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भारत से लगभग पांच हजार किलोमीटर दूर सूडान में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं वहां के हालातों पर चिंता जता चुकी हैं. इस बीच ह्यूमन राइट्स वॉच ने एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सूडान में हो रहे कथित 'नरसंहार' का दावा किया गया है.
सूडान में एक साल से ज्यादा लंबे वक्त से सिविल वॉर छिड़ा हुआ है. अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं, जबकि लाखों विस्थापितों की तरह जी रहे हैं.
ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में बताया गया है कि सूडान के पश्चिमी दारफुर शहर के अल-जेनिना में कथित नरसंहार हुआ है. दावा है कि पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) और उसके अरब सहयोगी अल-जेनिना में जातीय नरसंहार कर रहे हैं. यहां मसालित और गैर-अरब समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले साल अल-जेनिना में 15 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है. 218 पन्नों की रिपोर्ट में HRW ने बताया है कि अप्रैल से नवंबर 2023 के बीच हजारों लोग मारे गए हैं, और लाखों की संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं. इतना ही नहीं, बच्चों को भी नहीं बख्शा जा रहा है. लाइन में खड़ा करके बच्चों को गोली मार दी जा रही है.
जून 2023 से अप्रैल 2024 के बीच HRW ने चाड, युगांडा, केन्या और साउथ सूडान के 220 से ज्यादा लोगों से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार की है. इसके अलावा 120 से ज्यादा फोटो-वीडियो, सैटेलाइट तस्वीरों और दस्तावेजों का एनालिसिस भी किया है.
बच्चों पर गोलीबारी!
ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि RSF और उसके सहयोगी गैर-अरबी लोगों को निशाना बना रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मसालित और गैर-अरबी लोगों पर टॉर्चर किया जा रहा है, उनकी महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया जा रहा है और उनकी संपत्तियों को लूटा जा रहा है.
इस रिपोर्ट में पिछले साल के 15 जून की एक घटना का जिक्र भी किया गया है. बताया गया है कि उस दिन RSF ने अल-जेनिना से भाग रहे लोगों के लगभग एक किलोमीटर लंबे काफिले पर गोलियां चलानी शुरू कर दी थी. RSF ने उस काफिले को घेर लिया और भाग रहे बच्चों-महिलाओं तक पर गोलियां चलाईं. उनसे बचने के चक्कर में कई लोग कज्जा नदी में डूब गए. बुजुर्गों और घायलों को भी नहीं बख्शा गया.
HRW ने 17 साल के उस लड़के का इंटरव्यू भी किया, जिसने 12 बच्चों समेत 17 लोगों की हत्या को सामने से देखा था. उसने बताया कि RSF ने माता-पिता और बच्चों को अलग-अलग कर दिया और जैसे ही माता-पिता चिल्लाने लगे, उन्होंने उन्हें गोली मार दी. इसके बाद सभी बच्चों को भी लाइन में खड़ा कर गोली मार दी.
इतना ही नहीं, RSF और उसके सहयोगी लड़ाके छोटे-छोटे बच्चियों को भी अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि लगभग 20 लड़ाके एक घर में घुसे. वहां 15 साल की एक बच्ची भी थी. उस बच्ची को दूसरे कमरे में ले जाकर सबने छह घंटों तक उसके साथ दुष्कर्म किया.
पर ऐसे हालात क्यों?
सूडान में ये सारी लड़ाई सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच छिड़ी है. इसकी शुरुआत पिछले साल 15 अप्रैल को तब हुई थी, जब सेना के कमांडर जनरल अब्देल-फतह बुरहान और आरएसएफ के प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान डगलो के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया था.
लेकिन इसकी जड़ें अप्रैल 2019 से जुड़ी हैं. उस समय सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति उमर अल-बशीर के खिलाफ जनता ने विद्रोह कर दिया था. अक्टूबर 2021 में सेना ने अल-बशीर की सरकार का तख्तापलट कर दिया था.
बशीर को सत्ता से बेदखल करने के बावजूद संघर्ष जारी रहा. बाद में सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच एक समझौता हुआ. समझौते के तहत एक सोवरेनिटी काउंसिल बनी. जनरल बुरहान काउंसिल के अध्यक्ष तो जनरल डगलो उपाध्यक्ष बने.
इस काउंसिल ने तय किया कि अक्टूबर 2023 के आखिर में चुनाव कराए जाएंगे. लेकिन धीरे-धीरे दोनों जनरलों के बीच मनमुटाव शुरू हो गया.
