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Explainer: ऐसी हो सकती है EV Battery Swapping Policy, आम आदमी को मिलेगा ये फायदा?

इंटरऑपरेबिलिटी, बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी का सबसे महत्वपूर्ण प्वॉइंट है. इसका सीधा-सीधा मतलब है कि सरकार बैटरियों का ऐसा मानक तय करना चाहती है, जिससे एक ही साइज या डिजाइन की बैटरी किसी भी कंपनी के इलेक्ट्रिक व्हीकल में फिट हो जाए.

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जल्द आएगी बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी (Representative Photo : Reuters)
जल्द आएगी बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी (Representative Photo : Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ग्राहकों को मिलेंगे 3-3 फायदे
  • किराये पर ले सकेंगे गाड़ी की बैटरी
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल हो जाएंगे सस्ते

देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा मिले, इसके लिए सरकार ने बजट में EV Battery Swapping Policy लाने और बैटरी स्वैपिंग को इंटरऑपरेबल बनाने की घोषणा की थी. अब ये ईवी बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी कैसी हो, इसमें किन-किन जरूरी बातों को शामिल किया जाए, इसे लेकर Niti Aayog ने हाल में एक अहम बैठक की. जल्द ही इस पॉलिसी को लागू भी कर दिया जाएगा. इस पॉलिसी से आम आदमी को क्या फायदा होगा और कौन-कौन सी बातों को इसमें शामिल किया जाएगा, इस बारे में एक्सपर्ट्स की राय क्या है, आइए समझते हैं पूरी बात को...

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पहले जानते हैं Battery Swapping क्या है?
अभी देश में जितने इलेक्ट्रिक व्हीकल हैं, उनमें से बहुत कम ही रिमूवेबल बैटरी के साथ आते हैं. 2-व्हीलर्स में ऐसे कुछ ऑप्शन मिलते भी हैं, लेकिन 4-व्हीलर्स में अभी ऐसा ऑप्शन नहीं है. बैटरी स्वैपिंग में वाहन चालक को जीरो चार्ज बैटरी को स्वैपिंग स्टेशन पर फुल चार्ज बैटरी से बदलने की सुविधा मिलती है. लेकिन इस व्यवस्था में कई पेंच हैं...

बैटरी स्वैपिंग की दिक्कतें
मौजूदा व्यवस्था में बैटरी स्वैपिंग को पूरी तरह से लागू करना थोड़ा मुश्किल काम है. इसकी वजह अलग-अलग इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियां अपने-अपने हिसाब से बैटरी बनाती हैं. ऐसे में उन्हें स्वैप करने के लिए उन्हीं के ऑपरेटेड स्वैपिंग स्टेशन पर जाना होता है, जैसे अभी Bounce Infinity इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी कुछ शहरों में बैटरी स्वैपिंग सर्विस देती है. यानी ग्राहक इस कंपनी के स्कूटर को बिना बैटरी के खरीद सकते हैं और बैटरी को किराये पर लेकर (Battery as a Service) इस्तेमाल कर सकते हैं.

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नीति आयोग की बैठक के मायने
सरकार चाहती है कि देश में ज्यादा से ज्यादा लोग ईवी इस्तेमाल करें. ऐसे में इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी स्वैपिंग नीति लाने का मुख्य मकसद इनकी कीमत को नीचे लाना है. नीति आयोग ने इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स से 5 जून तक सुझाव मंगाए थे और अब इसका ड्राफ्ट तैयार करने को लेकर पहली बैठक भी कर चुका है. सूत्रों का कहना है कि इस नीति को अगले 3 से 4 महीने में लागू किया जा सकता है. अब हम जानते हैं कि कैसी होगी बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी...

आखिर कैसी होगी बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में इस पॉलिसी को लेकर बैटरियों के स्टैंडर्डाइजेशन और इंटरऑपरेबिलिटी जैसी दो बातें साफ कही थीं. इंटरऑपरेबिलिटी इस पूरी पॉलिसी का सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है. इसका सीधा-सीधा मतलब है कि सरकार बैटरियों का ऐसा मानक तय करना चाहती है जिससे एक ही साइज या डिजाइन की बैटरी किसी भी कंपनी के इलेक्ट्रिक व्हीकल में फिट हो जाए.

