देश में धीरे-धीरे वैसे तो इलेक्ट्रिक गाड़ियां पॉपुलर हो रही हैं और सरकारें भी इसे बढ़ावा दे रही हैं, लेकिन फिर भी बहुत से लोगों के बीच इलेक्ट्रिक गाड़ियों से जुड़े कई ऐसे ‘झूठ’ प्रचलित हैं जिसकी वजह से वो इन्हें खरीदने से ‘डरते’ हैं. यहां हम आपको ऐसे ही 5 झूठ के बारे में बताने जा रहे हैं जो पूरी तरह बेबुनियाद हैं...
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इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर सबसे बड़ा ‘झूठ’ ये प्रचलित है कि पानी के संपर्क में आते ही इसमें ‘करंट’ लगने का डर रहता है. लेकिन ये बात हकीकत से कोसों दूर है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अलग-अलग भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों में चलने लायक तरीके से डिजाइन किया जाता है. ये एस्ट्रीम वेदर कंडीशन और नमी के स्तर के बीच काम करने में पूरी तरह सक्षम होती हैं. वहीं इनके बैटरी पैक को मोबाइल फोन की बैटरी की तरह वारटप्रूफ बनाया जाता है. जैसे MG Motors की ZS EV की बैटरी IP67 रेटिंग के साथ आती है. (Photo : Getty)
इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर दूसरा सबसे बड़ा ‘झूठ’ है कि घर से गाड़ी चार्ज करके अगर कहीं दूर निकल गए तो लौटते समय कैब करके वापस आना पड़ेगा. लेकिन ये बात सरासर गलत है. इलेक्ट्रिक गाड़ियां आम पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की जगह बेहतर तरीके से पॉवर सप्लाई का मैनेजमेंट करती हैं. अगर आप जाम में फंसते हैं तो पेट्रोल-डीजल गाड़ियां लगातार ईंधन पीती हैं, वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियां स्पीड कम करने या ब्रेक लगाने पर गाड़ी की बैटरी को दोबारा चार्ज करती हैं. (Photo : Reuters)
इलेक्ट्रिक गाड़ियों से जुड़ी एक और बड़ी ‘चिंता’ उनकी रेंज और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर है. चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर तो सरकार और प्राइवेट कंपनियां लगातार काम कर रही हैं. रही बात इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रेंज की तो इस समय, मार्केट में आने वाली अधिकतर इलेक्ट्रिक गाड़ियां सिंगल चार्ज में 250 से 300 किमी तक जाने में सक्षम हैं. आम तौर पर एक व्यक्ति लॉन्ग ड्राइव पर भी 150 से 200 किमी तक ही लगातार ड्राइव करता है और उसके बाद एक स्मॉल ब्रेक लेता है. ऐसे में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को इन ब्रेक के दौराज चार्ज किया लजा सकता है. वहीं 50kW के पब्लिक चार्जर पर एक घंटे से भी कम समय में इन गाड़ियों को 80% तक चार्ज किया जा सकता है.
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रेंज के अलावा उनकी पॉवर को लेकर भी कई तरह के ‘झूठ’ फैले हुए हैं. लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. दुनिया की सबसे मशहूर इलेक्ट्रिक कार Tesla सिर्फ 3 सेकेंड में 100 किमी की रफ्तार पकड़ लेती है. वहीं देश की सबसे पॉपुलर इलेक्ट्रिक गाड़ी Tata Nexon EV दस सेकेंड से भी कम में इतनी रफ्तार से भागती है.
इलेक्ट्रिक गाड़ियों से जुड़ा एक और ‘बड़ा झूठ’ इनके महंगे और मेंटिनेंस कॉस्ट ज्यादा होने का है. तो ये बात भी सच्चाई से परे है. देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली Nexon EV की कीमत 14.24 लाख रुपये से शुरू होती है. ये एक आम एसयूवी जितनी ही कीमत है. वहीं MG ZS EV की प्राइस भी 20.99 लाख रुपये से शुरू होती है. रही बात इलेक्ट्रिक गाड़ी के खर्च की तो पेट्रोल गाड़ी चलाने का प्रति किलोमीटर खर्च करीब 10 रुपये, डीजल का 7 से 8 रुपये है तो इलेक्ट्रिक गाड़ी पर ये 1 रुपये प्रति किमी ही रह जाता है.