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अमेरिका में कल राष्ट्रपति चुनाव, जानें- रिपब्लिकन ट्रंप या डेमोक्रेट जो बिडेन, किसका पलड़ा है भारी

पिछली बार की तरह इस बार भी ट्रंप सर्वे में पीछे हैं लेकिन वह बाजी पलटने का दावा  कर रहे हैं. बिडेन ट्रंप के अनछुए मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है और ट्रंप के वोट बैंक में सेंध लगाई है.

जो बिडेन और डॉनल्ड ट्रंप. जो बिडेन और डॉनल्ड ट्रंप.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 9:04 AM IST
  • 2016 में डोनाल्ड ट्रंप को 538 में से 306 वोट मिले थे
  • स्विंग स्टेट्स पर निर्भर करेगा राष्ट्र
  • दो दिन बाद अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव

विश्वभर में कोरोना का प्रकोप अमेरिका में सबसे ज्यादा है. इस बीच अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव भी होने हैं. डेमोक्रेट खेमा जहां कोरोना से निपटने में ट्रंप की नीतियों को नाकाम बता रहा है. तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप चीनी वायरस के बहाने विरोधियों पर निशाना साध रहे हैं. मंगलवार को अमेरिका में चुनाव है. पिछली बार की तरह इस बार भी ट्रंप सर्वे में पीछे हैं लेकिन वह बाजी पलटने का दावा  कर रहे हैं. बिडेन ने ट्रंप के अनछुए मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है और ट्रंप के वोट बैंक में सेंध लगाई है.

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भारतीय मूल के वोटर बड़ी ताकत

अमेरिकी चुनाव में पहली बार भारतीय मूल के वोटर बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं. 16 राज्यों में इनकी संख्या कुल अमेरिकी आबादी के एक प्रतिशत से ज्यादा है. लेकिन खास बात ये है कि 13 लाख भारतीय उन 8 राज्यों में रहते हैं जहां कांटे का मुकाबला है. ऐसे में किसी भी पार्टी के लिए एक-एक वोट कीमती हो जाता है. याद रहे कि भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान अबकी बार ट्रंप सरकार का नारा लगाया था. ट्रंप भी गाहे बगाहे भारत के प्रति अपना प्रेम जाहिर करते आए हैं.

अमेरिका में कुल 24 करोड़ वोट

अमेरिका में 24 करोड़ मतदाता हैं. बीते 28 अक्टूबर तक 7.5 करोड़ से अधिक वोट डाले जा चुके हैं. 2016 में अर्ली वोटिंग से 5 करोड़ से अधिक लोगों ने वोट डाले थे. चुनावी जानकारों का कहना है कि पिछली बार की तरह इस बार भी साइलेंट वोटर ही किंगमेकर होंगे. यहां वोटिंग के लिए दो विकल्प हैं, एक तो मेल या फिर अर्ली वोटिंग दूसरा मतदान केंद्र पर जाकर वोट डालना.

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कैसे होता है अमेरिका में चुनाव

अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया भारत से अलग है. यहां राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है. अमेरिकी नागरिक उन लोगों को चुनते हैं जो राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. अमेरिका में कुल 50  राज्य हैं, 50 राज्यों से कुल 538 इलेक्टर्स चुने जाते हैं. इसे इलेक्टोरल कॉलेज कहते हैं. इलेक्टोरल कॉलेज में दो हाउस हैं. एक सीनेट और दूसरा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव.

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हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव राष्ट्रपति के चुनाव के लिए जाता है, पर यह पहली बार है जब 33 प्रतिशत सीनेट भी राष्ट्रपति चुनाव में जाएगा. हर राज्य में इलेक्टर्स की संख्या अलग-अलग है. जिस राज्य की आबादी जितनी अधिक होती है वहां उतने अधिक इलेक्टर्स होते हैं. राष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 270 मतों की जरूरत होती है.

2016 के नतीजे

पिछले राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों की बात करें तो डोनाल्ड ट्रंप को 538 में से 306 इलेक्टोरल वोट मिले थे जबकि हिलेरी क्लिंटन को 232 वोट मिले थे. कुल वोटों की बात करें तो हिलेरी को 48.2 फीसदी मतदान मिला था जबकि ट्रंप को 46.1 प्रतिशत वोट मिले थे. स्विंग स्टेट्स में ज्यादा वोट मिलने के चलते ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीत गए थे.

यहूदी वोटों पर सबकी नजर

अमेरिकी चुनाव में इस बार यहूदी वोटों पर सबकी नजर है. यहूदियों को परंपरागत तौर पर डेमोक्रेट पार्टी का वोटर माना जाता है. अमेरिका के बड़े बिजनेस पर इनका कब्जा है. ये अमेरिका की सबसे मजबूत और अमीर लॉबी है. 2016 के चुनाव में करीब 71 फीसदी यहुदियों ने ट्रंप के खिलाफ वोट किया. लेकिन अपने पूरे कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने दुनिया के एकमात्र यहूदी देश इजरायल को लेकर जिस तरह की नीति अपनाई, उसने बड़ा बदलाव किया है.

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