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बढ़ते कोरोना के बाद चीन पर ट्रैवल बैन लगना चाहिए या नहीं? क्या सोचते हैं भारतीय

लोकल सर्किल्स के सर्वे में शामिल 71 फीसदी लोगों का कहना है कि भारत को चीन से आने वाली फ्लाइटों को रोक देना चाहिए और चीन में 14 दिनों तक रहे किसी भी शख्स को अनिवार्य रूप से क्वारंटीन करना चाहिए. यह सर्वे इस ओर इशारा करता है कि अधिकतर भारतीय चीन से सभी तरह की डायरेक्ट और इनडायरेक्ट फ्लाइट्स सस्पेंड करने के पक्ष में हैं. 

सांकेतिक तस्वीर (Photo:AP) सांकेतिक तस्वीर (Photo:AP)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 3:06 PM IST

चीन में कोरोना एक बार फिर बेकाबू हो गया है. हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है. देश में हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि वहां का हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर लड़खड़ा गया है. ऐसे में चीन में कोरोना के कहर को लेकर भारतीयों के बीच एक सर्वे किया गया. इस सर्वे में शामिल अधिकतर भारतीयों का कहना है कि चीन से आने और जाने वाली सभी फ्लाइटों को तुरंत सस्पेंड कर देना चाहिए. 

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चीन में कोरोना से भारत में खौफ

दिसंबर 2019 में चीन से ही कोरोना दुनियाभर में फैला था. अब एक बार फिर चीन में कोरोना के तांडव ने भारतीयों की चिंता बढ़ा दी है. इस सिलसिले में लोकल सर्किल्स के एक सर्वे में शामिल 10 में से 7 भारतीयों ने कहा कि चीन से आने वाली सभी फ्लाइटों को तुरंत सस्पेंड कर देना चाहिए और सरकार को चीन में कम से कम 14 दिनों तक रहे लोगों को भारत में अनिवार्य रूप से क्वारंटीन करना चाहिए.

लोकल सर्किल्स के सर्वे के मुताबिक, सर्वे में शामिल 71 फीसदी लोगों का कहना है कि भारत को चीन से आने वाली सभी फ्लाइटों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर देना चाहिए और चीन में 14 दिनों तक रहे किसी भी शख्स को अनिवार्य रूप से क्वारंटीन करना चाहिए. 

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वहीं, इस सर्वे में शामिल 16 फीसदी लोगों का कहना है कि सरकार को चीन से आने वाली फ्लाइटों को सस्पेंड करना चाहिए और साथ में बीते 14 दिनों के दौरान चीन में रहे किसी भी शख्स को किसी अन्य देश से होते हुए भारत में आने देना चाहिए, बशर्ते उसके पास कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट हो. 

यह सर्वे इस ओर इशारा करता है कि अधिकतर लोगों (87 फीसदी) ने चीन से सभी तरह की डायरेक्ट और इनडायरेक्ट फ्लाइट्स सस्पेंड करने के पक्ष में हैं. 

चीन का हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर चरमराया

चीन में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से चीन के अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं. हालात ये है कि चीन में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से चरमरा गया है. कोरोना से मरने वाले लोगों के शवों से कब्रिस्तान पटे पड़े हैं. शवों को दफ्नाने के लिए कई-कई दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है. अस्पताल में सभी बेड मरीजों से भरे देखे जा सकते हैं. डॉक्टरों को फर्श पर मरीजों का इलाज करना पड़ा रहा है. 

देश में ऐसी संकट की घड़ी में ओवरटाइम कर रहे डॉक्टर काम के बोझ के तले लगातार बेहोश हो रहे हैं. राजधानी बीजिंग सहित कई शहरों को संक्रमण ने अपनी चपेट में ले लिया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेताया है कि चीन में आने वाले समय में हालात और बिगड़ने वाले हैं. ऐसे में चीन को फूंक-फूंककर कदम उठाने होंगे और किसी तरह की जल्दबाजी से बचना होगा.

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सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में कोरोना के नए मामले और मौतों की संख्या बेहद कम दिखाई दे रही है. 

चीन में बुधवार को कोरोना के 3101 नए मामले सामने आए, जिनमें से 3049 घरेलू मामले हैं. इसके साथ ही चीन में कोरोना की कुल संख्या 386,276 दर्ज हुई.

सरकार का कहना है कि चीन में अब सिर्फ सांस से जुड़ीं बीमारियों के चलते हुई मौतों को ही कोरोना से मौत के आंकड़ों में गिना जाएगा. सरकार का कहना है कि इसके तहत 20 दिसंबर को कोरोना से किसी भी शख्स की मौत नहीं हुई.

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