
जापान की कार कंपनी Toyota Motors ने अपनी इंडियन सब्सिडियरी के साथ मिलकर हाल में हाइड्रोजन से चलने वाली एक कार Toyota Mirai पेश की है. बीते कई दिनों से इसे लेकर लोगों के बीच गज़ब का कौतूहल बना हुआ है. खुद सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस कार को ‘भविष्य की कार’ बता चुके हैं और हाल में जब वह इससे संसद भवन पहुंचे तो उनकी इस पहल ने काफी सुर्खियां बटोरी. लेकिन ऐसा क्या है जो इस कार को Future Car बनाता है.
Mirai का मतलब Future
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स ने Toyota Mirai को अभी इंडियन मार्केट में पायलट प्रोजेक्ट की तरह लॉन्च किया है. हाइड्रोजन फ्यूल सेल पर चलने वाली ये देश की पहली कार है. अगर इस कार को भविष्य की कार कहा जा रहा है, तो इसकी एक बड़ी वजह इसका नाम ही है. दरअसल टोयोटा जापान की प्रमुख कार कंपनी है और जापानी भाषा में ‘मिराई’ शब्द का अर्थ ‘भविष्य’ होता है. लेकिन सिर्फ यही वजह नहीं है जो इसे Future Car बनाता हो.
Tata-Birla नहीं, ये है हिंदुस्तान की सबसे पुरानी कंपनी, जहाज बनाने से शुरुआत
ऐसे काम करती है Hydrogen Car
असल में ये एक इलेक्ट्रिक कार (Electric Car) ही है, लेकिन इसे चलाने के लिए जो जरूरी इलेक्ट्रिसिटी चाहिए होती है, वह इसमें लगे हाइड्रोजन फ्यूल सेल (Hydrogen Based Fuel Cell Electric Vehicle) से जेनरेट होती है. ये फ्यूल सेल वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन और इसके ईंधन टैंक में भरे हाइड्रोजन के बीच केमिकल रिएक्शन कराकर बिजली पैदा करते हैं. केमिकल रिएक्शन से इन दोनों गैस के मिलने से पानी (H2O) और इलेक्ट्रिसिटी जेनरेट होती है. इसी इलेक्ट्रिसिटी से कार चलती है. जबकि इसमें लगी पॉवर कंट्रोल यूनिट एक्स्ट्रा बिजली को कार में लगी बैटरी में स्टोर के लिए भेज देती है.
ये बनाए इसे फ्यूचर कार
इस कार को फ्यूचर कार इसका एमिशन सिस्टम बनाता है. कार को चलाने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन की जो केमिकल रिएक्शन होती है, उससे बनने वाली भाप या पानी ही इस कार के साइलेंसर से बाहर आता है. साथ में थोड़ी गर्मी भी. इस तरह ये कार वातावरण में बिल्कुल भी प्रदूषण स्तर को नहीं बढ़ाती है.
Audi को चुकानी पड़ी थी World War-2 की कीमत, Soviet Russia ने किया था ये काम
फुल टैंक कराने पर जाती 650 किमी
टोयोटा मिराई (Toyota Mirai) के बारे में कंपनी का दावा है कि ये हाइड्रोजन से एक टैंक फुल कराने के बाद 650 किमी तक जा सकती है. हालांकि इस कार के नाम एक टैंक ईंधन के साथ 1,359.9 किमी चलने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है. ये कार 172bhp की मैक्स पॉवर और 407Nm का पीक टॉर्क जेनरेट करती है.
5 मिनट में रीफिल हो जाए फ्यूल टैंक
इसे फ्यूचर कार इसे रीफ्यूल करवाने में लगने वाला कम वक्त भी बनाता है. इसमें फिर से ईंधन भरवाने में सिर्फ 5 मिनट का वक्त लगता है. जबकि आम बैटरी ऑपरेटेड इलेक्ट्रिक व्हीकल को कम से कम 30 से 40 मिनट में ही ठीक तरह से चार्ज या स्वैप किया जा सकता है. इसमें हाइड्रोजन को ठीक वैसे ही भरवाया जा सकता है, जैसे पेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल को भरवाया जाता है.
बस इतने की है ये कार
Toyota Mirai वर्ष 2014 से ही इंटरनेशनल मार्केट में मौजूद है. इसके 2022 मॉडल की कीमत 49,500 डॉलर से शुरू होती है. अगर इसे भारतीय रुपये में देखें तो करीब 37.5 लाख रुपये इस कार की कीमत बैठती है. अब अगर कंपनी इंडियन मार्केट में इसे सीधे कंप्लीट बिल्ट यूनिट के तौर पर लाती है, तो इसकी कीमत लगभग दोगुना हो जाएगी. वहीं अगर इसे हिंदुस्तान में बनाया जाता है तो ये दाम बेहद नीचे आ जाएंगे.
दुनिया को भारत ने दिया ‘ऑटो-रिक्शा’, अब इन देशों को करता है सप्लाई!
कितना है चलाने का खर्च
Toyota Mirai में कंपनी लगभग 5.5 किलोग्राम की कैपेसिटी वाला हाइड्रोजन टैंक देती है. आम तौर पर एक सेडान कार में 40 लीटर की कैपेसिटी का फ्यूल टैंक होता है. ऐसे में अगर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये भी मान ली जाए तो फुल टैंक कराने में करीब 4,000 रुपये का खर्च आता है. जबकि एक सेडान कार औसतन 20 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है, इस हिसाब से आपकी कार चलाने का खर्च प्रति किमी 5 रुपये बैठेगा और फुल टैंक में आप 800 किमी जाएंगे.
फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोजन को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों या बायोमास से प्राप्त किया जा सकता है. जबकि इसके अलावा ब्लू हाइड्रोजन का विकल्प भी है. The International Council on Clean Transportation की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक देश में हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन पर ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत 430 से 495 रुपये प्रति किलोग्राम और ब्लू हाइड्रोजन की कीमत 420 से 455 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है. इस हिसाब से Toyota Mirai का टैंक ग्रीन हाइड्रोजन से फुल कराने में करीब 2,800 रुपये और ब्लू हाइड्रोजन से करीब 2,500 रुपये का खर्च आएगा. एक बार के फुल टैंक में गाड़ी अगर 600 किमी भी जाती है तो प्रति किमी गाड़ी चलाने का खर्च 4 से 4.5 रुपये तक पड़ेगा. इस तरह ये गाड़ी चलाने में सस्ती होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बढ़िया रहने वाली है.
भारत में ये है नीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने नवंबर 2020 में तीसरी री-इनवेस्ट कॉन्फ्रेंस में हाइड्रोजन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय हाइड्रोजन एनर्जी मिशन को लॉन्च करने की बात कही थी. इसके बाद 2021-22 के आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने हाइड्रोजन एनर्जी मिशन को लॉन्च करने की बात कही थी. जबकि पिछले ही महीने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 13 सूत्रीय ग्रीन हाइड्रोजन नीति की घोषणा की है. इसका मकसद देश में सस्ते हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देना है.
इस साल की शुरुआत में नितिन गडकरी ने गोवा में घोषणा की थी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ग्रीन हाइड्रोजन की सप्लाई पूरी करने का काम करेगी.
ये भी पढ़ें: