
अफगानिस्तान पर कब्जा कर चुके तालिबान पर अब भारत के एक और पड़ोसी देश का बयान आया है. श्रीलंका की तरफ से तालिबान को लेकर दिए गए बयान (Sri Lanka on Taliban) में लगभग वैसी ही बातें बोली गई हैं जो कि पाकिस्तान पहले ही कह चुका है. श्रीलंका ने तालिबान के बदले रूप का 'स्वागत' किया है. आगे उम्मीद जताई गई है कि तालिबान अपने किए हुए वादों पर टिकेगा.
एक न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक, श्रीलंका ने उम्मीद जताई कि तालिबान अफगानिस्तान में कब्जा करने के बाद अब आम-माफी देने, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने और किसी भी विदेशी को नुकसान नहीं पहुंचाने के अपने वादों पर कायम रहेगा.
तालिबान ने अफगान के साथ-साथ दुनिया से किए थे वादे
तालिबान ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके महिलाओं के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करने, उनसे लड़ने वालों को माफ करने का वादा किया था. आगे कहा गया था कि तालिबान ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि अफगानिस्तान आतंकवादियों के लिए पनाहगाह नहीं बनेगा.
तालिबान के इस बदले अंदाज को लेकर दुनिया भी हैरान है. चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि तालिबान का इतिहास बहुत भयावह रहा है, लिहाजा उस पर कैसे भरोसा किया जा सकता है. लेकिन तालिबान समर्थक कुछ देश उसे लेकर सकारात्मक बयान दे रहे हैं. इसी कड़ी में अब श्रीलंका का बयान भी आया है.
श्रीलंका की तरफ से ये भी कहा गया कि अफगानिस्तान में उसके जो नागरिक फंसे हैं उन्हें निकालने के लिए अमेरिका, यूके, भारत, पाकिस्तान और संयुक्त राष्ट्र से मदद मांगी गई है.
तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि संगठन सत्ता पर नियंत्रण के बाद किए गए अपने सभी वादों का सम्मान करेगा. मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'श्रीलंका यह जानकर खुश है कि तालिबान ने आम-माफी की पेशकश की है और किसी भी विदेशी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाने का वादा किया है. ऐसे में तालिबान से अपने वादों को निभाने का अनुरोध किया जाता है.'
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था - तालिबान को नहीं मिलनी चाहिए मान्यता
श्रीलंका की सरकार भले तालिबान के प्रति नरम रुख अपना रही हो लेकिन वहां के पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने पहले ही देश की सरकार को अफगानिस्तान में तालिबान के शासन को मान्यता देने को लेकर आगाह किया था. विक्रमसिंघे ने कहा था कि उन्हें काबुल के साथ सभी संबंध तोड़ देने चाहिए. चार बार श्रीलंका के प्रधानमंत्री रहे विक्रमसिंघे ने कहा था, 'सभी को डर है कि तालिबान शासन के तहत अफगानिस्तान जिहादी आतंकवादी समूहों का केंद्र बन जाएगा.'