
चीन की एक टेक कंपनी के दुनियाभर लोगों के डेटा जुटाने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि झेनझुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी दुनियाभर के देशों से मिलिट्री और खुफिया जानकारी जुटा रही थी. लेकिन ये डेटा लीक हो गया है.
विश्लेषकों का कहना है कि दुनियाभर के करीब 2.4 मिलियन लोगों के बारे में डेटाबेस तैयार किया गया है. यह डेटा सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिये तैयार किया गया है. दक्षिणी चीन की कंपनी झेनझुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने यह सूचनाएं एकत्र की हैं.
द गार्डियन की रिपोर्ट मुताबिक एक साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंसी ने बताया कि लीक हुए डेटासेट से लगभग 250,000 लोगों के रिकॉर्ड को रिकवर किया जा सकता था. इनमें 52,000 अमेरिकी, 35,000 ऑस्ट्रेलियाई और लगभग 10,000 ब्रिटिश नागरिकों से जुड़ा डेटा शामिल है. इनमें ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन और स्कॉट मॉरिसन, उनके रिश्तेदार, शाही परिवार, मशहूर हस्तियां और सैन्य दिग्गजों के डेटा भी शामिल हैं.
वहीं झेनझुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधि ने इस मामले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. चीनी कंपनी के प्रतिनिधि का कहना था कि, 'यह रिपोर्ट वास्तव में सही नहीं है.' कंपनी ने कहा कि वह इस मामले में बाद में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करेगी.
डिजिटल डेटा कलेक्ट करने का यह खुलासा अमेरिका के एक शख्स ने किया है. डेटाबेस अमेरिकी अकादमिक क्रिस्टोफर बैल्डिंग को लीक कर दिया गया था, जो पहले चीन के शेनजेन में रहते थे. लेकिन सुरक्षा चिंताओं के चलते वह वापस अमेरिका लौट आए थे. इसके बारे में सबसे पहले ऑस्ट्रेलियन फाइनेसियल रिव्यू और ब्रिटेन के टेलीग्राफ में रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी.
बैल्डिंग ने डेटा लीक को "चौंका देने वाला" बताया है. जारी एक बयान में बैल्डिंग ने कहा कि डेटा मुहैया कराने वाले लोगों ने खुद को जोखिम में डाल दिया है. हालांकि यह इस बात का प्रमाण है कि चीन के अंदर कई लोग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीसी की सत्तावाद और सर्विलांस को लेकर चिंतित हैं."
बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया है कि चीन की झेनझुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने लगभग 10 हजार भारतीयों का डेटा एकत्रित किया है. इसमें सोशल मीडिया पर लाइक और कमेंट तक, उनकी होने वाली उपस्थिति तक शामिल है. चीनी कंपनी की नजर देश के प्रधानमंत्री से लेकर बड़े बिजनेसमैन, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, नेता, सांसद खिलाड़ी पर टिकी है. चाइनीज़ इंटेलीजेंस के लिए काम करने का दावा करने वाली ये कंपनी दूसरे देशों के लोगों पर नजर रखती है. इसमें राजनीति, सरकार, टेक्नोलॉजी, मीडिया, फिल्म समेत कई अन्य क्षेत्रों के लोगों और संस्थानों की निगरानी की जाती है.