
जगह है पश्चिमी सूडान का दारफूर. चिलचिलाती धूप, झाड़ झंखाड़... कच्ची सड़कें, मिट्टी की झोपड़ियां और मीलों-मील जमीन का विस्तार. इस भरी दोपहरी में कुछ सूडानी युवा जमीन खोदते और पसीना बहाते नजर आ रहे हैं. इनका लालच उस पीली धातु के लिए जिसे दुनिया सोना के नाम से जानती है. गरीबी, गृह युद्ध और अनिश्चित भविष्य से जूझ रहे इन युवाओं के लिए सोना पाना वो सपना जो इन्हें एक अच्छी जिंदगी दे सकता है.
लेकिन सोना हासिल करने का ये सपना गैंगवार, जंग और मौत से होकर गुजरता है. कबीलाई सरदार, वॉर लॉर्ड्स, विदेशी शक्तियों की नजर सोने के इस भंडार पर है. लिहाजा सोने पर कब्जा करने के लिए यहां खूब खून खराबा होता है.
सूडान की ताजा जंग में जब 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है 1500 लोग जख्मी हो चुके हैं तो सूडान की 40 हजार सोने की खदानों का सवाल एक फिर से मौजूं हो गया है. क्योंकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूर इस देश में खदान से निकली सोने की ताकत और उससे मिलने वाला डॉलर ही सूडान में पॉवर बैलेंस तय करता है. जिसके पास जितना सोना वो उतना ताकतवर. क्योंकि वो गुट डॉलर के दम पर उतना ही ज्यादा हथियार खरीद कर सकता है, निजी आर्मी बना सकता है और देश की सत्ता के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकता है.
कहां है सूडान?
सूडान उत्तरी पूर्व अफ्रीका में स्थित एक देश है. यह अफ्रीका और अरब जगत के सबसे बड़े देशों में से है. क्षेत्रफल के लिहाज से सूडान दुनिया का दसवां सबसे बड़ा देश है. दुनिया की सबसे लंबी नदी नील नदी इस देश को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में विभाजित करती है. इसकी राजधानी खार्तूम है.
सूडान के पास कितना सोना?
सूडान में 40,000 ऐसी जगहें हैं जहां देश के 13 प्रांतों में सोने का शोधन करने वाली 60 कंपनियां हैं, इनमें 15 कंपनियां सिर्फ दक्षिणी कोर्दोफ़ान में हैं. हालांकि सूडान के ज्यादातर सोने के खान अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हो सके हैं. फिर भी दुनिया के सोना बाजार में हर साल सूडान की भागीदारी 90 टन है. इस तरह से सूडान दुनिया का 10वां सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है. पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में सबसे बड़ा सोने का भंडार सूडान में है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार सूडान के सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो सिर्फ 2022 में ही सूडान ने 41.8 टन सोने के निर्यात से लगभग 2.5 अरब डॉलर की कमाई की थी.
सूडान ट्रिब्यून डॉटकाम के अनुसार 2018 में सूडान ने 78 टन सोने का उत्पादन किया था. हालांकि सरकारी एजेंसियां यह भी मानती हैं कि सूडान में सोने की स्मगलिंग की वजह से देश को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा का नुकसान होता है.
देश का बंटवारा और सोने के लिए जंग
बता दें कि 1956 में सूडान ब्रिटेन की दासता से आजाद हुआ. इसके बाद सूडान को एक राष्ट्र का शक्ल देने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसी दौरान सूडान ने अपनी धरती पर कच्चे तेल को खोजा. कच्चा तेल सूडान की इकोनॉमी का आधार बन गया.
लेकिन मजबूत केंद्रीय शक्ति के अभाव में सूडान में गृह युद्ध की स्थितियां बनी रहीं. आखिरकार 2011 में सूडान का विघटन हो गया और दक्षिण सूडान एक अलग देश बन गया, लेकिन दक्षिण सूडान बनने के साथ ही सूडान को कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली कमाई में तगड़ा झटका लगा. लगभग दो तिहाई आमदनी सूडान के हाथ से चली गई.
