पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और उसके धुएं से जहरीली होती हवा के चलते सीएनजी के बाद अब इलेक्ट्रिक व्हीकल पर सरकार का जोर है. उसकी ओर से लगातार कोशिशें हो रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल-डीजल की बजाय इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाएं. हालांकि नीतियों को लेकर अस्पष्टता, चार्जिंग स्टेशनों की कमी और वाहनों के ऊंचे दाम कुछ ऐसे कारण हैं जिनके चलते चार पहिया वाहनों के सेगमेंट में अभी इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए ज्यादा क्रेज नहीं दिख रहा. इसके उलट सीएनजी गाड़ियों की बिक्री लगातार बढ़ रही है. देश में हर दिन औसतन 550 से भी ज्यादा सीएनजी गाड़ियां बिक रही हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या लोग सीएनजी का विकल्प उपलब्ध होते हुए इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर मुड़ेंगे?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2021 के बीच देश में 1 लाख 1 हजार 412 सीएनजी गाड़ियां बिकीं. ये एक साल पहले इसी अवधि में (अप्रैल से सितंबर 2020) में बिकी 51,448 गाड़ियों से करीब दोगुनी बिक्री है. देश में सीएनजी गाड़ियां बिक रही हैं तो उनके पंप भी बढ़ रहे हैं.
इसी साल 10 फरवरी को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने संसद में बताया था कि देश में 31 दिसंबर 2021 तक सीएनजी पंपों की संख्या 3 हजार 628 थी. मार्च 2021 में ये संख्या 3 हजार 94 थी. इससे पहले मार्च 2020 में 2,187 और मार्च 2019 में 1,742 सीएनजी स्टेशन थे. यानी तीन साल में इनकी संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई. देश में हर दिन अगर 550 से भी ज्यादा सीएनजी गाड़ियां बिक रही हैं, तो औसतन 2 नए सीएनजी स्टेशन भी रोज खुल रहे हैं.
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कीमत हो या माइलेज, पेट्रोल-डीजल से सस्ती सीएनजी
सीएनजी की कीमत पेट्रोल-डीजल की तुलना में काफी कम है. राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 97.81 रुपये और डीजल की कीमत 89.07 रुपये है. वहीं, सीएनजी की कीमत 59.01 रुपये प्रति किलो है. यानी पेट्रोल की कीमत की तुलना में एक किलो सीएनजी की कीमत लगभग आधी है.
कीमत के साथ-साथ माइलेज के मामले में भी पेट्रोल की तुलना में सीएनजी बाजी मार ले जाती है. मारुति सुजुकी वैगन आर पेट्रोल वैरिएंट में 23.56 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है. जबकि, वैगन आर के सीएनजी वैरिएंट में 34.05 किमी प्रति किलो का माइलेज है. यानी सीएनजी गाड़ियां हर लिहाज से फायदे का सौदा हैं. एक और बात जो सीएनजी गाड़ियों को लोगों की पसंद बनाती है वो ये कि सीएनजी कार को किसी भी समय पेट्रोल से स्विच किया जा सकता है. यानी अगर कहीं सीएनजी उपलब्ध न हो तो वही गाड़ी पेट्रोल से भी चलाई जा सकती है.
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देश में कितना बड़ा है गाड़ियों का बाजार?
- मार्केटः भारत में हर साल 2.27 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बनती हैं. भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री 100 अरब डॉलर से ज्यादा बड़ी है. 2026 तक भारत के ऑटोमोटिव मार्केट के दुनिया में तीसरे सबसे बड़े मार्केट बनने की उम्मीद है.
- बिक्रीः भारत में हर महीने 13 लाख से ज्यादा गाड़ियां बिकती हैं. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, फरवरी 2022 में भारत में 13.74 लाख से ज्यादा गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. इनमें से 2.38 लाख पैसेंजर कार थीं. सड़क परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, देश में इस वक्त 28 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं. एक मोटे अनुमान के मुताबिक देश में इस समय सीएनजी गाड़ियों की संख्या करीब 40 लाख है.
- इलेक्ट्रिक व्हीकल का बाजारः 2027 तक भारत में हर साल इलेक्ट्रिक व्हीकल की बिक्री का आंकड़ा 60 लाख के पार पहुंचने की उम्मीद है. अभी देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 10.60 लाख से ज्यादा है. हालांकि, इनमें से 6.75 लाख से ज्यादा थ्री-व्हीलर हैं. महज 27,930 कारें हैं.
- इन्फ्रास्ट्रक्चरः ऑटो सेक्टर का इन्फ्रास्ट्रक्चर देश में लगातार बढ़ रहा है. देश में 1 जनवरी 2022 की स्थिति के मुताबिक 81 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं. 3,628 सीएनजी स्टेशन हैं और 19 मार्च 2022 तक देश में 1,742 चार्जिंग स्टेशन बन चुके थे.