एक वक्त था, जब इंडिया के कार मार्केट में छोटी हैचबैक कारों की तूती बोला करती थी. Maruti 800 के साथ शुरु हुआ ये सफर Zen, Alto, Swift, WagonR, Celerio, Ignis से होता हुआ Hyundai Santro, Tata Indica, Matiz, Tata Nano जैसी छोटी कारों तक गया. अब अगर पिछले 3 या 4 साल के रिकॉर्ड्स को देखें...
तो इस तरह की छोटी कारों का बाजार भले घट ना रहा हो, लेकिन बड़ी गाड़ियों जैसे कि एसयूवी, एमयूवी, क्रॉसओवर और प्रीमियम हैचबैक का दायरा लगातार बढ़ रहा है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि आने वाले समय में इंडिया के ऑटो मार्केट से शायद छोटी कारें विदा भी ले लें. अभी ही देखें तो शायद ही इस सेगमेंट की कोई कार हो जिसकी कीमत एक ग्राहक को 5 लाख रुपये से कम पड़ती हो. अब इस बारे में Maruti Suzuki India के चेयरमैन आर. सी. भार्गव ने भी अहम बातें कहीं हैं.
कंपनी के दूसरी तिमाही के परिणामों की घोषणा के साथ मीडिया से एक बातचीत में भार्गव ने कहा कि साल 2018 के पीक के मुकाबले आने वाले साल में देश का ऑटो उद्योग कुछ प्रतिशत की वृद्धि भले दर्ज करेगा. पर हैचबैक सेगमेंट की कारों में कम वृद्धि (De-Growth) अगले साल भी जारी रहेगी.
इस साल 2018 से ज्यादा कार बिकेंगी
आर. सी. भार्गव ने कहा कि साल 2018 में 22.4 लाख पैसेंजर कारों की बिक्री हुई थी. इस साल उम्मीद है कि ये आंकड़ा इसके पार चला जाएगा. लगभग 4 साल के बाद ऑटो उद्योग फिर से बढ़ोतरी की राह पर है.
लोगों की कार लेने की ताकत घट रही
रही बात छोटी कारों की, तो दूसरी तिमाही में इनकी सेल्स में थोड़ी वृद्धि दिखी है, लेकिन ये सिर्फ फेस्टिव सीजन की वजह से है. आर. सी. भार्गव ने कहा कि ये दिखाता है कि अब लोगों की हैचबैक कार खरीदने का क्षमता घट रही है. छोटी कारों की बिक्री महंगाई बढ़ने से पहले ही घटने लगी थी. पिछले 3 साल में इनकी बिकने वाली यूनिट्स में 26% की कमी आई है. महंगाई इस स्थिति को और बदहाल कर रही है.
मारुति बना रही कई नई एसयूवी
भार्गव ने कहा कि इंडिया अब छोटी कारों के बाजार से थोड़ा दूरी बना रहा है. कंपनी ने हाल में Brezza, Grand Vitara जैसी गाड़ियां उतारी हैं. कंपनी और कई नई एसयूवी पर काम करता है. हमारा काम अपने ग्राहकों के हिसाब से चलना है. पहले इंडिया में छोटी कारों का बाजार कुल कारों का करीब 75% था, जो आने वाले समय में घटकर 60-65 प्रतिशत पर आ सकता है.