
सोमवार तड़के आए भूकंप से तुर्की और सीरिया में तबाही का मंजर है. इस भूकंप में अब तक 4300 लोगों के मारे जाने की खबर है. सीरिया और तुर्की के भूकंप प्रभावित इलाकों से आ रहे वीडियो और तस्वीरें झरझोर देने वाली हैं. बचावकर्मियों ने सीरिया में 18 महीने की एक बच्ची को रेस्क्यू किया है जिसने इस हादसे में अपनी गर्भवती मां और भाई-बहन को खो दिया.
बचावकर्मियों की बांहों में झूलती सीरिया की नन्हीं बच्ची जब मलबे से बाहर आई तो उसके परिवार में बचे लोगों को उम्मीद बंधी कि उसकी मां भी जिंदा होगी. लेकिन उसकी मां और परिवार के बाकी लोग मलबे में दबकर मारे गए.
सीरियाई बच्ची राघद इस्माइल की देखभाल उसके चाचा कर रहे हैं. उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि मलबे में दबने से इस्माइल की गर्भवती मां और उसके दो भाई-बहनों को मृत्यु हो गई.
18 महीने की इस्माइल अपने साथ हुए हादसे से बेहद डरी हुई थी और उसने बहुत देर बाद उसने रोटी का एक टुकड़ा खाया. सीरिया में इस वक्त काफी ठंड पड़ रही है और भारी बर्फबारी की भी संभावनाएं हैं. नन्हीं जान को ठंड से बचाने के लिए उसके चाचा ने हीटर का इंतजाम किया है.
चाचा अबू हुसाम ने बताया, 'ये तो ठीक है, लेकिन लग रहा है कि इसके पापा की कमर टूट गई है. इसकी प्रेग्नेंट मां, उनकी पांच साल की बेटी और चार साल का बेटा, सभी मलबे में दबकर मारे गए.'
अबू हुसाम ने कहा कि जिस इमारत में दबकर इस्माइल के परिवार वालों की मौत हुई, उसी इमारत के मलबे से एक अन्य परिवार को बचा लिया गया है. परिवार में एक महिला और उसके तीन बच्चे थे.
रेस्क्यू में परेशानी खड़ी कर रहा खराब मौसम
भूकंप से तबाह सीरिया और तुर्की में रेस्क्यू अभियान जारी है लेकिन खराब मौसम और कड़ाके की ठंड के कारण इसमें काफी दिक्कतें आ रही हैं. बारिश के कारण मलबे से लोगों को निकालने में दिक्कत आ रही है. सीरिया के अलेप्पो प्रांत में इस भूकंप ने भारी तबाही मचाई है. वहां के शहरों में इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं. लोग रात को गहरी नींद में सो रहे थे और अचानक आए इस भूकंप ने हजारों लोगों को हमेशा के लिए नींद में सुला दिया.
तुर्की में राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. एर्दोगन ने बताया है कि 45 देशों ने उन्हें मदद की पेशकश की है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुर्की के लोगों के साथ अपनी संवेदना जताते हुए सोमवार को राहत कार्य में तुर्की की मदद करने का ऐलान किया था. इसके बाद भारत ने रेस्क्यू के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें तुर्की भेजी हैं. भारत की तरफ से जरूरी दवाएं और मेडिकल टीम भी तुर्की रवाना हो चुकी है.
इस मदद के लिए भारत में तुर्की के राजदूत ने भारत का शुक्रिया अदा किया है. उन्होंने ट्वीट किया, 'तुर्की और हिंदी में दोस्त सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला शब्द है. हमारी तुर्की भाषा में एक कहावत है जिसका मतलब होता है-जरूरत के समय जो काम आए वही सच्चा दोस्त होता है. बहुत शुक्रिया.'