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ताल और थाप के संगम का अभ्यास जारी... सु-तरंग में बिखरेगी ओडिसी की छटा, पद्मश्री रंजना गौहर की शिष्याएं कर रहीं तैयारी

रंजना गौहर के प्रदर्शन उनकी छऊ, कथक और मणिपुरी नृत्य की ट्रेनिंग को दर्शाते हैं. उन्होंने "ओडिसी, द डांस डिवाइन" नामक किताब भी लिखी है और ओडिसी व अन्य नृत्य रूपों को बढ़ावा देने के लिए वृत्तचित्रों का निर्माण किया है. उन्होंने प्रसिद्ध गुरु मायाधर राउत के अधीन प्रशिक्षण लिया और उनके पास दर्शनशास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में डिग्रियां हैं.

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पद्मश्री नृत्यांगना रंजना गौहर
पद्मश्री नृत्यांगना रंजना गौहर

प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना रंजना गौहर से नृत्य की भाव-भंगिमाएं सीख रहीं उनकी शिष्याएं आगामी 20 अप्रैल को नई दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम सभागार में खूबसूरत प्रस्तुति देने वाली हैं. "सु-तरंग" नाम से हर साल होने वाली यह वार्षिक प्रस्तुति नृत्य कला के लिए एक उत्सव है. यह उत्सव शैक्षिक और सांस्कृतिक सोसाइटी की ओर से आयोजित किया जा रहा है. 

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इस संगठन की स्थापना रंजना गौहर ने ही की थी और सु-तरंग उनकी एक तालबद्ध और सुर बद्ध पहल है. जिसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को ओडिसी नृत्य की सुंदरता को एक कला के रूप में समझने में मदद करना है. पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित (2003) गौहर मानती हैं कि गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से युवा नर्तकियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के मूल्यों में शिक्षित करना और प्रशिक्षित करना उनकी जिम्मेदारी है.

रंजना गौहर

नए शिष्यों को मंच और कला के लिए सक्षम बनाना है लक्ष्य
गौहर ने कहा, "उत्सव में हमारा लक्ष्य नृत्य के जरिए अपने शिष्यों को सशक्त बनाना है, ताकि समाज में सामंजस्य और संतुलन बना रहे. उत्सव की सफलता की कहानी प्यार और उचित मार्गदर्शन के माहौल में निहित है, जहां बच्चे खिलते हैं. उन्हें अनुशासित प्रशिक्षण मिलता है और हर साल मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर दिए जाते हैं."

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गौहर के प्रदर्शन में छऊ, कथक और मणिपुरी नृत्य की उनके गहर अभ्यास और प्रशिक्षण की बारीकियां नजर आती हैं. उन्होंने "ओडिसी, द डांस डिवाइन" नामक किताब भी लिखी है और ओडिसी व अन्य नृत्य रूपों को बढ़ावा देने के लिए वृत्तचित्रों का निर्माण किया है. उन्होंने प्रसिद्ध गुरु मायाधर राउत के अधीन प्रशिक्षण लिया और उनके पास दर्शनशास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में डिग्रियां हैं.

उन्होंने खजुराहो महोत्सव और उज्जैन के कालिदास महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित नृत्य समारोहों में भी भाग लिया है. भारत की सांस्कृतिक दूत के रूप में, उन्होंने फेस्टिवल ऑफ इंडिया, क्वीन एलिजाबेथ रॉयल फेस्टिवल हॉल, द रॉयल हॉल ऑफ प्लायमाउथ, कॉमनवेल्थ इंस्टीट्यूट, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और बर्मिंघम के मिडलैंड्स आर्ट्स सेंटर जैसे प्रसिद्ध स्थानों पर प्रदर्शन किया है.

रंजना गौहर

कई सम्मानों से नवाजी जा चुकी हैं रंजना गौहर
रंजना गौहर को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2007), भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से ओडिसी नृत्य की मंदिर परंपरा पर शोध के लिए सीनियर फेलोशिप, इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार, महारी पुरस्कार (2007) और दिल्ली रत्न पुरस्कार शामिल हैं.

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