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एडल्ट पार्टी, कंडोम की फंडिंग, नास्तिकता को बढ़ावा... तो इसलिए USAID पर भड़के हैं ट्रंप!

डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आते ही एक आदेश जारी कर अमेरिकी एजेंसी USAID पर शिकंजा कस दिया. ये एजेंसी विदेशों में विकास प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग देती है. ट्रंप ने 90 दिनों तक फंडिंग रोक दी है और अब एजेंसी की मदद को लेकर हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं.

डोनाल्ड ट्रंप USAID को बंद करने जा रहे हैं (Photo- Reuters) डोनाल्ड ट्रंप USAID को बंद करने जा रहे हैं (Photo- Reuters)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 07 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 3:49 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए काम करने वाली एजेंसी यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) को बंद करने का मन बना लिया है. ट्रंप हमेशा से USAID के आलोचक रहे हैं और सत्ता में आते ही उन्होंने 90 दिनों के लिए एजेंसी की तरफ से दिए जाने वाले विदेशी सहायता पर रोक लगा दी. ट्रंप ने विदेशी मदद रोके जाने का ऐलान करते हुए कहा कि एजेंसी को 'कट्टरपंथी पागल' चला रहे हैं और इस 'फिजूलखर्ची', 'धोखाधड़ी' को उन्होंने रोकने की कसम खाई. ट्रंप प्रशासन ने एजेंसी के 8 हजार कर्मचारियों में से केवल 300 स्टाफ को रखने का फैसला लिया है. 

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इसी बीच, अमेरिका के हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष ब्रायन मस्ट ने बाइडेन प्रशासन के तहत एजेंसी की तरफ से किए गए खर्चों की जानकारी दी. उन्होंने एजेंसी के खर्चों को लेकर जो खुलासा किया है वो थोड़ा हैरान करने वाला भी है, जिसमें इक्वाडोर में ड्रैग शो को फंड करने से लेकर अवैध प्रवासियों के लिए नकद वाउचर देने और तालिबान को कंडोम के लिए पैसे देना शामिल है.

कमेटी ने एजेंसी की तरफ से किए गए खर्च की जानकारी देते हुए इसे अपमानजनक बताया है. ब्रायन मस्ट का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो खर्च की जानकारी दे रहे हैं.

इन अजीबोगरीब कामों के लिए खर्च हुआ अमेरिकी टैक्सपेयर का पैसा

USAID ने तालिबान को दिए 1.5 करोड़ डॉलर के कंडोम- वीडियो में मस्ट ने दावा किया कि USAID ने तालिबान को 1.5 करोड़ डॉलर के कंडोम दिए. अफगानिस्तान पर शासन कर रहा तालिबान एक चरमपंथी समूह है जो महिलाओं के अधिकारों को दबाने के लिए जाना जाता है. मस्ट ने तालिबान के कंडोम खर्च का मजाक उड़ाते हुए कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अगर तालिबान को कंडोम नहीं दिया जाता तो वो मर गए होते.'

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इससे पहले व्हाइट हाइस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लैविट ने कहा था कि बाइडेन सरकार के तहत एजेंसी गाजा में 5 करोड़ डॉलर के कंडोम आवंटित करने जा रही थी जिसे ट्रंप प्रशासन ने रोक दिया है. हालांकि, उन्होंने इसे लेकर कोई सबूत नहीं दिया था. 

नेपाल में नास्तिकता को बढ़ावा देने के लिए 4.46 लाख डॉलर- अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि नेपाल में नास्तिकता को बढ़ावा देने के लिए भी लाखों डॉलर खर्च किए जा रहे थे. विदेश मंत्रालय के जरिए USAID ने नेपाल में नास्तिकता को बढ़ावा देने के लिए लगभग पांच लाख डॉलर का फंड दिया.

कोलंबिया में एक ट्रांसजेंडर ओपेरा के लिए 47 हजार डॉलर- अमेरिकी सरकार ने कोलंबिया में एक ट्रांसजेंडर-थीम वाले ओपेरा को फंड करने के लिए हजारों डॉलर खर्च किए. इस कदम से USAID की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

इक्वाडोर में ड्रैग शो के लिए 20,600 डॉलर- USAID ने LGBTQ सांस्कृतिक पहल के हिस्से के रूप में इक्वाडोर में ड्रैग प्रदर्शनों के लिए भुगतान किया. विदेश मामलों की समिति के अनुसार, इक्वाडोर के LGBTQ संगठन, Fundación Dialogo Diverso को तीन साल की अवधि में लगभग 75,000 डॉलर दिए गए, जिसमें पिछले साल का 25,000 डॉलर का अनुदान शामिल है.

