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भारत से उलट अमेरिकी राजनेता 'लोकसभा' की जगह 'राज्यसभा' का सदस्य बनने की होड़ में क्यों रहते हैं?

US Election series: अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव करीब आ रहा है. कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुकाबला है. अमेरिकी चुनाव और संसदीय सिस्टम में कई ऐसे रोचक तथ्य हैं जो भारत में लोगों को हैरान कर देंगे. सबसे मजेदार है, वहां की संसद के दोनों सदनों के चुनाव के सिस्टम और अपने देश की संसद के दोनों सदनों के चुनाव सिस्टम में अंतर. वहां के राष्ट्राध्यक्ष का चुनाव भी हमारे सिस्टम से काफी अलग होगा है.

United States Senate (File Photo) United States Senate (File Photo)
संदीप कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 9:25 AM IST

भारत और अमेरिका दुनिया के दो बड़े लोकतांत्रिक देश हैं, लेकिन दोनों देशों की चुनावी प्रक्रियाएं काफी अलग है. दोनों ही देशों में नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है. भारत में प्रधानमंत्री के पास कार्यकारी शक्तियां होती हैं तो अमेरिका में राष्ट्रपति के पास. अमेरिका में राष्ट्रपति के चुनाव के लिए प्राइमरी और कॉकस जैसी प्रक्रियाएं होती हैं, जबकि भारत में आम चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला होता है. लेकिन सबसे रोचक मामला ये है कि भारत में निचले सदन यानी लोकसभा का चुनाव जीतने के लिए हर नेता जोर आजमाइश करता है, लेकिन अमेरिका में उच्च सदन यानी सीनेट में जाने की नेताओं में होड़ रहती है. आखिर क्या है इस सिस्टम का रहस्य?

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दरअसल भारत में निचले सदन यानी लोकसभा का चुनाव जीतना नेताओं के लिए जमीनी सियासी पकड़ का उदाहरण होता है तो वहीं ऊपरी सदन यानी राज्यसभा को सियासी गलियारे का बैकडोर माना जाता है. अमेरिका में सिस्टम एकदम उल्टा है. वहां नेता निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव जाना कम पसंद करते हैं और ऊपरी सदन यानी सीनेट जाना ज्यादा. अमेरिका के इस सियासी गुणा-गणित को समझने के लिए वहां के संसदीय सिस्टम और चुनावी सिस्टम को समझना पहले जरूरी है.

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अमेरिका का संसदीय सिस्टम कैसा है?

भारत के लोकसभा और राज्यसभा की तरह अमेरिकी संसद या कांग्रेस में भी दो सदन हैं. हमारे उच्च सदन यानी राज्यसभा की तरह वहां का उच्च सदन सीनेट है. सीनेट में प्रत्येक राज्य से दो प्रतिनिधि यानी सीनेटर चुने जाते हैं, चाहे उस राज्य की आबादी कितनी भी हो. कुल 100 सीनेटर होते हैं. इसके मेंबर का चुनाव 6 साल के लिए होता है.

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वहीं हमारे निचले सदन यानी लोकसभा की तरह वहां होती है प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव. इसके सदस्यों का चुनाव राज्य की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है. इसमें कुल 435 सदस्य होते हैं. सरकार को चलाने में दोनों सदनों की एक जैसी भूमिका होती है. संसद के दोनों सदनों में से किसी एक में भी अधिकांश मत से किसी विधेयक को पारित किया जा सकता है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव का मेंबर दो साल के लिए चुनकर आता है.

क्यों सीनेट में जाना ज्यादा पसंद करते हैं नेता?

अमेरिका में नेता सीनेट का सदस्य बनना कई कारणों से पसंद करते हैं, जो इस पद की विशेषताओं और शक्तियों से जुड़े हैं.
सीनेटर 6 साल के लिए चुना जाता है इसलिए इसके चुनाव के तहत आए नेता की सत्ता में लंबी भागीदारी होती है. बराक ओबामा जैसे कई बड़े नेता सीनेट के रास्ते व्हाइट हाउस तक भी पहुंचे हैं. जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में नेता सिर्फ दो साल के लिए चुना जाता है. सीनेट के पास महत्वपूर्ण निर्णय लेने की शक्ति भी होती है. सीनेट में सदस्य बनने से नेताओं को महाभियोग, राष्ट्रपति की नियुक्तियों की पुष्टि, और विदेशी संधियों को मंजूरी देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी का अवसर मिलता है. ये शक्तियां उन्हें राजनीतिक प्रभाव और प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं.

