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बैटरी या बम? धड़ल्ले से जान ले रहे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोन धमाके, कौन जिम्मेदार?

चाहे स्मार्टफोन हो या इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी फटने की ये चुनिंदा घटनाएं महज चंद उदाहरण हैं. मोबाइल फोन की बैटरी में ब्लास्ट के सैंकड़ों मामले सामने आ चुके हैं. इसी तरह इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बात करें तो इलेक्ट्रिक स्कूटर से लेकर इलेक्ट्रिक एसयूवी तक अचानक आग के गोलों में तब्दील हो चुके हैं. कई मामलों में जान-माल की क्षति नहीं होती, लेकिन हर किसी की किस्मत इतनी अच्छी भी नहीं रहती है.

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लगातार हो रहे हैं हादसे
लगातार हो रहे हैं हादसे

उत्तर प्रदेश के बरेली में चार्जिंग के दौरान लावा के एक स्मार्टफोन में ब्लास्ट हो गया, जिसके चलते आठ महीने की एक बच्ची की मौत हो गई. इससे पहले एक यूट्यूबर ने रेडमी 6ए (Redmi 6A) के फटने से अपनी आंटी की मौत होने का आरोप लगाया था. एक ही दिन पहले की बात है, तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक इलेक्ट्रिक व्हीकल शोरूम (EV Fire) में आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई. कुछ समय पहले चार्जिंग के दौरान इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी ब्लास्ट (EV Battery Blast) होने से बाप-बेटी की मौके पर ही मौत हो गई थी.

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सिकंदराबाद: नीचे चार्जिंग स्टेशन, ऊपर होटल... इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग के दौरान लगी आग, और चारों ओर मच गया कोहराम

चाहे स्मार्टफोन हो या इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी फटने की ये चुनिंदा घटनाएं महज चंद उदाहरण हैं. मोबाइल फोन की बैटरी में ब्लास्ट के सैंकड़ों मामले सामने आ चुके हैं. इसी तरह इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बात करें तो इलेक्ट्रिक स्कूटर से लेकर इलेक्ट्रिक एसयूवी तक अचानक आग के गोलों में तब्दील हो चुके हैं. कई मामलों में जान-माल की क्षति नहीं होती, लेकिन हर किसी की किस्मत इतनी अच्छी भी नहीं रहती है. उदाहरण के लिए बरेली की आठ महीने की बच्ची हो या यूट्यूबर की आंटी अथवा ईवी शोरूम वाली बिल्डिंग में बने होटल में ठहरे लोग...गलती किसी और की लेकिन अपनी जान से हाथ किन्हीं और को धोना पड़ गया. साफ लहजे में बात कही जाए तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक व्हीकल में अचानक लग रही आग इन दिनों बड़े स्तर पर असमय मौत का कारण बन रही है.

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इसी हादसे में गई 8 की जान

आग में जलकर खाक हो चुके कई ईवी शोरूम

सिकंदराबाद वाले हादसे की बात करें तो यह किसी इलेक्ट्रिक व्हीकल शोरूम में आग लगने का कोई पहला मामला नहीं है. हां ये बात जरूर है कि इसके पहले की आग लगने की घटनाओं में इस तरह बड़े स्तर पर लोग एक साथ मौत का शिकार नहीं हुए थे. इससे पहले जून महीने के दौरान कर्नाटक (Karnataka) के मंगलुरू (Mangaluru) शहर में इसी तरह का मामला साने आया था. उस मामले में ओकिनावा ऑटोटेक (Okinawa Autotech) के शोरूम में अचानक आग लग गई थी और वहां खड़ी गाड़ियां इसका शिकार हो गई. ओकिनावा के किसी शोरूम में आग लगने के कई हादसे हो चुके हैं. इससे पहले ओकिनावा ऑटोटेक का चेन्नई (Chennai) स्थित एक शोरूम इसी तरह की घटना का शिकार हुआ था.

