
तालिबान ने दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने पंजशीर गवर्नर ऑफिस पर अपना कब्जा कर लिया है. वहीं तालिबान के लड़ाकों ने शुक्रवार रात देश भर में हवा में गोलियां चलाईं, जिसमें अफगानिस्तान के आसपास 70 से अधिक लोग मारे गए. हालांकि यह संख्या और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि कई प्रांतों से रिपोर्ट नहीं मिली है. खामा न्यूज ने बताया कि काबुल के एक आपातकालीन अस्पताल ने पुष्टि की है कि शुक्रवार रात 17 शवों और 40 घायलों को अस्पताल ले जाया गया. नंगरहार प्रांत के जलालाबाद से अपुष्ट खबरों में कहा गया है कि शुक्रवार रात हुई गोलीबारी में 17 लोग मारे गए या घायल हुए हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहद भारी और भयावह गोलीबारी पंजशीर प्रांत पर कथित कब्जे के जश्न के तौर पर की गई थी, जो अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात का विरोध करने वाला एकमात्र विद्रोही प्रांत है. इस बीच, तालिबान अधिकारियों ने गोलीबारी की निंदा की और इस तरह की घटना दोहराने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी.
13 सिंतबर को जिनिवा में सम्मेलन
UNHCR ने शुक्रवार को आगाह करते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में, मौजूदा हालात को देखते हुए, और नाजुक हालात का सामना कर रहे अफगान लोगों द्वारा, सीमापार शरण मांगने के मद्देनजर अनिश्चितता की स्थिति में, एक बहुत बड़ा मानवीय संकट दिखाई दे रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने 13 सितम्बर को जिनीवा में एक सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है. इस सम्मेलन में इन्हीं संकट के समाधान के लिए धन इकट्ठा करने जैसे प्रयास को लेकर चर्चा होगी.
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफान दुजैरिक ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा, 'इस सम्मेलन के जरिये, धन इकट्ठा करने के प्रयासों में तेजी की हिमायत की जाएगी ताकि मानवीय सहायता अभियान जारी रह सके. साथ ही निर्बाध मानवीय सहायता जारी रखने देने की अपील भी की जाएगी ताकि जरूरतमन्द लोगों को जरूरी सेवाएं हासिल होती रहें.'
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यूएन प्रवक्ता ने कहा कि ये विश्व संगठन, अफगानिस्तान में लाखों जरूरतमन्द लोगों के लिये मानवीय सहायता मुहैया कराने के लिये प्रतिबद्ध है. अभी तक हासिल किये गए विकास लाभों को सहेजना भी होगा ताकि उन्हें अफगानिस्तान में मध्यम व दीर्घकालीन स्थिरता से जोड़ा जा सके. लोगों के मानवाधिकार, सुरक्षा और महिलाओं व लड़कियों की हिफाजत, इस कड़ी का बहुत अहम व जरूरी हिस्सा है.
तालिबानी लड़ाकों ने रात भर आसमान पर रखी नजर
अफगानिस्तान में 20 साल की लड़ाई के आखिरी पलों को थके हुए तालिबान लड़ाकों ने रात आसमान पर नजर रखते हुए बिताया. जिससे संकेत मिल सके कि अमेरिका काबुल से पूरी तरह वापसी कर चुका है. अमेरिकी जनरलों ने भी दूर से इसी मकसद से वीडियो स्क्रीन पर नजर गड़ाये रखी. अब जो लोग फंस गये हैं उन्हें अब भविष्य को लेकर डर है. यह डर तालिबान की क्रूरता और महिलाओं के दमन के इतिहास को लेकर है. दुनियाभर में हजारों अमेरिकी अधिकारी तथा स्वयंसेवी अफगान शरणार्थियों की मदद में लगे हैं, लेकिन अब भी शांति नहीं है.
काबुल में संवाददाताओं ने जो देखा और लोगों ने साक्षात्कारों में जो बताया उससे यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि जंग क्रूरता, लंबे समय तक की वेदनाओं के साथ समाप्त हुई. दो दशकों से दोनों तरफ के लोगों का एक ही मकसद था. अमेरिका और तालिबान दोनों ही चाहते थे कि अमेरिका अफगानिस्तान से बाहर हो जाए. दोनों ही पक्षों के लिए आखिर के 24 घंटे बड़े महत्व वाले थे. अमेरिका के आखिरी विमान के उड़ान भरने के साथ यह जंग समाप्त हो गयी.