
तुर्की और सीरिया बीते दिनों ऐसे भूकंप के झटकों के गवाह बने, जो रह-रहकर लोगों को दहलाते रहे. भूकंप से अब तक 23000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अकेले तुर्की में 19,000 से ज्यादा लोग हैं. हसंते-खेलते परिवार मातम में डूबे हुए हैं. आकाश को छूती चमकदार इमारतें, कब्रों में तब्दील हो गई हैं. इस जलजले ने तुर्की में दो दशक पहले आए उस भयावह भूकंप के जख्मों को हरा कर दिया है, जो यहां के लोगों के लिए नासूर बन गए थे. दरअसल अगस्त 1999 में रिक्टर स्केल पर 7.6 तीव्रता के भूकंप ने 17500 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था.
भूकंप के झटकों का सिलसिला
छह फरवरी को स्थानीय समयानुसार तड़के 4.17 मिनट पर तुर्की और सीरिया रिक्टर पैमाने पर 7.8 तीव्रता के भूकंप के झटकों से जाग उठा. इस भूकंप का केंद्र 18 किलोमीटर जमीन के नीचे था. कुछ ही मिनटों के भीतर रिक्टर स्केल पर 6.7 तीव्रता के भूकंप ने फिर दहशत पैदा की. इसके लगभग नौ घंटे बाद दोपहर 1.24 मिनट पर जब लोग भूकंप से हुए नुकसान का जायजा ले रहे थे या इस त्रासदी में अपनों की मौत का मातम मना रहे थे, रिक्टर स्केल पर 7.5 तीव्रता का एक और भूकंप के झटके से देश दहल गया. रिक्टर स्केल पर आए भूकंप के भीषण झठके के बाद उसी इलाके में कई दिनों या फिर सालों तक भूकंप के छोटे-छोटे झटकों को आफ्टरशॉक कहा जाता है.
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के मुताबिक, यूएसजीएस डेटा के मुताबिक, तुर्की और सीरिया में सोमवार तड़के भूकंप के पहले झटके के बाद दो दिनों तक देश के उन्हीं इलाकों में रिक्टर स्केल पर चार या उससे अधिक तीव्रता के 130 से अधिक आफ्टरशॉक आए. इनमें से एक आफ्टरशॉक का केंद्र जमीन में 21 किलोमीटर की गहराई में रहा. ये आफ्टरशॉक इस आपदा से हुए विनाश को बयां कर सकते हैं. यहां तक कि साइप्रस, लेबनान और इजरायल जैसे आसपास के देशों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए. लेकिन अब सिर्फ समय ही भूकंप से हुए नुकसान का आकलन कर पाएगा.
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप अर्दोगान ने इस भूकंप को सदी की सबसे भयावह आपदा बताया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस भूकंप से मची तबाही के बाद तुर्की को फिर से खड़ा होने में सालों लग सकते हैं.
ऑस्ट्रेलियन अर्थक्वेक इंजीनियरिंग सोसाइटी के सदस्य केविन मैक्कयू का कहना है कि तुर्की के तबाह शहरों को दोबारा बनाने में एक दशक से ज्यादा का समय लग सकता है.
एनाटोलियन प्लेट में टूट
ऐतिहासिक रूप से तुर्की भूकंप रिस्क जोन में है. तुर्की अपनी टेक्टोनिक (एनाटोलियन प्लेट) लोकेशन की वजह से हाई रिस्क सेस्मिक जोन में है. तुर्की के दो प्रमुख फॉल्ट जोन ईस्ट एनाटोलियन और नॉर्थ एनाटोलियन है. फॉल्ट जोन टेक्टोनिक प्लेट्स के बीच की सीमा है.
तुर्की का ज्यादातर हिस्सा एनाटोलियन माइक्रोप्लेट पर मौजूद है. लेकिन दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी हिस्सा अरेबियन प्लेट पर आता है. अरेबियन प्लेट पर आने वाले इलाकों का नाम है- गजियांटेप, अद्यामन, दियारबकिर, सनिलउर्फा, मारदिन, बैटमैन, सिर्त, बिंगोई, मुस, बिटलिस, सिमक, वान, एरजुरम, अग्न, इग्दिन, हक्कारी.
हमारी पृथ्वी प्रमुख तौर पर चार परतों से बनी है. यानी इनर कोर (Inner Core), आउटर कोर (Outer Core), मैंटल (Mantle) और क्रस्ट (Crust). क्रस्ट सबसे ऊपरी परत होती है. इसके बाद होता है मैंटल. ये दोनों मिलकर बनाते हैं लीथोस्फेयर (Lithosphere). लीथोस्फेयर की मोटाई 50 किलोमीटर है. जो अलग-अलग परतों वाली प्लेटों से मिलकर बनी है. जिसे टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) कहते हैं.
यूएसजीएस डेटा के मुताबिक, तुर्की में बीते पांच दशकों में 17000 से अधिक भूकंप आ चुके हैं. ये भूकंप रिक्टर स्केल पर 2.5 या उससे अधिक तीव्रता के रहे.
इंस्ताबुल की BoÄŸaziçi यूनिवर्सटी में कांडीली ऑब्जर्वेटरी एंड अर्थक्वेक रिसर्च इंस्टीट्यूट के फातिह बुलुत ने बताया कि टेक्टोनिक प्लेट में यह टूट भयावह भूकंप की वजह से हुआ है. इसमें कोई चौंकने वाली बात नहीं है. यूएसजीएस के मुताबिक, 2023 के भूकंप और 1999 के झटकों के अलावा तुर्की का सबसे विनाशकारी भूकंप 26 दिसंबर 1939 का भूकंप था जिसमें 32,700 लोगों की मौत हुई थी.