संगठन ने इन पैसों को दो दिन के ड्रैग वर्कशॉप की मेजबानी करने और इसका वीडियो बनाने के लिए किया. ड्रैग शो मनोरंजन का एक तरीका है जिसमें ड्रैग आर्टिस्ट परफॉर्म करते हैं. ड्रैग शो पारंपरिक रूप से बार या नाइटक्लब में आयोजित होता है जो अकसर एडल्ट थीम पर आधारित होता है.

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अफ्रीका में फ्रेंच-भाषी LGBTQ समूहों को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख डॉलर- USAID ने विदेश विभाग के जरिए पश्चिम और मध्य अफ्रीका में LGBTQ अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख डॉलर दिया. कई अफ्रीकी देश अमेरिका की थोपी गई इस सामाजिक नीति को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, बावजूद इसके अमेरिका ने वहां इन नीतियों को बढ़ाने के लिए पैसे खर्च किए.

कैरिबियन में LGBTQ लोगों के समर्थन के लिए 30 लाख डॉलर- USAID ने कथित तौर पर कैरिबियन में LGBTQ लोगों का समर्थन करने के लिए 30 लाख डॉलर खर्च किए. हालांकि, इसका कोई विवरण नहीं दिया गया कि यह पैसा लोगों में कैसे बटा और इसकी जरूरत क्यों थी.

अर्जेंटीना में महिला और LGBTQ पत्रकारों के लिए जलवायु परिवर्तन सेमिनार पर 55,000 डॉलर- अमेरिकी एजेंसी ने अर्जेंटीना में जलवायु परिवर्तन पर आयोजित एक सेमिनार को फंडिंग की. सेमिनार महिला और LGBTQ पत्रकारों के लिए था जिसमें समावेशिता और निष्पक्षता पर चर्चा हुई थी.

ग्वाटेमाला में सेक्स चेंज और LGBTQ एक्टिविज्म के लिए 20 लाख डॉलर- व्हाइट हाउस ने बताया कि USAID ने ग्वाटेमाला में सेक्स चेंज और LGBTQ एक्टिविज्म के लिए 20 लाख डॉलर खर्च किए. सेंट्रल अमेरिकी देश ग्वाटेमाला रूढ़िवादी देश है जहां LGBTQ समुदाय को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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इंडोनेशिया की कॉफी कंपनियों को और अधिक लिंग-अनुकूल बनाने के लिए 4.25 लाख डॉलर- अमेरिका के टैक्सपेयर का पैसा इंडोनेशिया में कॉफी कंपनियों के भीतर लिंग समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए किया गया था. इन खर्चों के सामने आते ही इस बात को लेकर नाराजगी बढ़ गई है कि इन खर्चों के लिए कैसे अमेरिकी लोगों के पैसे को बर्बाद किया जा सकता है.

पेरू में एक ट्रांसजेंडर कॉमिक बुक के लिए 32,000 डॉलर- USAID ने पेरू में LGBTQ लोगों के कॉमिक कॉमिक बुक के लिए 32,000 डॉलर खर्च किए. आलोचक कह रहे हैं कि ऐसा करके अमेरिका ने एक खास संस्कृति को जबरदस्ती बढ़ावा दिया और उसे फंड भी किया है जो कि अमेरिकी लोगों के टैक्स के पैसे की बर्बादी है.

सीरिया में अल-कायदा के लड़ाकों को खाने की फंडिंग- व्हाइट हाउस के मुताबिक, USAID  ने सीरिया में खाना मुहैया कराने में लाखों डॉलर खर्च किए और यह खाना अल-कायदा से जुड़े लड़ाकों तक पहुंचा. आलोचकों का कहना है कि एजेंसी फंड तो जारी कर देती है लेकिन यह कहां जा रहा, कैसे इस्तेमाल हो रहा, इस पर नजर नहीं रख पा रही.

अफगान में अफीम की खेती के लिए करोड़ों डॉलर- USAID ने कथित तौर पर अफगानिस्तान में सिंचाई के लिए बनी नहरों, खेती के उपकरणों और उर्वरक पर करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं. इससे तालिबान की अफीम की खेती और फिर उनके हेरोइन के व्यापार को सीधे फायदा हुआ. इस फंडिंग ने दुनिया के सबसे बड़े अफीम नेटवर्क में से एक को बनाए रखने में मदद की, जिससे अमेरिका के ड्रग्स के खिलाफ की जा रही कोशिशों को नुकसान पहुंचा है.

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दक्षिणी सीमा पर प्रवासियों के लिए 1.4 करोड़ डॉलर के नकद वाउचर- ऐसे वक्त में जब अमेरिका खुद महंगाई से जूझ रहा है, USAID ने दक्षिणी सीमा पर प्रवासियों को 1.4 करोड़ डॉलर के नकद वाउचर आवंटित किए. आलोचकों का तर्क है कि यह नीति अवैध प्रवासियों को बढ़ावा देती है और यह टैक्स पेयर्स के पैसे का दुरुपयोग है.

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