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विदेशी संधियों की पुष्टि और राष्ट्रपति द्वारा की गई महत्वपूर्ण नियुक्तियों, जैसे कि न्यायाधीशों और कैबिनेट सदस्यों की पुष्टि, केवल सीनेट की स्वीकृति से होती है. सीनेटर को गिरफ्तारी से मुक्ति होती है. सदन के सत्र के दौरान, सीनेट के सदस्यों को दीवानी मामलों में गिरफ्तारी से छूट प्राप्त होती है, जिससे वे अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें. लंबी अवधि का कार्यकाल होने से सीनेटरों को स्थिरता और दीर्घकालिक योजना बनाने का अवसर मिलता है. सीनेट में सदस्य बनने से नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभाव और पहचान मिलती है. इसी कारण नेता अमेरिका में सीनेट का सदस्य बनने को एक आकर्षक विकल्प मानते हैं, जो उन्हें न केवल राजनीतिक शक्ति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डालने का भी अवसर प्रदान करता है.

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प्रमुख अमेरिकी सीनेटर जो राष्ट्रपति बने...

अमेरिका में सीनेट को बड़े सियासी पर्दे पर लॉन्चिंग का रूट माना जाता है. अमेरिका में कई प्रमुख सीनेटर रहे हैं जिन्होंने बाद में राष्ट्रपति का पद संभाला. अब्राहम लिंकन, लिंडन बी. जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश, बराक ओबामा, जो बाइडेन जैसे नेता सीनेट के रास्ते अमेरिका के सर्वोच्च पद तक पहुंचे.

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कैसे चुने जाते हैं सीनेटर?

भारत में निचले सदन यानी लोकसभा के मेंबर को सीधे लोकसभा क्षेत्रों के वोटर चुनते हैं जबकि राज्यसभा के चुनाव का एक सिस्टम है जिसमें विधायक वोटिंग करते हैं. अमेरिका में उच्च सदन यानी सीनेट के सदस्य का चुनाव प्रत्यक्ष जनमत से होता है. प्रत्येक राज्य से दो सीनेट सदस्य चुने जाते हैं, भले ही उस राज्य की जनसंख्या कितनी भी हो. डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा करती हैं. पहले राज्यों में प्राथमिक चुनाव होते हैं, जिसमें मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं.

फिर, प्राथमिक चुनावों के नतीजों के आधार पर प्रत्येक राजनीतिक दल का राष्ट्रीय कन्वेंशन होता है, जहां अंतिम उम्मीदवार का चयन होता है. फिर राष्ट्रीय कन्वेंशन में चुने गए उम्मीदवार के समर्थन में जनमत संग्रह होता है, जिसमें मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं. हालांकि मतदाता सीधे सीनेट सदस्य का चुनाव नहीं करते, लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव प्रक्रिया में शामिल होते हैं. इस तरह अमेरिका के 50 राज्यों से 100 सीनेटर चुने जाते हैं.

राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों का क्या रोल है?

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों की भूमिका प्रत्यक्ष नहीं होती. राष्ट्रपति का चुनाव मुख्य रूप से जनता के वोट और इलेक्टोरल कॉलेज के माध्यम से किया जाता है. प्रत्येक राज्य में राष्ट्रपति चुनाव के लिए इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों का चुनाव होता है. प्रत्येक राज्य के पास इलेक्टोरल वोटों की संख्या उसकी जनसंख्या और कांग्रेस में उसके प्रतिनिधियों की संख्या पर निर्भर करती है. कुल मिलाकर, अमेरिका में 538 इलेक्टोरल वोट होते हैं. सीनेट और प्रतिनिधि सभा के सदस्यों की संख्या राज्यों के लिए इलेक्टोरल वोटों की संख्या निर्धारित करती है.

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राष्ट्रपति के फैसलों को कब संसद रोक सकती है?

अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसलों को संसद यानी कांग्रेस रोक सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया कुछ विशेष परिस्थितियों पर निर्भर करती है. जैसे- यदि राष्ट्रपति ने संवैधानिक या कानूनी उल्लंघन किया है, तो प्रतिनिधि सभा महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. उसके बाद मामला सीनेट में जाता है, जो राष्ट्रपति के खिलाफ सुनवाई करती है और उसे हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत से मतदान करना होता है. कांग्रेस राष्ट्रपति के प्रस्तावित कानूनों को भी रोक सकती है. यदि कांग्रेस राष्ट्रपति के बजट को अस्वीकार करती है, तो राष्ट्रपति को अपने कार्यक्रमों को लागू करने में कठिनाई हो सकती है. अहम पदों पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्तियों को भी सदन की मंजूरी चाहिए होती है.

कब-कब अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले को संसद ने रोका?

1998-99 में कांग्रेस ने राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन उन्हें बरी कर दिया गया था. 2019 में, प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया, लेकिन सीनेट ने उन्हें भी बरी कर दिया था. साल 2019 में कांग्रेस ने राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित मेक्सिको सीमा दीवार के लिए धन आवंटन को रोक दिया था. तो 2021 में कांग्रेस ने राष्ट्रपति जो बाइडेन के अफगानिस्तान से सैनिक वापसी के फैसले को रोकने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहा.

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कैसे चुना जाता है अमेरिकी राष्ट्रपति?

प्राइमरी चुनाव और कॉकस...अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले नॉमिनेशन की प्रक्रिया. ये चुनाव दोनों पार्टियों के अंदर उम्मीदवार तय करने के लिए होता है. प्राइमरी चुनाव राज्य-दर-राज्य होते हैं. इसमें पार्टी के सदस्य वोट देकर अपने पसंदीदा उम्मीदवार का चयन करते हैं. फिर कॉकस यानी ऐसी बैठक जहां पार्टी के सदस्य एकत्रित होकर अपने उम्मीदवार का चयन करते हैं. इसके बाद, प्रत्येक पार्टी अपने उम्मीदवार का नामांकन एक नेशनल कन्वेंशन में करती है, जहां प्रतिनिधि अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए मतदान करते हैं. इससे पार्टी का फाइनल उम्मीदवार तय होता है. राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया पार्टी का उम्मीदवार अपने साथ एक रनिंगमेट का चुनाव करता है जो कि चुनाव जीतने पर उपराष्ट्रपति बनता है.

फिर राष्ट्रपति के चुनाव का दिन आता है. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव नवंबर के पहले मंगलवार को होते हैं. इस दिन नागरिक अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए वोट डालते हैं, जो कि इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य होते हैं. इलेक्टोरल कॉलेज के लिए चुने गए प्रतिनिधि यानी इलेक्टर्स राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. अमेरिका में कुल 538 इलेक्टर्स होते हैं, और किसी उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 वोट प्राप्त करने की आवश्यकता होती है.

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फिर अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव में जीते हुए उम्मीदवार के शपथ ग्रहण की बारी आती है. चुनाव नतीजों के बाद नए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति 20 जनवरी को शपथ लेते हैं.

कुछ रोचक तथ्य...

अमेरिका का राष्ट्रपति 4 साल के लिए चुना जाता है. अमेरिका में कोई व्यक्ति अधिकतम दो बार राष्ट्रपति बन सकता है. हालांकि, इस नियम के लागू होने से पहले ऐसे भी नेता रहे हैं, जिन्होंने दो बार से अधिक बार राष्ट्रपति पद संभाला है. जैसे फ्रेंकलिन रूजवेल्ट 4 मार्च 1933 से 12 अप्रैल 1945 के बीच बारह साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे. वे अकेले शख्स हैं जो दो बार से अधिक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे. कुल चार कार्यकाल. उनकी अपने चौथे कार्यकाल में मृत्यु हो गई. विलियम हेनरी हैरिसन 1841 में केवल 32 दिन इस पद पर रहे थे, जो किसी भी राष्ट्रपति का सबसे छोटा कार्यकाल है. जॉन एफ. केनेडी अमेरिका के अकेले राष्ट्रपति रहे हैं जिनका धर्म रोमन कैथोलिक था, बाकी सभी राष्ट्रपति प्रोटेस्टैंट रहे हैं.

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