सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से गाड़ियों में फ्लैक्स फ्यूल इंजन को अनिवार्य करने के बारे में कह रहे हैं. फ्लैक्स फ्यूल इंजन गाड़ियों में लगने वाले ऐसे इंजन होते हैं जो एक से ज्यादा ईंधन विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं. ऐसे इंजन पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल, सीएनजी, बायो-एलएनजी और इलेक्ट्रिक पॉवर को भी ईंधन की तरह उपयोग कर सकते हैं.
6 महीने में लागू होगा फैसला
पीटीआई की खबर के मुताबिक हाल में एक कार्यक्रम में नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि सरकार फ्लैक्स फ्यूल इंजन (Flex Fuel Engine) को अगले 6 महीने में अनिवार्य करने जा रही है. उन्होंने कहा कि ये नियम हर तरह के वाहनों के लिए बनाया जाएगा. वह सभी ऑटो कंपनियों से कहेंगे कि वो इसे अपने वाहनों में फिट करें. इस संबंध में एक विस्तृत अधिसूचना 6 महीने के अंदर जारी हो जाएगी.
पेट्रोल पर प्रति लीटर 20 रुपये की बचत
नितिन गडकरी अलग-अलग मंच से अक्सर इथेनॉल (Ethanol) के फायदों के बारे में बता चुके हैं. अगर फ्लैक्स फ्यूल इंजन अनिवार्य हो जाता है तो लोग अपनी गाड़ियां इथेनॉल से भी चला सकेंगे. इथेनॉल की कीमत 65-70 रुपये प्रति लीटर है, जबकि पेट्रोल इस समय 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक बना हुआ है. इथेनॉल की दहन क्षमता पेट्रोल के मुकाबले कम होती है. एक लीटर इथेनॉल 800 ग्राम पेट्रोल के बराबर काम करता है. इस तरह अगर गाड़ियों में फ्लैक्स फ्यूल इंजन आते हैं तो लोगों के प्रति लीटर पेट्रोल (Petrol) का खर्च 20 रुपये तक कम हो जाएगा. वहीं सीएनजी और एलएनजी से वाहन चलाना पहले ही सस्ता पड़ता है.
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