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ब्रिटेन में चीन जैसी तबाही! कोरोना की 5वीं लहर की एंट्री, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय जारी नहीं करेगा डेटा

दुनियाभर में कोरोना के मामले बढ़ने के बीच ब्रिटेन ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन और दवाइयों की मदद से हम वायरस के साथ जीना सीख गए हैं. ऐसे में कोरोना के मॉडलिंग डेटा को जारी करते रहना अब जरूरी नहीं है. लेकिन फिर भी हम इस पर नजर बनाए हुए हैं.

सांकेतिक तस्वीर (Photo: Reuters) सांकेतिक तस्वीर (Photo: Reuters)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 7:12 PM IST

चीन में कोरोना के कहर के बीच दुनियाभर में लोग एक बार फिर दहशत में हैं. ब्रिटेन में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं. वहां कोरोना की पांचवीं लहर ने दस्तक दे दी है. ऐसे में सरकार ने कहा है कि वह नए साल से कोरोना के नियमित आंकड़ें जारी करना बंद कर देगा.

ब्रिटेन स्वास्थ्य प्रशासन ने इसकी वजह बताते हुए कहा है कि कोरोना वैक्सीन और दवाइयों की मदद से देश ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां वह इस वायरस के साथ जीना सीख गया है. ऐसे में कोरोना के आंकड़े जारी करने की अब कोई जरूरत दिखाई नहीं पड़ती.

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हालांकि, ब्रिटेन हेल्थ सिक्योरटी एजेंसी (यूकेएचएसए) का कहना है कि ब्रिटेन सीजनल फ्लू जैसी अन्य बीमारियों की तरह कोरोना की स्थिति पर नजर रखेगा. इस साल अप्रैल महीने से कोरोना की रिप्रोडक्टिव रेट यानी जिस रफ्तार से कोरोना से लोग संक्रमित हो रहे हैं, उसके आंकड़ें हर दो हफ्ते पर प्रकाशित होते रहे हैं. 

यूकेएचएसए एपडियोमोलॉजी मॉडलिंग रिव्यू ग्रुप (ईएमआरजी) के चेयरमैन डॉ. निक वॉटकिन्स का कहना है कि कोरोना के दौरान 'आर वैल्यू' और ग्रोथ रेट से ही सबसे आसान और सरल इंडिकेटर रहा. दरअसल आर वैल्यू' वह पैमाना है, जिसके जरिए कोरोना के ट्रांसमिशन की रफ्तार का पता चलता है.

उन्होंने कहा कि वैक्सीन ईजाद होने से हम एक ऐसे चरण में पहुंच गए हैं, जहां हम कोरोना के साथ जीना सीख गए हैं. लेकिन फिर भी हम इस पर नजर बनाए हुए हैं. लेकिन कोरोना के मॉडलिंग डेटा को जारी करते रहना अब जरूरी नहीं है.

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उन्होंने कहा कि हम कोविड-19 को उसी तरह से मॉनिटर करना जारी रखेंगे, जिस तरह से हम अन्य बीमारियों पर नजर बनाए रखते हैं. सभी जारी डेटा की समीक्षा की जाती है और इस मॉडलिंग डेटा को जरूरत पड़ने पर दोबारा पेश किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, जब कोरोना का कोई नया वेरिएंट सामने आता है, तो इन्हें दोबारा पेश किया जा सकता है.

जनवरी में कोरोना की पीक की आशंका

ईएमआरजी का कहना है कि हाल ही में विस्तृत समीक्षा में तय हुआ कि कोरोना के अगले आंकड़ें छह जनवरी 2023 को पेश होंगे, जो आखिरी होंगे. 

किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर टिम स्पैक्टर का कहना है कि कोरोना और फ्लू के मामले अबी भी ब्रिटेन में बढ़ रहे हैं. जनवरी में इसका पीक होने की आशंका है. हालांकि, इसके बाद इसमें गिरावट आएघी. 

बता दें कि इस साल की शुरुआत में कोरोना को लेकर बाकी सभी पाबंदियों को हटा दिया गया था, जिसमें कोरोना के लक्षण पाए जाने पर सेल्फ-आइसोलेशन का नियम भी शामिल था. सर्दियों में कोरोना के मामले बढ़ने की आशंका के बीच स्वास्थ्य विभाग ने उन लोगों से त्योहारी गतिविधियों में शामिल होने से बचने को कहा था, जिन्हें श्वास संबंधी कुछ दिक्कतें हैं या जिनमें किसी तरह के लक्षण पाए जाएं. 

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मालूम हो कि ब्रिटेन में 17 से 23 दिसंबर के बीच हफ्तेभर में करीब 40 हजार नए मामले सामने आए हैं. इस दौरान 283 लोगों की मौत भी हुई है. हालांकि, 22 और 23 दिसंबर को एक भी मौत दर्ज नहीं हुई.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, यूके उन 15 देशों में शामिल है जहां कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है.

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