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सैयद रेफात अहमद ने बांग्लादेश के नए चीफ जस्टिस के रूप में ली शपथ, ओबैदुल हसन ने दिया था इस्तीफा 

सैयद रेफात अहमद का जन्म 28 दिसंबर, 1958 को हुआ था. उनके पिता बैरिस्टर सैयद इश्तियाक अहमद बांग्लादेश के पूर्व अटॉर्नी जनरल थे. उनकी मां डॉ. सूफिया अहमद बांग्लादेश की राष्ट्रीय प्रोफेसर थीं और ढाका विश्वविद्यालय में इस्लामी इतिहास और संस्कृति की प्रमुख प्रोफेसर थीं.

सैयद रेफात अहमद बने बांग्लादेश के चीफ जस्टिस सैयद रेफात अहमद बने बांग्लादेश के चीफ जस्टिस
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 6:50 AM IST

सैयद रेफात अहमद ने रविवार को बांग्लादेश के 25वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली. इससे एक दिन पहले ओबैदुल हसन ने चीफ जस्टिस के पद से इस्तीफा दे दिया था. न्यायमूर्ति हसन के अलावा शीर्ष अदालत की अपीलीय डिवीजन के पांच न्यायाधीशों ने भी पद से इस्तीफा दे दिया था.

प्रधान न्यायाधीश (65) ने शनिवार को अपना निर्णय दोपहर करीब एक बजे उस समय घोषित किया, जब भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के प्रदर्शनकारी अदालत परिसर में एकत्र हुए. प्रदर्शनकारी छात्रों ने हसन और अपीलीय डिवीजन के न्यायाधीशों को दोपहर एक बजे तक इस्तीफा देने का समय दिया था.

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छात्र आंदोलन की थी मांग
सैयद रेफात अहमद का जन्म 28 दिसंबर, 1958 को हुआ था. उनके पिता बैरिस्टर सैयद इश्तियाक अहमद बांग्लादेश के पूर्व अटॉर्नी जनरल थे. उनकी मां डॉ. सूफिया अहमद बांग्लादेश की राष्ट्रीय प्रोफेसर थीं और ढाका विश्वविद्यालय में इस्लामी इतिहास और संस्कृति की प्रमुख प्रोफेसर थीं. भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन ने पहले मांग की थी कि सैयद रेफात अहमद को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाए.

'डेली स्टार' समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, अहमद ने स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 12 बजकर 45 मिनट पर राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास के दरबार हॉल में एक समारोह के दौरान देश के नए प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने प्रधान न्यायाधीश को शपथ दिलाई. शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख बने मोहम्मद यूनुस भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए. 

मोहम्मद यूनुस से मुलाकात करेंगे बांग्लादेशी हिंदू छात्र
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने संकट के समाधान और हिंदुओं की सुरक्षा पर चर्चा के लिए हिंदू समुदाय के युवाओं और छात्रों को एक बैठक के लिए बुलाया है. पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक अब हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को अत्याचारों से बचाने के लिए अल्पसंख्यक संरक्षण कानून की मांग कर रहे हैं. 

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8 सूत्रीय मांगें रखेगा हिंदू छात्रों का समूह
जानकारी के अनुसार हिंदू छात्र अल्पसंख्यक अधिकार आंदोलन समूह यूनुस सरकार के सामने 8 सूत्रीय मांगें रखेगा. इनमें हिंदुओं पर हमलों के मामले में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक ट्रिब्यूनल की स्थापना करने और तत्काल अल्पसंख्यक संरक्षण कानून लागू करने की मांग शामिल है.

हिंदू छात्रों का समूह यूनुस सरकार से हिंदू धार्मिक कल्याण ट्रस्ट को फाउंडेशन में अपग्रेड करने, पाली शिक्षा बोर्ड का आधुनिकीकरण करने, शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान 5 दिनों की छुट्टी घोषित करने और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की स्थापना करने की मांग करेगा. यह बैठक कल दोपहर को होगी.

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