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हर पैसे वाला नहीं खरीद सकता Rolls Royce? जानें इस सुपरलग्जरी कार से जुड़े म‍िथक

दुनिया में जब भी कहीं लग्जरी गाड़ियों की बात आती है, तो Rolls Royce का नाम टॉप मोस्ट ल‍िस्ट में शुमार होता है. Rolls Royce सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि वो सपना है जिसके पूरा होने की उम्मीद भले ही न हो, लेकिन देखना तकरीबन हर कोई चाहता है. वहीं, इस गाड़ी को लेकर कई मिथक भी हैं.

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सोशल मीडिया पर Rolls Royce को लेकर किए जा रहे दावों में है कितनी सच्चाई?
सोशल मीडिया पर Rolls Royce को लेकर किए जा रहे दावों में है कितनी सच्चाई?

आप चाहें इसे कंपनी की लोकप्रियता कहें या फिर आम लोगों की पहुंच से दूरी, लेकिन ऐसा मानना है कि Rolls Royce को हर कोई नहीं खरीद सकता. कहा जाता है  कि अगर किसी ने इस सुपर लग्जरी कार को खरीदने के लिए पैसे जुटा भी लिए तो भी जरूरी नहीं कि वो इसे खरीद ही पाए. क्योंकि Rolls Royce अपनी कार को बेचने से पहले खरीदने वाले का बैकग्राउंड चेक करती है. इसके पीछे यकीन यही है कि कंपनी देखती है कि कार खरीदने वाला इसका लेवल मेंटेन करने की हैसियत भी रखता है या नहीं.

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लेकिन क्या Rolls Royce को लेकर किए जा रहे इन दावों में दम है? ये जानने के लिए aajtak.in ने दिल्ली के सरिता विहार स्थित Rolls Royce के शोरूम में जाकर बात की. इस शोरूम के मैनेजर शुभम से हमने पूछा कि क्या Rolls Royce कंपनी अपनी कार को खरीदने वालों का बैकग्राउंड चेक कर ये तय करती है कि इसे बेचना है या नहीं, तो उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया.

शुभम ने हमें बताया कि कंपनी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका बैकग्राउंड क्या है. उन्होंने बताया कि अगर आपके पास Rolls Royce को खरीदने के पैसे हैं तो आप सीधे शोरूम आकर इसे खरीद सकते हैं. आगे वे बताते हैं कि Rolls Royce को भी खरीदने का प्रोसेस बिल्कुल वैसा ही है जैसा किसी भी दूसरी कार के लिए होता है. यहां फर्क स‍िर्फ कीमत को लेकर ही है.

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Rolls Royce से जुड़ी खास बातें

सोशल मीडिया पर तो Rolls Royce को लेकर और भी कई फनी दावे किए जाते हैं, जिनपर लोग आसानी से यकीन भी कर लेते हैं. तो चलिए आज हम आपको Rolls Royce से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथकों की सच्चाई बताते हैं:

1. Rolls Royce अपनी कार बेचने से पहले ड्राइवर की डिटेल पूछती है?
कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि Rolls Royce अपनी कार को बेचने से पहले इसे चलाने वाले ड्राइवर की डिटेल मांगती है. लोगों के मुताबिक, कंपनी जानती है कि कार को खरीदने वाला इसे खुद कभी नहीं चलाएगा, इसलिए वो ड्राइवर की डिटेल लेकर ये सुनिश्चित करना चाहती है कि उसकी ड्राइविंग स्किल कैसी है ताकि अगर ड्राइवर की वजह से कार में बैठने वाले को कोई प्रॉब्लम हो तो उससे कंपनी की बदनामी न हो. लेकिन ये दावा भी उतना ही गलत है जितना खरीददार का बैकग्राउंड चेक करने वाली बात. कार बेचने से पहले ड्राइवर या माल‍िकाना हक रखने वाले की क‍िसी भी तरह की डिटेल नहीं मांगी जाती है.

2. Rolls Royce की कार पर आफ्टर मार्केट पेंट जॉब नहीं करवा सकते?
लोगों का मानना है कि Rolls Royce कंपनी अपनी कार खरीदने वालों को सख्त निर्देश देती है कि कार का रंग पसंद नहीं आने पर भी मार्केट में जाकर कोई कलर नहीं करवा सकते हैं. ये दावा भी झूठा है. दरअसल सच्चाई तो ये है अगर आपकी मार्केट से कलर करवाने की इच्छा हो, तो उसके लिए कोई भी मनाही नहीं है. यहां एक बात गौरतलब है क‍ि Rolls Royce 44000 से ज्यादा कलर ऑप्शन में आती है. इनमें से आप अपनी पसंद का कोई भी कलर चुन सकते हैं. इतना ही नहीं, अगर आपको इन 44000 कलर ऑप्शन में से भी कोई कलर पसंद न आए तो आप खुद से भी रंग बता सकते हैं, ताकि कंपनी वैसी कार आपके लिए कस्टमाइज कर दे.

