सड़क हादसे में टाटा संस (Tata Sons) के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की हुई मौत के बाद कार की सेफ्टी पर खूब चर्चा हो रही है. सीट बेल्ट बांधने से लेकर एयरबैग के कंट्रोल सिस्टम पर बात हो रही है. कार की सेफ्टी फीचर्स को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं. उनमें से एक सवाल ये है कि क्या वाकई कार की सीट बेल्ट और एयरबैग में कोई कनेक्शन होता है. हादसे के वक्त आखिर ये किस तरह से कार में बैठे लोगों की जान बचाते हैं? हादसे के वक्त कार में बैठे यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं बांधा है, तो क्या एयरबैग्स नहीं खुलते हैं? इस तरह के कई सवाल हैं.
सीट बेल्ट कार की तमाम सेफ्टी फीचर्स में से सबसे बेसिक फीचर है. ये कार की सीट के बगल में आपको मिलता है. आमतौर पर गाड़ियों में सभी सीटों पर सीट बेल्ट वाहन निर्मता कंपनियां देती हैं. ताकि यात्री सफर के दौरान खुद को इस लगाकर सीट पर सुरक्षित बैठ सकें. लेकिन कई हादसों में कार में सवार लोगों की जान इसलिए चली जाती है, क्योंकि वे बिना सीट बेल्ट लगाए ही सफर रहे होते हैं.
एयरबैग का डिजाइन
लोकल सर्किल के एक सर्वे के अनुसार, भारत में 10 में से 7 यात्री वाहन की पिछली सीट पर सवारी करते समय कभी भी सीट बेल्ट नहीं पहनते हैं. सरकार सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाती है, लेकिन फिर भी देश में लोग सीट बेल्ट लगाए बिना ही ड्राइविंग करते पाए जाते हैं. देश में ड्राइवर और यात्री के लिए सीट बेल्ट पहनना जरूरी है. कार में एयरबैग का डिजाइन बकल्ड पैसेंजेर की सेफ्टी के लिए किया गया है. मतलब एयरबैग सीट बेल्ट लगाने वालों की ही सुरक्षा करता है. एयरबैग को इसी तरह से डिजाइन ही किया गया है. वो बिना सीट बेल्ट पहने लोगों को सुरक्षा प्रदान नहीं करता.
एयरबैग कब साबित होगा असरदार?
सीट बेल्ट और एयरबैग एक साथ काम करते हैं. भारत में ज्यादातर कारें ड्यूल एयरबैग और सभी सीट पर सीटबेल्ट के साथ आती हैं. सीट बेल्ट और एयरबैग एक्सीडेंट के दौरान जान बचाने के लिए मिलकर काम करते हैं. सीट बेल्ट नहीं लगाने पर भी एयरबैग काम करते हैं. लेकिन कार में जहां भी एयरबैग्स होते हैं वहां SRS लिखा होता है. इसका मतलब होता है Supplementary Restraining System. आसन शब्दों में इसका अर्थ यह है कि कार में ये इकलौता जान बचाने वाला उपकरण नहीं है. इसलिए आपको सीट बेल्ट भी बांधना जरूरी है.
एयरबैग और सीट बेल्ट का कनेक्शन
एयरबैग को कई सेंसर से कंट्रोल होता है. जैसे इम्पैक्ट सेंसर, प्रेशर सेंसर, ब्रेक प्रेशर सेंसर. एक छोटे बच्चे का वजन एयरबैग के प्रेशर सेंसर को एक्टिवेट नहीं कर सकता है. ऐसे तो सीट बेल्ट और एयरबैग के बीच कोई इलेक्ट्रॉनिक कनेक्शन नहीं है. लेकिन एक्सीडेंट के दौरान एयरबैग आपकी छाती, चेहरे और सिर की सुरक्षा करता है. वहीं, सीट बेल्ट आपको जोरदार झटके बावजूद आपके शरीर को सीट पर स्थिर रखने में मदद करता है. ये हादसे की स्थिति में शरीर के गति को रोकता है और आप कार से बाहर नहीं गिरते हैं. सीट पर बैठे रहने के कारण सामने खुला एयरबैग आपके सिर को चोटिल होने से बचाता है.
सीट बेल्ट का काम
मान लीजिए कि आप बिना सीट बेल्ट के 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कार में सफर कर रहे हैं. अचनाक कार एक्सीडेंट हो जाता और वो रूक जाती है. चूंकि आपकी कार हादसे ठीक पहले 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी, तो जाहिर है आपका शरीर भी उसी गति से चलेगा. हादसे के वक्त आपका सिर एयरबैग से उसी रफ्तार से टकराएगा. लेकिन अगर आपने सीट बेल्ट पहना है, तो ये आपके शरीर को तेज गति से आगे की तरफ जाने से रोकेगा.
हर वक्त एक्टिव रहता है सीट बेल्ट
दुर्घटना में सीट बेल्ट के बिना ड्राइवर स्टीयरिंग, डैश बोर्ड या विंडस्क्रीन से तुरंत टकरा सकता है. कार के एक्सीडेंट के 15 मिलीसेकंड भीतर एयरबैग ओपन हो जाता है. ऐसे में हो सकता है कि एयरबैग के एक्टिवेट होने से पहले फ्रंट सीट पर बैठने वाला गंभीर चोट का शिकार हो जाए. दूसरी तरफ सीट बेल्ट एक ऐसा सेफ्टी फीचर है, जो हर वक्त एक्टिव रहता है और हादसे में लोगों की जान बचाने में मदद करता है.
एयरबैग कैसे काम करता है?
जब कार की कोई टक्कर होती है, उसकी स्पीड तेजी से कम हो जाती है. एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) स्पीड में अचानक आए इस बदलाव को डिटेक्ट करता है. इसके बाद एक्सेलेरोमीटर एयरबैग के सर्किट में लगे सेंसर को एक्टिवेट कर देता है. एयरबैग सर्किट सेंसर एक्टिवेट होते ही एक हीटिंग एलीमेंट के जरिए इलेक्ट्रिक करेंट देता है. इससे एयरबैग के अंदर केमिकल विस्फोट होता है. विस्फोट होते ही एयरबैग के अंदर अचानक गैस बनने लगती है, जिससे नाइलॉन का बना बैग तुरंत फूल जाता है. यह बैग ड्राइवर और कार सवारों को बॉडी या किसी सख्त चीज से टकराने से बचाता है.