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भारतीय सेना के बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन यानी कि BRO... ने हाल ही में एक नया इतिहास रचा है. ऐसा पहली बार था जब पवित्र अमरनाथ गुफा तक कोई वाहन पहुंचा था. BRO ने अमरनाथ गुफा तक पर्वतीय मार्ग का चौड़ीकरण किया है और यदि सबकुछ सही रहा तो बहुत जल्द ही तीर्थयात्रियों को एक बड़ी सौगात मिलेगी, जिससे लोग अमरनाथ गुफा तक वाहन से पहुंच सकेंगे. इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान वाहनों के पहले सेट में जो गाड़ी सबसे आगे थी, वो थी महिंद्रा की मशहूर एसयूवी, Mahindra Bolero...
गांव की सड़क से लेकर शहर के एक्सप्रेस-वे तक अपना जवला बिखेरने वाली महिंद्रा बोलेरो अब अमरनाथ गुफा तक पहुंचने वाली पहली गाड़ी बन गई है. निसंदेह, इसके पीछे बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन का अथक प्रयास अव्वल है, लेकिन बतौर SUV, हाई एल्टीट्यूड पर सफलतापूर्वक पहुंचने वाली महिंद्रा बोलेरो भी अपने टफ राइडिंग के लिए जानी जाती है. BRO... अपने बीकन (Beacon) प्रोजेक्ट के तहत कश्मीर की लिद्दर घाटी के बर्फ से ढके हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम कर रहा है.
क्या है BRO...
आपको बता दें कि, देश के सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण की जिम्मेदारी बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) के कंधों पर है. ये न केवल सड़क का निर्माण करता है बल्कि रोड मेंटनेंस का दायित्व भी BRO ही निभाता है. पैरेंट कैडर में बॉर्डर रोड्स इंजीनियरिंग सर्विस के कर्मचारी और जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स के कर्मचारी होते हैं. इस समय संगठन 21 राज्यों, 1 केंद्र शासित प्रदेश और अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में परिचालन कर रहा है. सीमा सड़क से संपर्क करने के लिए इसे पूरी तरह से रक्षा मंत्रालय के अधीन रखा गया है.
BRO... का कार्यकारी प्रमुख DGBR (डायरेक्टर जनरल बॉर्डर रोड्स) होता है जो कि एक लेफ्टिनेंट जनरल का पद रखता है. इस समय डी. जी. बीआर के पद पर लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन आसीन हैं, जिन्होनें 28वें महानिदेशक सीमा सड़क (डीजीबीआर) के रूप में पदभार संभाला. उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी की सेवानिवृत्ति के बाद पदभार ग्रहण किया था. इस नियुक्ति से पूर्व वो जनरल ऑफिसर कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग, पुणे में कमांडेंट के पद पर कार्यरत थें.
क्या है प्रोजेक्ट BEACON...
प्रोजेक्ट बीकन के तहत, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अमरनाथ गुफा मंदिर तक सड़क का विस्तार किया, और उन्होंने गंतव्य तक पहुंचने वाले पहले वाहनों की सफल यात्रा का एक वीडियो साझा किया है. जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ गुफा मंदिर कश्मीर की लिद्दर घाटी के भीतर बर्फ से ढके हिमालय में स्थित है. हर साल लाखों श्रद्धालु अमरनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ इलाकों से होकर चुनौतीपूर्ण यात्रा पर निकलते हैं. अमरनाथ यात्रा श्रावण (जुलाई-अगस्त) के महीने में की जाती है.
पहले सेट में Mahindra Bolero:
अमरनाथ गुफा तक पहुंचने वाले वाहनों के पहले सेट में BEACON प्रोजेक्ट के एक ट्रक (Tata 1210 SE) के अलावा महिंद्रा बोलेरो शामिल थी. ये महिंद्रा बोलेरो का कैंपर पिक-अप मॉडल है. इस ऐतिहासिक यात्रा का एक वीडियो बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया गया है. जिसमें दिखाया गया है कि, किस तरह से वाहनों का पहला जत्था सड़क मार्ग द्वारा अमरनाथ गुफा तक पहुंचने में कामयाब रहा है.
इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि, ये वाहन को बर्फ से ढके संगम की चोटी पर चढ़ रहे हैं. यह हिस्सा BRO टीम द्वारा हाल ही में चौड़ा किया गया है, जो कि अभी भी निर्माणाधीन स्थिति में है. बताया जा रहा है कि, ज्यादातर मुश्किल काम निपटा लिया गया है और सड़क को चौड़ा करने का काम पूरा कर लिया गया है.
अब तक कैसे होती है यात्रा:
अमरनाथ मंदिर की पवित्र गुफा, 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. तीर्थयात्री लिद्दर घाटी में पहलगाम या सोनमर्ग के माध्यम से मंदिर तक पहुंचते हैं. यह गुफा पहलगाम से 48 किमी उत्तर में है. हालांकि पहलगाम से चंदनवारी तक शुरुआती 16 किमी - मोटरेबल रोड है, लेकिन इसके बाद तीर्थयात्री बेहद कठिन इलाके से बाकी रास्ते में या तो पैदल यात्रा करते हैं या टट्टू की सवारी करते हैं. इस समय इस रास्ते से मंदिर तक पहुंचने में 3 से 5 दिन का समय लगता है. सोनमर्ग से बालटाल होते हुए रास्ता बहुत छोटा है. बालटाल और मंदिर के बीच की 14 किमी की दूरी आमतौर पर पैदल आठ घंटे में या टट्टू पर छह घंटे से भी कम समय में तय की जाती है.
हेलिकॉप्टर से यात्रा...
तीर्थयात्री हेलिकॉप्टर से भी मंदिर तक पहुंच सकते हैं, जो बालटाल से पंचतरणी तक उड़ान भरता है. ये मंदिर से 6 किलोमीटर दूर है. हालांकि, तीर्थयात्रियों को मंदिर तक ले जाने वाली हेलिकॉप्टर सर्विस को रोक दिया गया था. इसके पीछे कारण बताया गया था कि, हेलिकॉप्टर के चलते अमरनाथ शिवलिंग की बर्फ जल्दी पिघल जाती है.
बता दें कि, बालटाल और चंदनवारी से मंदिर तक पैदल यात्री ट्रैक का रखरखाव अब तक जम्मू-कश्मीर सरकार के सड़क और भवन (R&B) विभाग द्वारा किया जाता था. लेकिन सितंबर 2022 में ये जिम्मेदारी बीआरओ को सौंप दी गई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बीआरओ के अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि, बालटाल मार्ग पर मौजूदा ट्रैक को 15 फीट तक चौड़ा किया गया है. यह गुफा मंदिर तक जाने के लिए ट्रकों और पिकअप वाहनों के लिए पर्याप्त है. हालांकि अधिकारियों ने कहा कि पर्यटक वाहनों को अभी यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी, चौड़ीकरण का उद्देश्य ट्रैकिंग करने वाले तीर्थयात्रियों की भीड़ को कम करना है.