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कैसे काम करेगी इंटरऑपरेबिलिटी?
इंटरऑपरेबिलिटी को लेकर The International Council on Clean Transportation के इंडिया मैनेंजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट का कहना है, इसका मतलब ही है कि ग्राहक कंपनी या ब्रांड को देखे बिना किसी भी इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी को किसी में भी इस्तेमाल कर सके. इसका मतलब ये है कि सरकार बैटरी के आकार और क्षमता को लेकर एक स्टैंडर्ड बना सकती है और इसके चलते ग्राहक आसानी से बैटरी स्वैपिंग स्टेशन पर अपनी बैटरी को एक्सचेंज कर सकते हैं. इसमें बैटरी के पैक, कनेक्टर, सॉफ्टवेयर के साथ सामंजस्य के मानक भी तय होंगे ताकि नई बैटरी को लगाते ही वह वाहन के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और मोटर कंट्रोलर के साथ मिलकर काम करने लगे. इससे आने वाले समय में बैटरियों का मानक तय होगा और जोखिम (हाल में घटी आग की घटनाएं) कम होगा.

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बैटरी स्वैपिंग सिस्टम कैसा होगा?
इस नीति को लाने के बाद बैटरी स्वैपिंग ऑपरेटर (BSO) जैसे नए तरह के कारोबार का जन्म होगा, क्योंकि प्रस्तावित नीति में सरकार बैटरी एज ए सर्विस (BaaS) का नया बिजनेस मॉडल ला सकती है. इससे लोगों को गाड़ी के साथ बैटरी खरीदने और नहीं खरीदने का ऑप्शन मिलेगा और जो ग्राहक बैटरी नहीं खरीदेंगे, वे इसे किराये पर लेकर इस्तेमाल कर सकेंगे. इस बारे में RMI (रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट) की मैनेजिंग डायरेक्टर अक्षिमा टी. घाटे का कहना है कि बैटरी स्वैपिंग इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर्स और 3-व्हीलर्स के लिए एक अच्छा समाधान हो सकता है. देश में कुल इलेक्ट्र्रिक व्हीकल में इनकी हिस्सेदारी भी सबसे अधिक है. इसके अलावा B2B सेगमेंट में भी ये काफी कारगर हो सकता है. हाल में RMI ने नीति आयोग के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक व्हीकल की फाइनेंसिंग को लेकर एक रिपोर्ट भी जारी की थी.

नीति आयोग के चेयरमैन अमिताभ कांत ने भी एक इंटरव्यू में कहा है कि कुछ स्टार्टअप के साथ इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर्स और 3-व्हीलर्स को लेकर बैटरी स्वैपिंग को लेकर टेस्टिंग की गई और ये प्रयोग सफल रहे हैं.

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ग्राहकों को होंगे 3-3 फायदे
अगर सरकार की बैटरी स्वैपिंग नीति इंटरऑपरेबिलिटी के साथ लागू होती है, तो आम आदमी को 3-3 फायदे होंगे. सबसे पहला फायदा उसके लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदना आसान हो जाएगा, क्योंकि इनकी कीमत कम होगी. दूसरा आम आदमी किराये पर बैटरी का इस्तेमाल कर सकेगा, यानी उसे जहां से सस्ता विकल्प मिलेगा, वह वहां से किराये पर बैटरी ले सकेगा. वहीं बैटरी बनाने वाली कंपनी ट्रॉनटेक के सीईओ समरथ कोचर का कहना है कि बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी आम आदमी के बीच पाई जाने वाली Range Anxiety को खत्म करेगा, क्योंकि बैटरी स्वैपिंग स्टेशन पर खाली बैटरी को फुल चार्ज बैटरी से चेंज करने में कुछ ही मिनट का समय लगेगा, तो ग्राहकों की बीच रास्ते में बैटरी खत्म होने की चिंता खत्म हो जाएगी.

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वहीं लोहम बैटरी के सीईओ रजत वर्मा कहते हैं कि सरकार को बैटरी की रिसाइकलिंग की नीति पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में अगर बैटरियां बनेंगी और इस्तेमाल होंगी तो उन्हें रिसाइकल भी ठीक ढंग से किया जाना चाहिए.

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