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जन्म से नहीं थे हाथ, फिर भी मिला ड्राइविंग लाइसेंस! पढ़िए केरल की इस महिला के असाधारण हौसले की कहानी

मूल रूप से केरल के इडुक्की की रहने वाली जिलुमोल मैरिएट एशिया की पहली ऐसी महिला भी बन गई हैं जिनके हाथ न होने के बावजूद उन्हें चारपहिया वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) मिला है.

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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मैरिएट को ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा. Pic: Instagram
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मैरिएट को ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा. Pic: Instagram

"कैसे आकाश में सुराख़ नहीं हो सकता 
एक पत्थर तो तबीअत से उछालो यारो"

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दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां केरल की मैरिएट के सालों की मेहनत पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं. यदि आप अपने जीवन में कुछ करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको पूरी इच्छा शक्ति से सतत प्रयास करते रहने की जरूरत है. इतना ही नहीं, यदि सपने को पूरा करने में सच्ची लगन हो तो पूरी कायनात भी आपकी उस इच्छा को पूरा करने में लग जाती है. कुछ ऐसा ही वाकया केरल में भी देखने को मिला. जब बिना हाथों के जन्म लेने वाली एक महिला के सपने को राज्य सरकार और एक स्थानीय स्टार्ट-अप ने नई उड़ान दी.

जन्म से ही बिना हाथों के पैदा होने वाली जिलुमोल मैरिएट का सपना आखिरकार उस वक्त पूरा हुआ जब केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने पलक्कड़ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें  ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा. मैरिएट का जब जन्म हुआ था उस वक्त से ही उनके हाथ नहीं थें लेकिन उनकी मंशा थी कि एक दिन वो गाड़ी चलाएं और उन्हें कानून द्वारा इसकी पूरी अनुमति भी मिले. 

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जानकारी के अनुसार, इडुक्की की मूल निवासी जिलुमोल मैरिएट एशिया की पहली ऐसी महिला भी बन गई हैं जिनके हाथ न होने के बावजूद उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) मिला है. अब वो चारपहिया वाहन चला सकती हैं. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार को पलक्कड़ में एक कार्यक्रम के दौरान मैरीएट को ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा. 

कोच्चि में ग्राफिक आर्ट डिजाइनर के रूप में काम करने वाली बत्तीस वर्षीय जिलुमोल मैरियट थॉमस (Jilumol Mariet Thomas) पिछले कुछ वर्षों से चार पहिया वाहन ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं. इसके लिए वो लंबे समय से वाहन चलाने की ट्रेनिंग भी ले रही थी. इसी दौरान केच्चि बेस्ड एक स्टार्ट-अप फर्म वी इनोवेशन (Vi Innovations) ने उपके सपनों को नई उड़ान दी. 

इस स्टार्ट-अप ने मैरिएट की कार के लिए ख़ास तौर पर ऑपरेटिंग इंडिकेटर्स, वाइपर और हेडलैंप के लिए वॉयस कमांड-बेस्ड सिस्टम डेवलप किया. इस तकनीकी और सिस्टम की मदद से मैरिएट को कार चलाने के लिए हाथों का इस्तेमाल नहीं करना होगा और वो बस एक आवाज से कुछ चुनिंदा फीचर्स को ऑपरेट कर सकेंगी. केरल के राज्य दिव्यांग आयोग ने भी मैरिएट की इच्छा को पूरा करने के लिए उनका सहयोग किया. 


कैसे चलाती हैं कार: 

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संभव है कि आपके जेहन में ये सवाल आए कि, आखिर हाथ न होने पर मैरिएट कार कैसे ड्राइव करती हैं. तो आपको बता दें कि, कार चलाने के लिए वो अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं. अपने पैरों से वो स्टीयरिंग व्हील संभालती हैं और पूरी कुशलता से कार को ड्राइव करती हैं. उन्होनें स्वंय को हर परिस्थिति से निपटने के लिए खुद को तैयार किया है और वो अपने पैरों से ही पेपर पर सिग्नेचर इत्यादि भी करती हैं. 

मैरीट ने इस ड्राइविंग लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य ड्राइविंग परीक्षण पास कर किया है, जिसके बाद दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत उन्हें लाइसेंस जारी किया गया है. मैरिएट ने मोटर वाहन विभाग के कर्मियों के समक्ष लिखित और 'H' टेस्ट सफलतापूर्वक पास किया था. दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 41 (2) के तहत, दिव्यांग व्यक्ति सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए वाहन के स्ट्रक्चर में बदलाव किए बिना उसमें आवश्यक संशोधन (Modificaition) कर सकता है.

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