
इजरायल और हमास की जंग से शुरू हुए उबाल ने पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले लिया है. एक और जहां हमास से इजरायल की जंग जारी है तो एक मोर्चे पर इजरायल, हिज्बुल्लाह को भी आड़े हाथों ले रहा है. लेकिन इस बीच जंग का एक नया मोर्चा खुलता नजर आ रहा है, जो सीरिया है.
सीरिया के विद्रोही गुटों ने बशर अल असद सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इन विद्रोहियों ने अलेप्पो सहित देश के उत्तरपश्चिमी हिस्से पर कब्जा कर लिया है. अब ये विद्रोही हामा के पास सीरियाई सेना का सामना कर रहे हैं जबकि रूस उन पर एयरस्ट्राइक कर रहा है.
अलेप्पो में विद्रोहियों ने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के दिवंगत भाई बसल अल-असद की प्रतिमा को गिरा दिया. अल कायदा की सीरियाई शाखा रही हयात तहरीर अल-शाम (HTS) और अलायड फोर्सेस ने बीते हफ्ते हमले शुरू किए थे और शनिवार तक अलेप्पो पर कब्जा कर लिया था.
अलेप्पो के बाद हामा के भी कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है. विद्रोहियों ने सीरिया के आर्मी कैंपों पर भी कब्जा किया है, जिससे उन्हें बड़ी संख्या में हथियार मिल गए हैं. इससे हयात तहरीर अल-शाम के लड़ाके और अधिक घातक हो गए हैं. हामा के चार प्रांतों पर कब्जा जमाने के बाद विद्रोही और आगे बडञ रहे हैं. इस बीच असद सरकार के समर्थन में रूस ने हवाई हमले किए हैं.
सीरिया कैसे बनता जा रहा है थ्रंट वॉर फ्रंट?
साल 2011 की अरब स्प्रिंग में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ भड़के विद्रोह ने सिविल वॉर का रूप ले लिया था. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए और अनुमान के अनुसार 1.2 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं.
लेकिन विद्रोहियों ने अब नए सिरे से सीरिया सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. विद्रोही समूहों का कहना है कि उनका उद्देश्य नागरिकों को हवाई हमलों से सुरक्षित करना और अपने क्षेत्रों को फिर से हासिल करना है. आरोप है कि ईरान समर्थित असद की सेनाओं ने खुला युद्ध छेड़ा हुआ है. विद्रोही असद को एक तानाशाह मानते हैं जिन पर 2013 में देश के घोउटा इलाके में केमिकल वेपन्स के इस्तेमाल का आऱोप है. विद्रोही उन्हें सत्ता से बेदखल करना चाहते हैं.
कौन-किसके पाले में खड़ा है?
सीरिया में खुलते नजर आ रहे इस नए मोर्चे में रूस, ईरान, तुर्की और अमेरिका बड़े भागीदार हैं. रूस 2015 से असद का प्रमुख सहयोगी है.
इस बीच खबर है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान से फोन पर बात की है. इस दौरान दोनों राष्ट्रपतियों ने सीरिया की बशर अल असद सरकार को बिना किसी शर्त के समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है.
ईरान भी सीरिया के राष्ट्रपति असद का प्रमुख सहयोगी है, जो उसे सैन्य और राजनीतिक सहायता देता है. ईरान के शीर्ष राजनयिक अब्बास अराग्ची ताजा घटनाक्रमों पर चर्चा करने के लिए रविवार को सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुंचे थे, जहां उन्होंने बशर अल-असद से मुलाकात की.
वहीं, तुर्की सीरिया में विरोधी गुटों का समर्थन करता है. उसका विद्रोही क्षेत्रों में अच्छा-खासा प्रभाव है. वहीं, पूर्वोत्तर सीरिया में अमेरिका के 900 सैनिक तैनात हैं. अमेरिका का पूरा फोकस यहां इस्लामिक स्टेट के दोबारा उभार पर है. उसने रूस और ईरान पर असद की निर्भरता की आलोचना की है. अमेरिका यहां सरकारी बलों के खिलाफ कभी-कभी हमले भी करता है.
अमेरिका ने कहा है कि सीरिया की रूस और ईरान पर निर्भरता और साल 2015 की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद शांति योजना पर आगे बढ़ने से इनकार करने के कारण देश में ऐसे हालात पैदा हुए हैं.
कौन है सीरिया में विद्रोही गुटों का अगुआ?
सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए विद्रोही गुटों के हमलें की अगुवाई इस्लामी चरमपंथी समूह हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) ने की है. इस संगठन का सीरियाई संघर्ष में शामिल रहने का लंबा इतिहास रहा है.
एचटीएस की स्थापना साल 2011 में जबात अल-नुसरा के नाम से हुई थी. ये समूह चरमपंथी संगठन अल कायदा का सहयोगी था. इसके गठन में इस्लामिक स्टेट के नेता अबू बक्र अल बगदादी की अहम भूमिका थी. 2016 में इस संगठन के नेता अबू मोहम्मद अल-जवलानी ने सार्वजनिक तौर पर अल कायदा से नाता तोड़ लिया था. उन्होंने जबात अल-नुसरा को भंग कर एक नया संगठन स्थापित किया था. एक साल बाद इस संगठन में कई अन्य समान विचारधारा वाले गुटों का विलय हुआ और इसका नाम हयात तहरीर अल-शाम पड़ा.