सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की रोकथाम के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है. देश भर में सड़कों का जाल जिस कदर बढ़ा है, ठीक वैसे ही रोड एक्सीडेंट के मामले में भी लगातार बढ़ते नज़र आ रहे हैं. लेकिन अब सड़क हादसों में पीड़ितों के इजाल के लिए कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था शुरू करने की कवायद हो रही है. ताकि लोगों की जान बचाई जा सके.
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) अगले तीन से चार महीनों में देश भर में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए कैशलेस (Cashless Treatment) चिकित्सा उपचार शुरू करने की योजना बना रहा है. ये योजना नई संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट 2019 का हिस्सा होगी. हालांकि, कुछ राज्य पहले से ही कैशलेस उपचार की योजना लागू किए हैं, लेकिन अपडेट के बाद यह देश भर में पूरी तरह से लागू हो जाएगा.
यह घोषणा दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय 'ग्लोबल रोड सेफ्टी इनिशिएटिव' में की गई, जिसका आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (IRTE) ने MoRTH के साथ साझेदारी में किया था. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव अनुराग जैन ने कहा कि, "कैशलेस ट्रीटमेंट को मोटर व्हीकल एक्ट द्वारा परिभाषित गोल्डन ऑवर रोड एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए भी बढ़ाया जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा, "भारत में सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है, वर्ष 2030 तक दुर्घटनाओं को 50 प्रतिशत तक कम करने के लिए, मंत्रालय ने सड़क सुरक्षा के एक बहु-आयामी (5E) रणनीति तैयार की है." दरअसल, इस '5E' से उनका मतलब, एजुकेशन, इंजीनियरिंग (वाहनों के लिए), इफोर्समेंट और इमरजेंसी केयर से है. इसमें इंजीनियरिंग के तहत सड़क सुरक्षा को बेहतर किया जाएगा.
अगले एक या दो महीनों में देश भर में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों की रिपोर्टिंग, मैनेजमेंट और एनॉलसिस के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (e-DAR) प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा. दिल्ली में चल रहे 'ग्लोबल रोड सेफ्टी इनिशिएटिव' में 27 देशों के लगभग 130 सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एकत्र हुए हैं. ये विशेषज्ञ सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए सुरक्षा कोड की पहचान करने की दिशा में काम कर रहे हैं.