

रमजान को देखते हुए सऊदी अरब ने कई दिशानिर्देश जारी किए हैं. सरकार की ओर से जारी गाइडलाइंस में रमजान के दौरान मस्जिदों में इफ्तार करने, लाउडस्पीकर बजाने समेत कई गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी गई है. सऊदी अरब के इस कदम पर दुनिया भर के कई मुसलमानों ने नाराजगी जाहिर की है.

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (फोटो-रॉयटर्स) सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (फोटो-रॉयटर्स)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 5:55 PM IST

मुसलमानों के पवित्र माह रमजान को लेकर सऊदी अरब ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं. रमजान को देखते हुए सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्री शेख डॉ अब्दुल लतीफ बिन अब्दुल अजीज ने कई दिशानिर्देश जारी किए हैं. 

सऊदी सरकार ने 10 सूत्री गाइडलाइंस में कहा है कि रमजान के पवित्र महीने में मस्जिदों के अंदर कोई इफ्तार नहीं होगा. इसके अलावा, सरकार ने लाउडस्पीकर बजाने, नमाज के ब्रॉडकास्ट करने और बिना आईडी के एतफाक में बैठने पर भी पाबंदी लगा दी है. सरकार ने नमाजियों से यह भी अनुरोध किया है कि वे बच्चों को मस्जिदों में न लाएं क्योंकि इससे नमाजियों को परेशानी होगी और उनकी इबादत में खलल पड़ सकता है. 

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एतकाफ एक इस्लामिक प्रथा है. इसमें मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान के अंतिम 10 दिनों के दौरान अल्लाह की इबादत में पूरा समय देने के इरादे से मस्जिद में खुद को अलग कर लेते हैं.

इस्लामिक देश सऊदी अरब के इस कदम पर दुनिया भर के कई मुसलमानों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. मुसलमानों का आरोप है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान सार्वजनिक जीवन में इस्लाम के प्रभाव को कम करना चाहते हैं.

क्या हैं दिशानिर्देश 

शुक्रवार को इस्लामिक मामलों के मंत्री अब्दुल लतीफ अल-शेख की ओर से जारी एक दस्तावेज के अनुसार, इस्लाम के पवित्र महीने रमजान को दस बिंदुओं के तहत रेगुलेट किया जाएगा. इन दिशानिर्देशों का सऊदी अरब में रहने वालों लोगों को पालन करना होगा.

इस दस्तावेज में महीने के अंतिम दस दिनों के दौरान खुद को एकांत में रखने वाले नमाजियों की निगरानी और दान पर प्रतिबंध जैसे विवादित दिशानिर्देश भी शामिल हैं. 

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मंत्री की ओर से जारी दस्तावेज में इमाम को साफ दिशानिर्देश दिया गया है कि जब तक अत्यंत जरूरी न हो, वो अनुपस्थित नहीं हो सकते हैं. इसके अलावा, मंत्रालय ने इफ्तार के आयोजन के लिए चंदा जुटाने पर भी पाबंदी लगा दी है. अगर कोई इफ्तार करना चाहता है तो उसे मस्जिद के अंदर के बजाय मस्जिद के अहाते में इफ्तार करने की अनुमति होगी. इसकी पूरी जिम्मेदारी इमाम की होगी.  

दुनिया भर के मुसलमान भड़के

मिडिल ईस्ट कवर करने वाली वेबसाइट के अनुसार, सऊदी अरब के इस कदम पर दुनिया भर के कई मुसलमानों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. मुसलमानों का आरोप है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इन प्रतिबंधों के माध्यम से ट्यूनिशिया के पूर्व तानाशाह जीन अल अबिदीन और पूर्व सोवियत संघ की तर्ज पर सार्वजनिक जीवन में इस्लाम के प्रभाव को कम करना चाहते हैं.

सऊदी क्राउन प्रिंस के इस कदम का विरोध करने वाले मुसलामनों का कहना है, "सऊदी सरकार किंगडम सोसाइटी को खोलने के प्रयास में लोकप्रिय पश्चिमी कलाकारों और पॉप सिंगर जैसी हस्तियों को बुलाती है. सऊदी सरकार तेजी से संगीत समारोहों को बढ़ावा दे रही है और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है." 

सरकार ने आरोपों को नकारा

इस्लामिक मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल्ला अल-एनेजी ने एक चैनल के साथ इंटरव्यू में इन आरोपों को खारिज कर दिया है. एनेजी का कहना है, "मंत्रालय मस्जिदों में इफ्तार से नहीं रोक रहा है, बल्कि इसे व्यवस्थित कर रहा है. ताकि एक जिम्मेदार व्यक्ति इसका आयोजन करे. इससे मस्जिद की पवित्रता और स्वच्छता को बनाए रखने में सुविधा होंगी. 

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सऊदी अरब का 'विजन 2030'

मोहम्मद बिन सलमान के क्राउन प्रिंस बनने के बाद से ही सऊदी अरब 'विजन 2030' पर काम कर रहा है. विजन 2030 के तहत अन्य देशों से मुकाबला करने के लिए सऊदी क्राउन देश की रूढ़िवादी नीतियों को लगातार बदल रहे हैं. मोहम्मद बिन सलमान के शासनकाल में ही सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति दी गई.

इस्लामिक देश में आधुनिक तौर-तरीकों को शामिल करने की पहल के तहत सऊदी अरब ने पिछले साल हैलोवीन मनाने की अनुमति दे दी थी. सऊदी के इस कदम पर भी दुनिया भर के मुसलमानों ने मोहम्मद बिन सलमान की कड़ी अलोचना की थी. 

 

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