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समुद्र में फटी टाइटन पनडुब्बी के परखच्चे इतनी गहराई में मिले, सामने आईं PHOTOS

18 जून को टाइटैनिक जहाज का मलबा देखने निकली पनडुब्बी टाइटन का मलबा समुद्र में 12,500 फीट की गहराई में मिला है. हादसे के बाद पहली बार पनडुब्बी के मलबे को देखा गया है. जिसकी कुछ भयावह तस्वीरें भी सामने आईं हैं.

गुरुवार को टाइटन पनडुब्बी का मलबा बरामद किया गया. (फोटो-एपी) गुरुवार को टाइटन पनडुब्बी का मलबा बरामद किया गया. (फोटो-एपी)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2023,
  • अपडेटेड 5:23 PM IST

बीते दिनों समुद्र में डूबे टाइटैनिक जहाज का मलबा देखने निकले टाइटन पनडुब्बी में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई थी. तलाशी अभियान का नेतृत्व कर रहे यूएस कोस्ट गार्ड के मुताबिक, भारी दबाव के कारण टाइटन जबरदस्त विस्फोट का शिकार हो गई जिससे सभी लोगों की मौत हो गई. 18 जून को सफर पर निकली पनडुब्बी का मलबा समुद्र में 12,500 फीट की गहराई में मिला है. 

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एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, पनडुब्बी के टुकड़ों को खोजकर समुद्र तट पर लाया जा रहा है. इस मलबे को कनाडा के सेंट जॉन्स बंदरगाह पर होराइजन आर्कटिक जहाज से लाया गया है.

18 जून को OceanGate कंपनी की यह पनडुब्बी सफर निकली थी, लेकिन शुरुआती दो घंटों के भीतर ही इससे संपर्क टूट गया था. पनडुब्बी में सवार सभी पांच लोग जाने-माने अरबपति थे. इसमें OceanGate के सीईओ स्टॉकन रश, शहजादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान दाऊद, हामिश हार्डिंग और समुद्र विज्ञानी पॉल-हेनरी नार्जियोलेट शामिल थे. 

टाइटैनिक जहाज से 1600 फीट दूरी पर मिला मलबा

रिपोर्ट में बताया गया है कि टाइटन पनडुब्बी का मलबा समुद्र में लगभग 12,500 फीट की गहराई में मिला है. यह मलबा टाइटैनिक के मलबे से करीब 1600 फीट की दूरी पर था. तलाशी अभियान का नेतृत्व कर रहे यूएस कोस्ट गार्ड ने कहा है कि उत्तरी अटलांटिक के दुर्गम क्षेत्र में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम की जांच एजेंसियों की ओर से जारी तलाशी के दौरान यह मलबा मिला है.

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                 फोटो क्रेडिट- एपी

यूएस कोस्ट गार्ड के चीफ इन्वेस्टिगेटर कैप्टन जेसन न्यूबॉयर ने कहा कि दुर्घटनास्थल का नक्शा तैयार कर लिया गया है. हालांकि, उन्होंने इस इन्वेस्टिगेशन की समयसीमा नहीं बताई है. उन्होंने कहा कि अंतिम रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन की ओर से जारी की जाएगी. उन्होंने कहा, "मेरा पहला लक्ष्य यह है कि दुनियाभर में समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को बेहतर करने के लिए जरूरी सिफारिशें की जाए जिससे इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके."

      फोटो क्रेडिट- एपी

कैसे खोजा गया टाइटन पनडुब्बी का मलबा

टाइटन पनडुब्बी के मलबे की खोज कनाडाई जहाज होराइजन आर्कटिक की मदद से की गई है. होराइजन जहाज पनडुब्बी के टुकड़ों की खोज के लिए एक आरओवी (दूर से संचालित वाहन) ले गया था. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, यह आरओवी पेलजिक रिसर्च सर्विसेज कंपनी की है. कंपनी के प्रवक्ता जेफ महोनी ने कहा है कि शरीरिक और मानसिक चुनौतियों के बावजूद हम इस ऑपरेशन में दस दिनों से चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं. 

कितनी गहराई में है टाइटैनिक जहाज का मलबा 

टाइटैनिक का मलबा समुद्र की सतह से 12,500 फीट की गहराई में है.एक अनुमान के मुताबिक, टाइटैनिक का मलबा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की ऊंचाई से भी साढ़े चार गुना ज्यादा गहराई में है.

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सूरज की रोशनी भी समुद्र के पानी में महज 660 फीट तक ही जा सकती है. स्कूबा डाइविंग के लिए लोग 130 फीट गहराई तक ही जाते हैं. समुद्र में अब तक का सबसे गहरा अंडरवाटर रेस्क्यू 1,575 फीट की गहराई में किया गया था.

टाइटैनिक हादसे को अब तक का सबसे बड़ा समुद्री हादसा माना जाता है. 14 अप्रैल 1912 की आधी रात को टाइटैनिक जहाज एक विशाल हिमखंड से टकराकर उत्तरी अटलांटिक महासागर में डूब गया था. जहाज में कुल 2200 लोग सवार थे जिसमें से करीब 1500 लोगों की जान चली गई थी. हादसे के वक्त टाइटैनिक लगभग 41 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से न्यूयार्क की तरफ बढ़ रहा था. 

लगभग 15 लाख ब्रिटिश पाउंड की लागत से हार्लैंड एंड वूल्फ कंपनी ने टाइटैनिक को लगभग तीन साल में बनाया था. कंपनी ने दावा किया था कि जहाज का डिजाइन इस तरह से बनाया गया है कि यह कभी नहीं डूब सकता. लेकिन अपनी पहली यात्रा में ही टाइटैनिक डूब गया था.

 

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