
यदि आप दिल्ली-NCR में हैं और रोजाना वाहन का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं. जल्द ही, आपके वाहन लाइसेंस प्लेटों को PUCC वैधता के लिए पेट्रोल पंपों पर कैमरों द्वारा स्कैन किया जाएगा. दिल्ली सरकार इस मामले में एक डिजिटल सॉल्यूशन लागू करने की योजना बना रही है. दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DTIDC) ने एक निविदा सूचना जारी की है और बिडर्स को डिजिटल सॉल्यूशन का सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया है.
दरअसल, दिल्ली सरकार राज्य में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर रोकथाम लगाने के लिए उन वाहनों की जांच करना चाहती है जो बिना वैलिड प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट (PUC Certificate) के दौड़ रही हैं. इसके लिए सरकार पेट्रोल पंपों पर CCTV कैमरा लगाने की तैयारी में है ताकि ऐसे वाहनों को उनके नंबर प्लेट के जरिए पहचान की जा सके.
बताया जा रहा है कि, इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत तकरीबन 6 करोड़ रुपये है. मीडिया को दिए बयान में एक अधिकारी ने कहा, "बोली लगाने वाले के पास दिल्ली शहर के भीतर प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से एक डिजिटल समाधान देने की क्षमता होनी चाहिए. इस सॉल्यूशन में एक एप्लिकेशन को भी शामिल किया जाना जरूरी है जो पेट्रोल पंपों पर लगाए गए मौजूदा कैमरों के साथ इंटीग्रेट हो सके."
कैसे काम करेगा ये सिस्टम:
अधिकारी ने बताया कि, "इसे इस तरह से डिज़ाइन किया जाएगा कि पेट्रोल पंप पर जैसे ही कोई वाहन पहुंचेगा मौके पर लगा हुआ कैमरा लाइसेंस प्लेट को स्कैन कर लेगा और सिस्टम वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से तत्काल पता लगा लेगा कि, उक्त वाहन का प्रदूषण सर्टिफिकेट वैलिड है या नहीं. सरकार द्वारा चुनी गई कंपनी को अपने डिजिटल सॉल्यूशन को echallan.parivahan.gov.in पोर्टल के साथ इंटिग्रेट करना होगा."
DTIDC द्वारा तैयार किए डॉक्युमेंट्स के अनुसार सिस्टम डेटाबेस से वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के डिटेल को क्रॉस-चेक करके PUC की वैधता की जांच करेगा.
ऐसे मामले में जहां पेट्रोल पंप पर कैमरा नहीं है, वहां पर सरकार द्वारा चयनित फर्म को अपने खर्च पर कैमरा इंस्टॉल करने की जिम्मेदारी उठानी होगी. अधिकारी ने कहा, अगर कैमरे के अपग्रेड की जरूरत पड़ी तो इसकी जिम्मेदारी भी कंपनी की होगी.
PUC वैलिड न होने पर क्या होगा?
यदि किसी वाहन में एक्सपायर्ड PUC पाई जाती है, तो पेट्रोल पंप पर मौजूद कर्मचारी वाहन मालिक को PUC को नवीनीकृत कराने के लिए सूचित करेगा. वाहन मालिक को इसकी जानकारी पेट्रोल पंप पर लगाई गई स्क्रीन के माध्यम से भी दी जाएगी. सिस्टम 3 घंटे के बाद फिर से PUC स्टेटस की जांच करेगा और इस मामले में, सिस्टम echallan.parivahan.gov.in पर एक चालान जेनरेट करेगा."
चुनी गई कंपनी को करना होगा यह काम:
जिस कंपनी को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना जाएगा उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि पेट्रोल पंप पर CCTV को सही जगह पर लगाए जाएं ताकि पेट्रोल पंप पर आने वाली सभी गाड़ियों के नंबर प्लेट को आसानी से स्कैन किया जा सके. इसके अलावा कंपनी को यह भी तय करना होगा कि, भविष्य में कैमरों को दूसरी जगह पर रीलोकेट करने के लिए भी पर्याप्त गुंजाइश हो.
कंपनी पेट्रोल पंपों के इंफ्रास्ट्रक्चर का सर्वे करेगी फिर स्केलेबिलिटी और अफोर्डेबिलिटी को ध्यान में रखते हुए एक उपयुक्त तकनीकी समाधान का प्रस्ताव करेगी. शुरुआत में पायलट फेज में कंपनी सभी पेट्रोल पंपों पर डिजिटल सॉल्यूशन को टेस्ट करेगी और इसके बारे में पेट्रोल पंप के कर्मचारियों को जरूरी ट्रेनिंग भी देगी.
अधिकारी ने बताया कि, "फंड की उपलब्धता के आधार पर इस टेंडर को 500 पेट्रोल पंपों तक बढ़ाया जा सकता है. डिजिटल सॉल्यूशन को 100 पेट्रोल पंपों पर पहले से मौजूदा सीसीटीवी कैमरों में इंस्टॉल किया जाएगा." बता दें कि, पिछले साल, परिवहन विभाग के आंकड़ों से पता चला था कि दिल्ली में बिना वैध PUC के लगभग 22 लाख वाहन सड़क पर दौड़ रहे थे और उनमें से 19 लाख दोपहिया वाहन थे.
10,000 रुपये का चालान या जेल:
दिल्ली में वैलिड प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना गाड़ी चलाने पर 10,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. पहली बार पकड़े जाने पर 1,000 रुपये है और दूसरी बार पकड़े जाने पर 2,000 रुपये तक चालान का प्राधान है. लेकिन परिवहन विभाग का यह भी कहना है कि बिना PUC के गाड़ी चलाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल या दोनों हो सकते हैं. इसके अलावा वाहन मालिक का लाइसेंस भी 3 महीने के लिए रद्द किया जा सकता है.
कैसे बनवाएं PUC?:
PUC सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. ये सुविधा पेट्रोल पंपों पर आसानी से उपलब्ध है. तकरीबन हर पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांच केंद्र बनवाए गए हैं. जहां पहुंचकर आपको अपने वाहन के पॉल्यूशन लेवल की जांच करवानी होगी और इसके बाद आपको एक सर्टिफिकेट मिल जाएगा. कार के लिए इसकी फीस तकरीबन 100 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 70-80 रुपये है.