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इजरायल की हिफाजत के लिए युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात करेगा अमेरिका, मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बाद लिया फैसला

रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के आदेश के बाद अमेरिका ने यूरोपीय और मध्य पूर्व क्षेत्रों में अतिरिक्त बैलिस्टिक मिसाइल से लैस क्रूजर और विध्वंसक भेज दिए हैं. अमेरिका ने यह कदम ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा इजरायल पर संभावित हमलों को देखते हुए उठाया गया है.

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका का बड़ा फैसला (AI Generated Image) मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका का बड़ा फैसला (AI Generated Image)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 8:07 AM IST

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अतिरिक्त लड़ाकू विमान और नौसेना के युद्धपोत तैनात करने का फैसला किया है. अमेरिका ने कहा है कि वह ईरान और उसके सहयोगी हमास और हिजबुल्लाह से खतरों को देखते हुए सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है. अमेरिका को अंदेशा है कि तेहरान में हमास नेता इस्माइल हानिया की हत्या की मौत का बदला लेने के लिए हमला कर सकता है.  

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अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने मध्य पूर्व और यूरोप में अतिरिक्त नौसेना क्रूजर और डिस्ट्रॉयर भेजने को मंजूरी दी है जो बैलिस्टिक मिसाइलों को मारकर गिरा सकते हैं. अमेरिका मध्य पूर्व में लड़ाकू विमानों का एक अतिरिक्त स्क्वाड्रन भी भेज रहा है. 

अमेरिका तैनात करेगा युद्धपोत

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने एक बयान में कहा, "ऑस्टिन ने अमेरिकी सैन्य दस्तों में समायोजन का आदेश दिया है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी सेना की सुरक्षा को मजबूत करना, इजरायल की रक्षा के लिए सहयोग बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका किसी भी हालात का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है." 

ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि पेंटागन मध्य पूर्व में अपने युद्धपोत 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' की जगह किसी और की तैनाती नहीं करेगा, लेकिन ऑस्टिन ने अटकलों पर विराम लगाते हुए इसकी जगह 'यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' (युद्धपोत) को तैनात करने का फैसला किया है.पेंटागन के बयान में कहा गया है कि इससे लैंड बेस्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम मजबूत होगा.  

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इजरायल की लगातार मदद करता रहा है अमेरिका

इससे पहले अमेरिकी सेना ने 13 अप्रैल को भी इसकी तैनाती की थी जब ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों के साथ इजरायली क्षेत्र पर हमला किया था. उस समय, इजरायल ने अमेरिका और अन्य सहयोगियों की मदद से लगभग 300 ड्रोन और मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया था. व्हाइट हाउस ने कहा कि बाइडेन ने नेतन्याहू के साथ गुरुवार को एक फोन कॉल में मिसाइलों और ड्रोन जैसे खतरों के खिलाफ इजरायल की मदद करने के लिए नए अमेरिकी रक्षात्मक सैन्य तैनाती पर चर्चा की.

इससे पहले अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर इजराइल पर हमला होता है तो अमेरिका उसकी मदद करेगा. जब ऑस्टिन ये पूछा गया कि क्या हानिया की हत्या में इजराइल का हाथ है और क्या अमेरिका को जानकारी थी? इस पर ऑस्टिन ने कहा कि उनके पास कोई जानकारी नहीं है. वहीं  ईरान और हमास दोनों ने इजरायल पर हत्या करने का आरोप लगाया है और अपने दुश्मन के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का संकल्प लिया है. इजरायल ने न तो इस्माइल हानिया की हत्या की जिम्मेदारी ली है और न ही इससे इनकार किया है.

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हानिया की ईरान में हुई हत्या

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने हमास नेता इस्माइल हानिया की हत्या के बाद इजरायल को कड़ी सजा देने की कसम खाई है.दरअसल इस्माइल हानिया मंगलवार को ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुआ था. उसने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई से भी मुलाकात की थी. हमास ने बताया कि बुधवार सुबह तेहरान स्थित उस घर को उड़ा दिया गया जिसमें हानिया रह रहा था और इस दौरान उनकी मौत हो गई. हमास ने इसके लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है. हमास नेता मूसा अबू मरजौक ने कहा कि हानिया की मौत बेकार नहीं जाएगा.

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