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आगे बढ़ने से पहले Rolls Royce से जुड़े कुछ और तथ्य जानिए:

इसलिए भी खास है Rolls Royce

3. Rolls Royce को किसी भी मैकेनिक से रिपेयर नहीं करवा सकते?
Rolls Royce के बारे में एक और मिथक प्रचलित है कि इसमें कोई खराबी आने पर आप इसे सिर्फ कंपनी के सर्विस सेंटर पर रिपेयर करवा सकते हैं. हालांकि ये बात भी सच नहीं है. इस कार को कहीं भी और किसी से भी रिपेयर करवा सकते हैं. इसके साथ ही, Rolls Royce में कोई खराबी आ जाने पर कंपनी आपकी लोकेशन पर ही मैकेनिक भेज देती है. इतनी सुविधा मिले तो कोई दूसरे सर्विस सेंटर पर क्यों ही जाना चाहेगा?

4. Rolls Royce के चारों दरवाजे में छाते लगे मिलते हैं?
लोग सोचते हैं कि Rolls Royce के चारों दरवाजों पर छाते मिलते हैं, ताकि अगर बाहर मौसम खराब हो तो कार में बैठा व्यक्ति इसका इस्तेमाल कर सके. इस बात में सच्चाई तो है लेकिन पूरी तरह नहीं. Rolls Royce के सिर्फ प‍िछले दोनों दरवाजों पर छाते मिलते हैं, ड्राइवर और को-ड्राइवर की सीट पर नहीं. और हां, आप इन छातों का कलर भी चुन सकते हैं.

5. सेकंड हैंड Rolls Royce नहीं खरीदी जा सकती है?
कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि Rolls Royce को यदि कोई बेचना चाहता है तो कंपनी इसे खुद ही खरीदकर अपने पास रख लेती है. लोगों के मुताबिक, कंपनी ऐसा इसलिए करती है कि हर कोई सिर्फ नई Rolls Royce खरीदे, सेकंड हैंड नहीं. ये भी केवल मिथक है. आपको बता दें कि कंपनी खुद सेकंड हैंड कार बेचती है. इसे आप Rolls Royce की वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं.

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इस सारी बातों का सार बस इतना समझ लीजिए कि Rolls Royce सिर्फ कार नहीं बनाती, बल्कि ये अपने कस्टमर के इमोशन और फिलिंग का भी उतना ही ख्याल रखती है. अगर आप कभी Rolls Royce खरीदने जाएंगे तो ये बात आप और भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे. कंपनी आपके मुताबिक कार को तैयार करके देती है. आप कार का कलर, डिजाइन, इंटीरियर सब अपने हिसाब से कस्टमाइज करा सकते हैं. स्टीयरिंग से लेकर कार के पहिए तक और दरवाजे में रखे छाते से लेकर हेडलाइनर तक सब कुछ आपकी पसंद के रंग और डिजाइन के अनुसार ही तैयार किया जाता है.

क्या आपको पता है कि भारत में Rolls Royce की कौन-कौन सी कारें मिलती हैं?

भारत में मिलने वाली Rolls Royce की कारें और उनकी कीमत

ओशो को भी था Rolls Royce का शौक
भारत में मुकेश अंबानी, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, आमिर खान, अक्षय कुमार जेसे कई बड़े नाम हैं, जिनके पास रॉल्स रॉयस कारें मौजूद हैं.

ओशो के नाम से मशहूर आचार्य रजनीश को लग्जरी सामानों का बेहद शौकीन माना जाता है. कहते हैं कि ओशो हमेशा महंगी गाड़ियों के काफिले में ही चलते थे. ओशो ने जब अमेरिका में रजनीशपुरम बसाया, तब उनके पास कुल 93 रॉल्स रॉयस कारें थीं. अमेरिकी सरकार द्वारा जब ओशो को देशनिकाला द‍िया गया तो उनकी कई रॉल्स रॉयस कारें बेच दी गईं.

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जब अलवर के राजा ने Rolls Royce से उठवाया था कूड़ा
भारत में रॉल्स रॉयस के बारे में एक किस्सा बहुत प्रचलित है. दरअसल अलवर रियासत के महाराजा जय सिंह प्रभाकर अपने लंदन प्रवास के दौरान रॉल्स रॉयस के शोरूम में पहुंचे. वहां उन्हें कैजुअल कपड़े में देखकर सेल्समैन ने साधारण शख्स समझ लिया और गलत तरीके से बर्ताव किया. महाराजा ने खुद को अपमानित महसूस किया और शोरूम के मैनेजर को बुलाकर रॉल्स रॉयस की फैंटम मॉडल की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ऐसी 7 कारें भारत में उनके पास पहुंचाई जाए. महाराजा ने ये भी शर्त रख दी कि कार को डिलीवर करने खुद वही सेल्समैन आएगा.
सेल्समैन जब कार को डिलीवर करने अलवर पहुंचा तो महाराजा जय सिंह प्रभाकर ने उसके सामने ही कारों को नगरपालिका में कूड़ा उठवाने के लिए भेज दिया. धीरे-धीरे जब बात फैली तो कंपनी की बदनामी होने लगी. कंपनी ने इसके बाद लिखित में माफी भी मांगी.
अक्सर इस कूड़े उठवाने वाली घटना को लोग हैदराबाद के निजाम से जोड़ लेते हैं. लेकिन ये घटना वास्तव में अलवर के महाराजा जय सिंह प्रभाकर के साथ जुड़ी है.

 

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