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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने आज अपने दूसरे चरण का आखिरी बज़ट पेश किया. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आज संसद में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आम बजट (Budget 2024) पेश करते हुए कुछ बड़े ऐलान किए, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बेहतर इको सिस्टम डेवलप करने की बात कही गई. तो आइये जानते हैं कि, इस बार के बज़ट में ऑटो-सेक्टर (Auto Sector) को क्या मिला है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि, हमारी सरकार देश में बेहतर इलेक्ट्रिक व्हीकल इको सिस्टम डेवलप करने पर काम कर रही है. आने वाले समय में हमारी सरकार ई-वाहन का विस्तार और सुदृढ़ीकरण करेगी. इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और चार्जिंग को सपोर्ट करने वाले इको सिस्टम को तैयार किया जाएगा. सार्वजनिक परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक-बसों को अधिक से अधिक अपनाना और इलेक्ट्रिक व्हीकल नेटवर्क को विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
EV इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर:
सरकार ने इस बज़ट में इलेक्ट्रिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का दावा किया है. हालांकि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में कोई व्यक्तिगत बड़ा ऐलान नहीं किया गया है. लेकिन सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग सेंटर्स को सेटअप करने और साथ ही युवाओं को इस स्किल के लिए ट्रेनिंग देने की बात कही है. मोदी सरकार का ये अंतरिम बजट मुख्य रूप से ग्रामीण, कृषी-क्षेत्र की योजनाओं और महिलाओं पर केंद्रीत रहा है.
क्या थी उम्मीदें:
इस बार के अंतरिम बजट में वाहन निर्माताओं को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेगमेंट पर अधिक प्रोत्साहन की उम्मीद थी. जिस उद्योग ने पिछले एक साल में लगातार वृद्धि देखी है, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में जबरदस्त ग्रोथ देखी गई है. ऐसे में ऑटो इंडस्ट्री की निगाहें FAME योजना पर टिकी थीं, ये योतना इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए महत्वपूर्ण सब्सिडी प्रदान करती है. इस वर्ष FAME II सब्सिडी समाप्त होने जा रही है, ऐसे में इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि इसे आगे बढ़ाया जाएगा और FAME III के लिए प्रस्तावित 40,000 - 50,000 करोड़ रुपये एक सकारात्मक कदम उठाया जाएगा.
लिथियम बैटरी पर टैक्स:
इलेक्ट्रिक वाहनों में सबसे ज्यादा लिथियम ऑयन (Li-on) बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है. सामान्यत: एक इलेक्ट्र्रिक चारपहिया वाहन में बैटरी की कीमत तकरीबन 40 से 42 तक हो सकती है. हालांकि ये अलग-अलग वाहन और मॉडल पर भिन्न होता है. ऐसे में इंडस्ट्री को लिथियम-आयन बैटरी पर मौजूदा 18% कर के पुनर्मूल्यांकन की उम्मीद थी. जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत को कम किया जा सके. इंडस्ट्री ने पहले के मुकाबले ईवी बिक्री में 50% की उल्लेखनीय वृद्धि देखी है, जो पिछले साल कुल वाहनों (पेट्रोल, डीजल, इलेक्ट्रिक) बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों का योगदान 4% से बढ़कर 6.4% हो गया है.