Mahindra Thar से जुड़ी एक अनोखी खबर है. केरल के गुरुवायुर मंदिर को हाल में महिंद्रा ग्रुप ने एक Thar दान में दी थी. बाद में इसकी नीलामी की गई और अब इसका अगला मालिक कौन होगा, ये फैसला करने की जिम्मेदारी केरल हाई कोर्ट के पास आ गई है, क्योंकि इस मामले में मंदिर प्रशासन के फैसले के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की गई है..
केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर
गुरुवायुर मंदिर को दान में मिली थार का ये मामला उसकी नीलामी से जुड़ा है. इसके नए मालिक को लेकर विवाद होने के बाद अब हिंदू सेवा केंद्रम ने मंदिर प्रशासन के फैसले को केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) में चुनौती दी है.
दरअसल हाल में महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) ने केरल के Guruvayur Sreekrishna Temple दान में एक थार दी थी. बाद में मंदिर ने इस कार को नीलामी के लिए रखा और इसका बेस प्राइस 15 लाख रुपये रखा गया. नीलामी में एर्णाकुलम के रहने वाले अमाल मोहम्मद अली ने इसके लिए सबसे अधिक बोली लगाई. वो अभी बहरीन में एक एनआरआई के तौर पर रहते हैं. लेकिन जब कार उन्हें सौंपने की बात आई तो दो धर्मों का पेंच फंस गया.
अमाल बोली लगाने वाले इकलौते इंसान
नीलामी के लिए रखी गई थार के लिए बोली लगाने वाले अमाल इकलौते व्यक्ति थे. उन्होंने गुरुवायुर में रहने वाले अपने दोस्त सुभाष पणिक्कर की सहायता से इसके लिए 15.10 लाख रुपये की बोली लगाई. जब बात कार अमाल को देने की आई तो उनके दूसरे धर्म से होने के कारण मंदिर प्रशासन के कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई. इसके बाद अली ने कार की कस्टडी लेने के लिए कोर्ट जाने की बात कही. मामले के तूल पकड़ते ही इसे लेकर सोशल मीडिया पर अभियान शुरू हो गया.
इस पर मंदिर प्रशासन ने 21 दिसंबर को बैठक की और अमाल की लगाई बोली को स्वीकार कर लिया. इसके बाद सारे विवाद का लगभग अंत हो गया लेकिन अब इस नयी याचिका के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है.
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