
अमेरिका ने चीन के अधिकारियों पर निगरानी और प्रतिबंध बढ़ा दिया है. अमेरिका ने ऐसे चीनियों को वीजा देने से मना कर दिया है जो चीन के मानवाधिकार हनन की पोल खोलने पर उन्हें प्रताड़ित करते हैं. अमेरिका की सत्ता से बाहर जा रहे ट्रंप प्रशासन का चीन के खिलाफ ये नया कदम है.
विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि ये प्रतिबंध चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों और ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लागू होगा जो प्रोपगैंडा में शामिल रहते हैं या फिर युनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट के साथ जुड़े हैं.
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े युनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट पर धमकी देने और शारीरिक हिंसा का आरोप है. आरोप है कि ये संगठन चीन प्रशासित उइगर, तिब्बत में चीनी जुल्मों की कहानियों को उजागर करने वाले लोगों को धमकी देता है, उनकी निजी जानकारी लीक कर देता है और कई बार ऐसे लोगों के साथ शारीरिक हिंसा भी की जाती है.
चीन अक्सर चीन से बाहर रहने वाले अपने नागरिकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाता है. ऐसे लोगों को तंग करने के लिए चीनी प्रशासन ने इनकी निजी जानकारी, इनके परिवार के सदस्यों की निजी जानकारियां सार्वजनिक कर देता है.
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माइक पोम्पियो ने कहा कि जो लोग इस तरह कर रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना कर रहे हैं, ऐसे लोगों का अमेरिका में स्वागत नहीं है.
बता दें कि चीन और अमेरिकी नेतृत्व के दरम्यान बढ़ते तनाव के बीच मानवाधिकार के मुद्दों, कोरोना वायरस संक्रमण, व्यापार और तकनीक, ताइवान के मुद्दे पर विवाद के बीच अमेरिका ने ये नया प्रतिबंध लगाया है.
अब यूनाइटेड फ्रंट की गतिविधियों में हिस्सा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को अमेरिका में प्रवेश की इजाजत नहीं होगी.