ये मनमुटाव एक जंग में तब बदल गया जब राजधानी खारतौम में सेना और पैरामिलिट्री फोर्स आमने-सामने आ गई थीं. दोनों ने बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक उतार दिए थे और एक-दूसरे पर गोलीबारी शुरू कर दी थी.
सूडान की सेना में लगभग तीन लाख सैनिक हैं, जबकि आरएसएफ में एक लाख से ज्यादा जवान हैं. आरएसएफ सबसे मजबूत दारफुर में है.
और कौन-कौन है इस लड़ाई में?
सूडान में चल रहे इस गृहयुद्ध में सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के अलावा और भी कई ऐसे गुट हैं, जो लड़ाई लड़ रहे हैं. कुछ सेना के साथ हैं तो कुछ आरएसएफ के साथ.
इनके अलावा, अक्टूबर 2023 में कुछ नागरिक संगठनों ने मिलकर एक ग्रुप बनाया था, जिसका नाम 'तकद्दुम' है. इसका मकसद सूडान में लोकतंत्र को वापस लाना है. एक गुट पूर्व प्रधानमंत्री अब्दल्लाह हमडोक ने भी बनाया है, जिसका मकसद शांति बहाल करना है.
अब तक कितनी मौतें, कितने विस्थापित?
सालभर से सूडान में चल रही इस जंग में अब तक कितने लोग मारे गए हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है. हालांकि, आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (ACLED) के मुताबिक, अप्रैल 2024 तक 16 लोगों के मारे जाने का अनुमान है. इसमें सेना और पैरामिलिट्री फोर्स से जुड़े जवान भी हैं.
जनवरी में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि अकेल अल-जेनिना में ही 10 से 15 हजार लोगों के मारे जाने का अनुमान है.
वहीं, शरणार्थियों पर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी का दावा है कि एक साल में सूडान में 85 लाख लोग विस्थापित हुए हैं. इनमें से 20 लाख लोग सूडान के पड़ोसी मुल्कों में शरणार्थी के तौर पर जीवन जी रहे हैं.
गृहयुद्ध का है लंबा इतिहास?
सूडान में गृहयुद्ध का लंबा इतिहास रहा है. आखिरी बार जब यहां गृहयुद्ध छिड़ा था, तो देश दो हिस्सों- दक्षिणी सूडान और उत्तरी सूडान में बंट गया था.
आजादी के बाद से अब तक ज्यादातर सालों तक यहां गृहयुद्ध ही चलता रहा है. 1956 में सूडान को ब्रिटेन और मिस्र से आजादी तो मिली, लेकिन उससे पहले ही 1955 में उत्तरी और दक्षिणी सूडान के बीच गृहयुद्ध छिड़ गया.
ये गृहयुद्ध 1955 से 1972 तक यानी 17 सालों तक चला. अनुमान है कि इसमें पांच लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे. 1972 में शांति समझौते के बाद ये गृहयुद्ध खत्म हुआ. दस साल बाद फिर 1983 में सूडान सरकार और सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच दूसरा गृहयुद्ध शुरू हो गया.
1983 से 2005 तक 22 साल तक चले इस सिविल वॉर में 20 लाख से ज्यादा लोगों की मारे जाने का अनुमान है. 2005 में सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और सूडान सरकार के बीच शांति समझौता हुआ.
समझौते में तय हुआ कि दक्षिणी सूडान को नया देश बनाया जाएगा. असल में दक्षिणी सूडान ईसाई बहुल मुल्क था तो उत्तर सूडान में मुस्लिम आबादी ज्यादा थी. इस शांति समझौते के बाद 9 जुलाई 2011 को दक्षिणी सूडान अफ्रीकी महाद्वीप का 54वां देश बना. वो दुनिया का 193वां देश है.
बंटवारे के बाद भी हुई जंग
दशकों तक हुए गृहयुद्ध के बाद सूडान के दो हिस्से तो हो गए, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ. उसकी वजह ये थी कि दक्षिणी सूडान में खनिज तेल के भंडार थे.
दरअसल, दोनों देशों के बीच अबेई पड़ता है जहां तेल का अकूत भंडार है. इसे लेकर ही दक्षिण और उत्तर लड़ते रहे. 2012 में फिर समझौता हुआ, जिसमें तय हुआ कि सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे को डिमिलटराइज किया जाएगा. और दक्षिणी सूडान तेल का निर्यात जारी रखेगा.