
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी विदेशी निर्मित ऑटोमोबाइल (कार, बाइक्स) पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल (पारस्परिक) टैरिफ की घोषणा की है. बताया जा रहा है ट्रम्प के 25% ऑटो टैरिफ से सालाना 460 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के वाहनों और ऑटो पार्ट्स के आयात को कवर किया जाएगा. लेकिन ट्रंप के टैरिफ टेरर के 'दोहरी मार' की चिंता को दूर करते हुए ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) ने स्पष्ट किया है कि, ये नया टैरिफ भारत से निर्यात किए जाने वाले ऑटो और ऑटो पार्ट्स को उतना प्रभावित नहीं करता है. हालांकि अभी डिटेल्ड लिस्ट का इंतजार है.
ACMA द्वारा जारी बयान में कहा गया कि, "ट्रंप का ये कदम घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और व्यापारिक असंतुलन को दूर करने का प्रयास है.
यह ध्यान देने वाली बात है कि ऑटो और ऑटो पार्ट्स तथा स्टील और एल्युमीनियम के सामान, जो पहले से ही धारा 232 के तहत 25 प्रतिशत टैरिफ के अधीन हैं, जिसकी घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप ने 26 मार्च, 2025 को अपने आदेश में की थी, वे इस आदेश में शामिल नहीं हैं. हालाँकि, अमेरिका में 25% आयात शुल्क के अन्तर्गत आने वाले ऑटो कंपोनेंट्स की विस्तृत सूची का इंतजार किया जा रहा है."
ACMA की अध्यक्ष और सुब्रोस लिमिटेड की CMD श्रद्धा सूरी मारवाह ने कहा कि, "हमें उम्मीद है कि भारत और अमेरिका की सरकारों के बीच चल रही द्विपक्षीय वार्ता से दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाने वाला समाधान निकलेगा. एसोसिएशन का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत ट्रेड रिलेशन, खास तौर पर ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में इसके प्रभाव को कम करने में मदद करेगा."
ट्रेड डेफिसिट को कम करने का प्रयास...
जानकारों का मनना है कि, डोनाल्ड ट्रम्प का टैरिफ को लेकर उठाया गया ये कदम व्यापार को संतुलित करने और बाकी दुनिया के साथ अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने के प्रयास का हिस्सा है. अमेरिका का बाकी दुनिया के साथ व्यापार घाटा 1.06 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 1.2 ट्रिलियन डॉलर हो गया, जिससे देश के बाहर डॉलर का ज्यादा पहुंच गया है. इस साल जनवरी में ही अमेरिका का व्यापार घाटा (Trade Deficit) 156.8 बिलियन डॉलर था.
हालांकि भारत दूसरे देशों की तुलना में अमेरिका के व्यापार घाटे में बहुत ही छोटा कॉन्ट्रीब्यूटर है. 2023 में, भारत के साथ अमेरिका का माल व्यापार घाटा 43.7 बिलियन डॉलर था, जिसमें भारत से आयात 87.4 बिलियन डॉलर और भारत को निर्यात 43.7 बिलियन डॉलर था. वहीं 2024 में यह घाटा बढ़कर 45.7 बिलियन डॉलर हो गया, जिसमें 91.4 बिलियन डॉलर का आयात और 45.7 बिलियन डॉलर का निर्यात शामिल है. यह देखते हुए कि भारत के साथ अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट लगभग 50% है, ट्रम्प ने बुधवार को उस आंकड़े के लगभग आधे या 26% टैरिफ लगाए हैं.
क्या होता है ट्रेड डेफिसिट?
ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) का शाब्दिक अर्थ होता है व्यापार घाटा. इस मतलब है कि किसी देश का आयात (import) उसके निर्यात (export) से ज़्यादा होता है, यानी वह दूसरे देशों से जितना सामान और सेवाएं खरीदता है, उससे ज़्यादा बेचता है. इसे नेगेटिव बैलेंस ऑफ ट्रेड भी कहा जाता है. उदाहरण के लिए अगर कोई देश 100 डॉलर का सामान बेचता है और 150 डॉलर का सामान खरीदता है, तो उसे 50 डॉलर का व्यापार घाटा होगा. इसके विपरीत, जब किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक होता है, तो उसे व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) कहते हैं.
कंपोनेंट मेकर्स पर असर...
कई भारतीय ऑटो पार्ट्स कंपनियां अमेरिका में निर्यात करती हैं. ऐसे में यह नया टैरिफ उनको प्रभावित कर सकता है. आंकड़ों पर गौर करें तो फाइनेंशियल ईयर 2024 में भारत से अमेरिका को 6.79 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए गए थें. जबकि अमेरिका से भारत को 1.4 अरब डॉलर के कंपोनेंट्स 15% ड्यूटी पर आयात किए गए थे. समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल देश की प्रमुख ऑटो पार्टस निर्माता कंपनी है जो बड़े पैमाने पर अमेरिका में एक्सपोर्ट करती है. इसके अलावा ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं में सोना कॉमस्टार और भारत फोर्ज भी शामिल हैं.