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सऊदी अरब की राजकुमारी का क्यों चढ़ गया पारा? टेनिस दिग्गजों को सुनाई खरी-खोटी

सऊदी अरब में महिला अधिकारों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. एक बार फिर महिला अधिकारों पर सवाल उठा है और यह सवाल टेनिस लीजेंड्स क्रिस एवर्ट और मार्टिना नवरातिलोवा ने उठाया है. दोनों महिला खिलाड़ियों ने लैंगिक असमानता का हवाला देकर सऊदी अरब में टेनिस एसोसिएशन का फाइनल आयोजित करने का विरोध किया है.

सऊदी अरब की राजकुमारी रीमा बिंत बंदार (Photo- Reuters) सऊदी अरब की राजकुमारी रीमा बिंत बंदार (Photo- Reuters)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:10 PM IST

अमेरिका में सऊदी अरब की राजदूत राजकुमारी रीमा बिंत बंदार ने सऊदी अरब में महिला टेनिस एसोसिएशन फाइनल का आयोजन रोकने की मांग को खारिज कर दिया है. टेनिस की दिग्गज क्रिस एवर्ट और मार्टिना नवरातिलोवा ने एक लेख के जरिए तर्क दिया था कि सऊदी अरब में लैंगिक समानता नहीं है और वहां महिलाओं को आजादी नहीं है इसलिए सऊदी को टेनिस एसोसिएशन फाइनल आयोजित करने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए.

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26 जनवरी को वाशिंगटन पोस्ट में टेनिस दिग्गजों का एक ऑपिनियन लेख छपा था जिसमें सऊदी में टेनिस एसोसिएशन का फाइनल न कराने की बात कही गई थी.

लेख से नाराज सऊदी की राजकुमारी रीमा ने एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा किए अपने बयान में कहा, 'खेल का इस्तेमाल व्यक्तिगत पूर्वाग्रह, एजेंडा को बढ़ावा देने या टेनिस को अपनाने और इसके विकास में योगदान देने के लिए उत्सुक समाज को सजा देने के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए.'

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ है और उसे नकार देना महिलाओं की उल्लेखनीय यात्रा को 'बदनाम' करता है.

उन्होंने  कहा, 'दुनिया भर की कई महिलाओं की तरह, सऊदी अरब की महिलाओं ने भी टेनिस के दिग्गजों को अपने रोल मॉडल के रूप में देखा… वो हमारे लिए आशा की किरण हैं कि महिलाएं ये सब हासिल कर सकती हैं. लेकिन इन चैंपियनों ने उन्हीं महिलाओं से मुंह मोड़ लिया है जिन्हें उन्होंने प्रेरित किया था और यह बेहद निराशाजनक है.'

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राजकुमारी रीमा ने कहा कि सऊदी अरब में महिलाएं अब हर उस क्षेत्र में काम कर सकती हैं जिन्हें पुरुष प्रधान क्षेत्र माना जाता है. इसमें सेना, अग्निशमन, कानून प्रवर्तन और यहां तक ​​कि स्पेस रिसर्च भी शामिल है.

'अपने फैक्ट्स सही कर लें...', टेनिस दिग्गजों पर भड़कीं राजकुमारी

उन्होंने एवर्ट और नवरातिलोवा के इस तर्क को खारिज कर दिया कि सऊदी अरब के समाज में महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिलता है. उन्होंने कहा, 'इस पर, मैं बस यही कहना चाहूंगी- अपने तथ्यों को सही करें. आज सऊदी अरब में महिलाएं पुरुषों के अधीन नहीं हैं. महिलाओं को यात्रा करने, काम करने या अपने घर की मुखिया बनने के लिए किसी की मंजूरी की जरूरत नहीं है.'

उन्होंने सऊदी अरब में महिलाओं की बदलती स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज सऊदी महिलाएं 300,000 से अधिक बिजनेस और लगभग 25 प्रतिशत छोटी और मध्यम आकार की स्टार्ट-अप कंपनियों की मालिक हैं और यह प्रतिशत अमेरिका के प्रतिशत के बराबर है. सऊदी में महिलाओं को अब पुरुषों की तरह ही समान वेतन मिलता है.

राजकुमारी रीमा ने आगे कहा, 'हालांकि अभी भी काम किया जाना बाकी है. किंगडम में 330,000 से अधिक रजिस्टर्ड महिला एथलीट हैं, जिनमें से 14,000 सक्रिय रूप से टेनिस में भाग लेती हैं. हजारों महिलाएं अलग-अलग खेलों में कोच, सलाहकार, रेफरी और स्पोर्ट्स डॉक्टर के रूप में काम करती हैं.

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राजकुमारी रीमा ने इस बात पर जोर दिया कि सऊदी अरब की महिलाओं को अपने हक के लिए आवाज न उठाने वाली पीड़ितों के रूप में चित्रित करना न केवल खेल में उनकी प्रगति को कमजोर करता है, बल्कि सऊदी में महिलाओं की व्यापक प्रगति को भी कम करता है.

सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस के आने से सुधरी है महिलाओं की स्थिति

मोहम्मद बिन सलमान साल 2017 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बने और इसके बाद से ही उन्होंने सऊदी की रुढ़िवादी छवि को बदलने के लिए कई बड़े सुधार किए. उन्होंने सऊदी की कायापलट के लिए 'विजन 2030' प्रोजेक्ट लॉन्च किया जिसका उद्देश्य देश की तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाना और पर्यटन को आकर्षित करना है.

इसी प्रोजेक्ट के तहत सऊदी ने महिला अधिकारों के लिए कई काम किए हैं. अब सऊदी में महिलाओं को कार चलाने, खेलों में हिस्सा लेने पर रोक नहीं है. उन्हें यात्रा करने के लिए अब अभिभावक की भी जरूरत नहीं. महिलाओं अब कई क्षेत्रों में काम कर रही हैं.  हालांकि, मोहम्मद बिन सलमान पर मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगते रहे हैं.

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