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'बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले हुए, उनके घर जलाए गए', संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा

12 फरवरी को जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में ये भी उल्लेख किया गया है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसक भीड़ के हमले शेख हसीना के भारत भागने से पहले ही शुरू हो गए थे. रिपोर्ट में ये भी खुलासा किया गया कि हिंदुओं के साथ-साथ चटगांव हिल ट्रैक्ट्स में अहमदिया मुसलमानों और स्वदेशी समूहों को भी बांग्लादेश में अत्याचारों का सामना करना पड़ा.

बांग्लादेश में हिंसा के दौरान हिंदुओं पर हमले हुए थे (फाइल फोटो) बांग्लादेश में हिंसा के दौरान हिंदुओं पर हमले हुए थे (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • ढाका ,
  • 13 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 8:55 PM IST

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को 'अतिरंजित प्रचार' कहने वाले मोहम्मद यूनुस के दावे को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की एक रिपोर्ट ने खारिज कर दिया है. इस रिपोर्ट में हिंदू मंदिरों पर हमले, घरों को जलाने और भीड़ द्वारा की गई हिंसा के ठोस सबूत पेश किए गए हैं. संयोग से इस फैक्ट फाइंडिंग टीम को यूनुस की अंतरिम सरकार के निमंत्रण पर भेजा गया था.

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बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को भागने के लिए मजबूर होना पड़ा था. हिंसा के दौरान बांग्लादेश की 17 करोड़ आबादी में लगभग 8 फीसदी हिंदुओं को घातक हमलों का सामना करना पड़ा, उनके घरों, व्यवसायों और धार्मिक स्थलों पर तोड़फोड़ की गई.

अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के एक सप्ताह बाद रिपोर्टों को खंगाला गया और बांग्लादेश के सूत्रों से बात की गई. जिसमें बताया गया कि बांग्लादेश में शेख हसीना शासन के पतन के बाद तीन दिन तक हुई अराजकता में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की 200 से अधिक घटनाएं हुईं, जिनमें 5 हत्याएं भी शामिल हैं. हालांकि, जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की आलोचना की, तब भी यूनुस ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को कमतर आंकते हुए इसे देश को अस्थिर करने के उद्देश्य से राजनीतिक उद्देश्यों के साथ "अतिरंजित प्रचार" बताया.

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12 फरवरी को जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में ये भी उल्लेख किया गया है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसक भीड़ के हमले शेख हसीना के भारत भागने से पहले ही शुरू हो गए थे. रिपोर्ट में ये भी खुलासा किया गया कि हिंदुओं के साथ-साथ चटगांव हिल ट्रैक्ट्स में अहमदिया मुसलमानों और स्वदेशी समूहों को भी बांग्लादेश में अत्याचारों का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान और उसके बाद चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में हिंदू समुदाय, अहमदिया मुसलमानों और स्थानीय समूहों के सदस्यों पर भीड़ द्वारा हिंसक हमले किए गए, जिनमें घरों को जलाना और पूजा स्थलों पर हमले शामिल थे. 

हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने पहले दावा किया था कि यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने उन्हें पर्याप्त रूप से सुरक्षा नहीं दी है. नवंबर में समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के हवाले से बताया कि अगस्त 2024 में शेख हसीना को भागने के लिए मजबूर किए जाने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं को 2,000 से अधिक हमलों का सामना करना पड़ा. 

विदेश मंत्रालय के राज्यमंत्री (MoS) कीर्तिवर्धन सिंह ने पिछले सप्ताह संसद में कहा था कि 26 नवंबर 2024 से 25 जनवरी 2025 के बीच बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हमलों की 76 घटनाएं सामने आई हैं. रिपोर्ट में 23 हिंदुओं की मौत और बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हमले की 152 घटनाओं का हवाला दिया गया है. 

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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने बांग्लादेश में उन विशिष्ट स्थानों की ओर भी इशारा किया है, जहां हिंदुओं के खिलाफ हिंसा हुई थी. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि OHCHR को सौंपी गई जानकारी के अनुसार बुराशरदुबी, हतीबंधा, लालमोनिरहाट में 3 मंदिरों पर हमला किया गया और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया, साथ ही लगभग 20 घरों में लूटपाट की गई. 

रिपोर्ट में कहा गया कि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हिंदू घरों, व्यवसायों और पूजा स्थलों पर व्यापक हमले हुए, विशेष रूप से ग्रामीण और तनावपूर्ण क्षेत्रों जैसे ठाकुरगांव, लालमोनिरहाट और दिनाजपुर में. हालांकि सिलहट, खुलना और रंगपुर में भी हिंसा की घटनाएं हुईं. रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में संपत्ति का विनाश, आगजनी और धमकियां शामिल थीं, जो अपर्याप्त पुलिस कार्रवाई के कारण और बढ़ गईं. 

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