टाटा नेक्सन ईवी में भी लग चुकी है आग

जून महीने में ही पहली बार ऐसा मामला सामने आया था, जो किसी इलेक्ट्रिक एसयूवी में आग लगने का हो. इस घटना में शिकार बनी टाटा मोटर्स (Tata Motors) की इलेक्ट्रिक एसयूवी (Electric SUV) टाटा नेक्सन ईवी (Tata Nexon EV), जो फिलहाल भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कार भी है है. मुंबई के वसाई वेस्ट (Vasai West) की इस घटना में नेक्सन ईवी में अचानक आग लग गई थी और देखते-देखते गाड़ी जलकर खाक हो गई थी.

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यह पहला मामला था जब टाटा मोटर्स की किसी इलेक्ट्रिक व्हीकल (Tata Motors EV) में आग लगी हो. इससे पहले इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही थीं. सरकार ने तब मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा था कि इसकी DRDO से जांच कराई जा सकती है.

सरकार ने डीआरडीओ से कराई थी जांच

इससे पहले एक के बाद एक इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई थीं. उसके बाद सरकार ने जांच का जिम्मा DRDO की यूनिट Centre for Fire, Explosive and Environment Safety (CFEES) को सौंपा था. डीआरडीओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बैटरी की खराब गुणवत्ता इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की घटनाओं का मूल कारण है. इसके अलावा अलग-अलग टेम्परेचर पर बैटरी पैक की पर्याप्त जांच नहीं होना भी एक अन्य कारण है. रिपोर्ट में कहा गया था कि बैटरी की गुणवत्ता खराब रही होगी. इस आशंका की वजह ये है कि ई-स्कूटर (E-Scooter) बनाने वाली कंपनियां लागत कम करने के लिए जानबूझकर कम गुणवत्ता वाला सामान इस्तेमाल करती हैं. इस तथ्य को ध्यान में रखकर डीआरडीओ ने इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के लिए नियमों को सख्त करने का सुझाव दिया है.

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कई कंपनियों को जारी हुआ था समन

पिछले साल से अब तक इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की एक दर्जन से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ओला (Ola Electric), ओकिनावा (Okinawa Autotech), प्योर ईवी (Pure EV), बूम मोटर (Boom Motors) और जितेंद्र इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Jitendra Electric Vehicles) की गाड़ियों में आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं. कुछ समय पहले जितेंद्र ईवी (Jitendra EV) के इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooter) ले जा रहे ट्रक में ही आग लग गई थी, जिसमें 40 स्कूटर खाक हो गए थे. सरकार ने जून महीने में इन कंपनियों को समन जारी कर रिपोर्ट पर सफाई रखने के लिए कहा था.

इस कारण सख्त है सरकार का रवैया

इलेक्ट्रिक वाहनों में लगातार आग लगने से लोगों के मन में डर पैदा हो रहा है. यह डर सरकार को भी भारी पड़ सकता है. सरकार ने ग्रीन एनर्जी पर फोकस करने और डीजल-पेट्रोल इंजन वाली पारंपरिक कारों को सड़कों से दूर करने की जो महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है, ईवी में आग लगने के मामले उस पर भारी पड़ सकते हैं. यही कारण है सरकार इन मामलों पर लगातार सख्त बनी हुई है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इन मामलों पर कई बार दोहरा चुके हैं कि दुर्घटना की जवाबदेही कंपनियों को लेनी चाहिए. आग की घटनाओं पर सरकार के सख्त रवैये के बाद वाहन कंपनियों ने हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलरों को वापस मंगाया है. ओला, ओकिनावा और प्योर ईवी ने करीब 7,000 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को वापस मंगवाया था. इसी तरह ओला इलेक्ट्रिक ने 1400, प्योर ईवी ने 2000 और ओकिनावा ने 3215 यूनिट को वापस मंगाया था. बैटरी की गड़बड़ी को देखते हुए सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में सेफ्टी प्लग अनिवार्य कर दिया है.

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