इसके बाद सूडान में कई कबीले और हथियारबंद समूह सत्ता पर कब्जा करने के लिए लड़ने लगे. सूडान में कई मिलीशिया पैदा हो गए.
इसी बीच 2012 में देश के उत्तरी हिस्से में स्थिल 'जेबेल अमीर' में सोने के विशाल भंडार का पता लगा. दारफूर में 10 किलोमीटर के रेंज में फैले इस गोल्ड पट्टी को जेबेल आमेर गोल्ड मांइन का नाम दिया गया है. इसके साथ ही सूडान में गोल्ड रश के लिए टकराव और भी बढ़ गया.
हसाई गोल्ड माइन सूडान का दूसरा प्रमुख गोल्ड माइनिंग सेंटर है.
बगावत पर आमदा RSF ने सोने से खूब कमाया
सूडान का मौजूदा संकट वहां की सेना और अर्द्धसैनिक बलों के बीच सत्ता पर कब्जे के लिए टकराव का नतीजा है. ये बड़ी विचित्र स्थिति है कि सूडान में अभी वहां की सेना अपने ही देश के अर्द्धसैनिक बलों यानी कि 'रैपिड सपोर्ट फ़ोर्स' के खिलाफ है. राजधानी खार्तूम में रणनीतिक लिहाज से अहम लगभग सभी जगहों पर झडपें हो रही हैं.
सूडान में सत्ता की लड़ाई में दो किरदार आमने-सामने हैं. इसमें एक और तो आर्मी चीफ जनरल अब्देल फत्तह अल बुरहान हैं तो दूसरी ओर रैपिड सपोर्ट फ़ोर्स के नेता जनरल मोहम्मद हमदान डागलो हैं. जो हेमदाती के नाम से भी जानें जाते हैं.
सत्ता के संघर्ष में हेमदाती ने देश के राजनीतिक दलों के साथ समझौता कर फॉर्सेज फॉर फ्रीडम एंड चेंज (FFC) नाम का एक संगठन बना लिया. रॉयटर्स के मुताबिक हेमदाती और FFC ने गोल्ड माइनिंग से खूब पैसा कमाया और अपनी शक्ति मजबूत कर ली.
सूडान संकट पर नजर रखने वाले शेविट वोल्डमाइकल के हवाले से बीबीसी लिखता है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे इस देश के लिए सोने की खदानें ही आय का मुख्य स्रोत हैं. वे कहते हैं कि सत्ता के लिए हो रहे जोर आजमाइश के दौरान सोने की ये खदानें शक्ति का केंद्र हो गईं.
शेविट कहते हैं कि सोने की खदानें लंबे समय से ये RSF का प्रमुख वित्तीय स्रोत रहा है और सेना गठजोड़ को संदेह की नजर से देखती है. लेकिन सत्ता की वैसी दौड़ जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है वहां पर शक्ति ही सत्ता तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है. लिहाजा सूडान में हिंसा बे रोक टोक जारी है.
पिछले साल दिसम्बर में जब ये सहमति बनी तो तय हुआ कि सूडान में जो भी सोना निकाला जाएगा उसे चुनी हुई सरकार को दे दिया जाएगा, लेकिन हेमदाती की बढ़ती ताक़त को देखते हुए आर्मी चीफ अल बुरहान के समर्थकों ने आरएसएफ की गतिविधियों पर लगाम लगाने की सलाह सेना को दे दी.
सूडान में आर्थिक और राजनीतिक समीकरण ऐसा है कि सेना का नियंत्रण देश की अर्थव्यवस्था पर है जबकि RSF सोने की खदानों का संचालन करती है. RSF चीफ हेमदाती ने अपने पूरे परिवार को गोल्ड माइनिंग में लगाया है. इसलिए हेमदाती सोने के बिजनेस में किसी भी तरह से सेना का नियंत्रण स्वीकार करने को तैयार नहीं थे. सूडान में भड़की हिंसा में कई कारणों में यह भी एक कारण था.