आग लगने की कई घटनाओं के बाद सरकार के निशाने पर आईं इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों (EV Companies) के लिए एक राहत भरी खबर है. सुरक्षित बैटरी के नए व कड़े नियम (Safer Battery Norms) के अनुपालन से ईवी कंपनियों को कुछ समय के लिए राहत मिल गई है. सरकार ने ईवी कंपनियों के अनुरोध पर उन्हें इन नियमों का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय देने का फैसला लिया है. अब नए मानकों को दो चरणों में लागू किया जाएगा. इससे पहले नए नियम 01 अक्टूबर 2022 से ही लागू होने वाले थे.
सड़क परिवहन मंत्रालय का बयान
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कंपनियों को ईवी बैटरी टेस्टिंग मानकों का पालन करने के लिए कुछ समय देने का फैसला लिया गया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 01 सितंबर को निर्णय लिया था कि 01 अक्टूबर से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के सेल्स समेत बैटरी के कल-पुर्जों के लिए अनिवार्य कड़े मानक लागू किए जाएंगे. बदलावों में बैटरी सेल्स को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा मानक, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, ऑन-बोर्ड चार्जर, बैटरी पैक का डिजाइन, थर्मल प्रोपेगेशन आदि शामिल हैं. ये नियम इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स, क्वैड्रिसाइकल्स और कारों पर लागू होंगे.
सूत्रों ने बताई थी ये बात
इससे पहले आज तक के सहयोगी चैनल बिजनेस टुडे टीवी ने 20 सितंबर को सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया था कि नए मानकों को लागू करने की डेडलाइन आगे बढ़ाई जा सकती है. सूत्रों ने तब कहा था कि 01 अक्टूबर से लागू हो रहे नए नियमों को लेकर आज सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कंपनियों के बीच बैठक हो रही है. इंडस्ट्री ने नए नियमों को लागू करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है. हम उनके अनुरोध पर सकारात्मक तरीके से विचार कर रहे हैं और उन्हें कुछ नियमनों के अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय दे सकते हैं.
इंडस्ट्री ने मांगा था और समय
काइनेटिक ग्रीन की फाउंडर व सीईओ एवं फिक्की की ईवी कमिटी की चेयरपर्सन सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी ने बिजनेस टुडे टीवी को बताया था कि ईवी इंडस्ट्री बैटरियों के लिए उच्च सुरक्षा मानकों का स्वागत करती है. वास्तव में यह इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी में ग्राहकों के भरोसे को बढ़ाएगा और भारत के ऑटोमाबाइल सेक्टर के इलेक्ट्रिफिकेशन की प्रक्रिया को तेज करेगा. हालांकि नए संशोधन में जो बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, वे काफी व्यापक हैं. इन बदलावों को अमल में लाने के लिए नए सिरे से डिजाइन, इंजीनियरिंग, वैलिडेशन और होमोलोगेशन करने की जरूरत होगी. इनके अलवा बैटरी मैन्यूफैक्चरर्स को नए टूल खरीदने होंगे या डिजाइन करने होंगे. मोटवानी ने कहा कि इसके लिए कंपनियों को कम से कम छह महीने की जरूरत होगी.