Advertisement

पंजशीर में आमने-सामने की टक्कर की नौबत, हथियारों समेत पहुंच रहा तालिबान, मुकाबले को तैयार मसूद के लड़ाके

अफगानिस्तान में तालिबान के लिए अजेय बने रहे पंजशीर घाटी में भी लड़ाके पहुंच रहे हैं. तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण तरीके से अहमद मसूद की सेनाएं सरेंडर नहीं करेंगी तो उन पर हमला किया जाएगा.

पंजशीर प्रांत पर अब तक नहीं है तालिबान का कब्जा (फोटो-AP) पंजशीर प्रांत पर अब तक नहीं है तालिबान का कब्जा (फोटो-AP)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 12:25 AM IST
  • पंजशीर में तालिबान को मिलेगी कड़ी टक्कर
  • तालिबान-पंजशीर फौज में युद्ध की आशंका
  • पंजशीर सीमा पहुंच रहे तालिबानी लड़ाके

अफगानिस्तान में तालिबान के लिए अजेय बने रहे पंजशीर घाटी में भी लड़ाके पहुंच रहे हैं. तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण तरीके से अहमद मसूद की सेनाएं सरेंडर नहीं करेंगी तो उन पर हमला किया जाएगा. तालिबान ने अफगानिस्तान के 33 प्रांतों पर कब्जा कर लिया है. सिर्फ एक पंजशीर प्रांत ही ऐसा है, जहां तालिबान की सत्ता नहीं है.

दरअसल, पंजशीर में अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद और खुद को अफगानिस्तान का केयरटेकर राष्ट्रपति घोषित कर चुके अमरुल्लाह सालेह तालिबान को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. इकलौता प्रांत पंजशीर ही है, जहां तालिबान के खिलाफ नया नेतृत्व बन रहा है, जो तालिबान की सत्ता को मानने से इनकार कर रहा है.

Advertisement

तालिबान ने बताया है कि उसके कई सौ लड़ाके पंजशीर की घाटी में पहुंच रहे हैं. मालूम हो कि काबुल पर कब्जा जमाए जाने के बाद से ही पंजशीर में लगातार तालिबान के खिलाफ रणनीति बन रही है. 

अहमद मसूद के पिता अहमद शाह मसूद भी तालिबान से हमेशा लड़ते रहे हैं. उन्होंने तो अफगानिस्तान से सोवियत संघ को भी बाहर करने में अहम भूमिका निभाई थी. अहमद शाह मसूद की हत्या साल 2001 में तालिबान और अलकायदा के लड़ाकों ने की थी.

अफगान की महिला को उड़ते प्लेन में होने लगी प्रसव पीड़ा, US एयरफोर्स ने इस तरह कराई डिलीवरी 

'बिना लड़े अफगानी सेना ने किया सरेंडर'

वहीं अफगानिस्तान के तजाकिस्तान में तैनात राजदूत मोहम्मद जहीर अगबर ने इंडिया टुडे से हुई बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान के पास अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित एक बेहतरीन सेना थी वहीं तालिबानी लड़ाके पूरी तरह से ट्रेंड नहीं थे. अशरफ गनी का तालिबान के खौफ से देश छोड़ना बड़ा मुद्दा था. अशरफ गनी ने बिना किसी लड़ाई के आत्मसमर्पण कर दिया. वे ताजिकिस्तान भी नहीं आए.

अमरुल्ला सालेह की सरकार है वैध!

 राजदूत मोहम्मद जहीर अगबर ने संविधान की दुहाई देते हुए कहा कि जब किसी राष्ट्रपित का निधन हो जाता है, या कोई राष्ट्रपति मुल्क छोड़कर भाग जाता है, ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति पदाभार ग्रहण करता है. अमरुल्ला सालेह के सरकार का ऐलान, वैध है. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में युद्ध अफगानों का नहीं, बल्कि महाशक्तियों का था. युद्ध का परिणाम शांति माना जा रहा था, लेकिन ऐसा होने से पहले ही गनी ने हार मान ली.

पंजशीर बना रहेगा सुरक्षित क्षेत्र

राजदूत मोहम्मद जहीर अगबर ने कहा कि तालिबान को यह समझने की जरूरत है कि अफगानिस्तान वही नहीं है. यह पिछले 20 वर्षों में बदल गया है. अगर तालिबान एक समावेशी सरकार चाहता है तो उस पर विचार करना चाहिए. नहीं तो सब बेअसर होगा. सालेह जहां एक्शन ले रहे हैं, वहीं अशरफ गनी ने पलायन का विकल्प चुना. वहीं अहमद शाह के बेटे मसूद की मांग है कि वहां शांति रहे. पंजशीर घाटी के लोग हमला नहीं करना चाहते; वे अपनी रक्षा के लिए सशस्त्र हैं.आशा है पंजशीर सुरक्षित क्षेत्र बना रहेगा.

निर्वासित सरकार के रक्षामंत्री ने सुरक्षा का किया वादा

राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार में रक्षा मंत्री रहे जनरल बिस्मिल्लाह मोहम्मदी ऐलान किया है किया है कि वे पंजशीर की सुरक्षा करते रहेंगे. उन्होंने कहा है कि पंजशीर घाटी तालिबानी ताकतों का विरोध लगातार करती रहेगी. घाटी में जंग जारी रहेगी. यह बयान एक ऐसे वक्त में आया है जब अफगानिस्तान की सत्ता पर पूरी तरह से तालिबान काबिज हो गया है.

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement