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कबाड़ी वाला भी खोल सकता है Vehicle Scrap Center, मंत्री Nitin Gadkari ने बताया पूरा प्लान

सरकार ने पिछले साल अगस्त में वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी लॉन्च की थी. अब सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसे लेकर अपना बड़ा प्लान शेयर किया है.

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नितिन गडकरी (Photo : PTI)
नितिन गडकरी (Photo : PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बनाए जाएं छोटे-छोटे कलेक्शन सेंटर
  • 150 किमी की रेंज में हो स्क्रैपिंग सेंटर

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) का कहना है कि सरकार ने वाहन स्क्रैप पॉलिसी को इस तरह से डिजाइन किया है कि शहरों में कोई कबाड़ी वाला भी निवेश करके अपना स्क्रैप सेंटर खोल सकता है. उन्होंने कहा कि भारत में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा वाहन स्क्रैपिंग हब बनने की क्षमता है. 

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उन्होंने कहा हम बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों से पुरानी गाड़ियों को इंडिया लाकर रिसाइकिल कर सकते हैं. ये एक नया बिजनेस भी बनेगा. दरअसल नितिन गडकरी मैटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) के एक इवेंट में बोल रहे थे. 

कबाड़ी भी खोल सकता है स्क्रैपिंग सेंटर

नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार ने वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी को इस तरह से डिजाइन किया है कि छोटे से लेकर बड़े लेवल तक के इंवेस्टर्स स्क्रैप सेंटर खोल सकते हैं. उन्होंने कहा कि एक कबाड़ी से लेकर बड़ी ऑटो कंपनी तक कोई भी अपना स्क्रैप सेंटर खोल सकता है. इतना ही नहीं, इसकी मंजूरी के लिए सरकार सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम देगी, जहां स्क्रैप सेंटर से जुड़ी सारी मंजूरियां एक ही जगह मिलेंगी.

बनाए जाएं छोटे-छोटे कलेक्शन सेंटर

नितिन गडकरी ने कहा कि वाहन स्क्रैप सेंटर की ऑपरेशनल कॉस्ट कम करने के लिए हम मल्टीपल ऑथराइज कलेक्शन सेंटर भी बना सकते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर शहर के सिटी सेंटर से 150 किमी की रेंज के अंदर एक स्क्रैपिंग सेंटर बनाने का है. लेकिन बड़ी संख्या में बड़े स्क्रैपिंग बनाए जाने से बेहतर हम हर स्क्रैपिंग यूनिट के साथ कई ऑथराइज स्क्रैप कलेक्शन सेंटर खोलने पर ध्यान दें.

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उन्होंने कहा कि इन सेंटर्स के पास पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन खत्म करने और गाड़ियों के मालिकों को डिपॉजिट रिसीट जारी करने की अथॉरिटी होगी. इस रिसीट से वे नए वाहन की खरीद पर छूट का लाभ उठा सकेंगे.

वाहनों को स्क्रैप करने की ये नई पॉलिसी इस साल एक अप्रैल से लागू हो चुकी है. इस पॉलिसी का मकसद भारत की सड़कों से पुराने और अनफिट वाहनों को हटाना है. इससे प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी. प्राइवेट कार ओनर्स को अपने 15 साल पुराने वाहनों के लिए अब फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा.

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