हाल में इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई. इसके बाद लोगों के मन में इसे खरीदने को लेकर कई संशय पैदा हो गए हैं. ऐसे में इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कई कंपनियों के फाउंडर आगे आए हैं, साथ ही इस सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट ने भी इसे लेकर अपनी बात रखी है. इन सभी बातों को जानकर आप अपनी एक समझ बना सकते हैं...
समझें बैटरी हेल्थ, बैटरी सेफ्टी का फर्क
इस बारे में इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली ही एक कंपनी Simple Energy के फाउंडर सुहास राजकुमार ने ट्विटर पर एक Q&A सेशन किया था. उन्होंने कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी और सेफ्टी के बीच का अंतर समझने की बात कही.
सुहास राजकुमार ने लिखा कि अभी भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली अधिकतर कंपनियां इसमें इस्तेमाल होने वाली बैटरी की हेल्थ पर ध्यान देती हैं. जबकि ये मसला बैटरी की सेफ्टी (Battery Health vs Battery Safety) से काफी अलग है. हालांकि किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी के लिए ये दोनों ही जरूरी है.
क्या होती है बैटरी की हेल्थ?
सुहास राजकुमार ने लोगों की शंकाओं को दूर करते हुए बैटरी हेल्थ और बैटरी सेफ्टी के अंतर को समझाया. बैटरी की अच्छी हेल्थ का मतलब उसके सेल की कैपेसिटी बने रहने, उसमें समय के साथ खराबी नहीं आने से होता है और किसी बैटरी को बनाने में ये मुकाम हासिल करना कोई ‘रॉकेट साइंस’ नहीं है, क्योंकि दुनिया दशकों से लीथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल कर रही है.
क्या होती है बैटरी की सेफ्टी?
सिंपल एनर्जी के फाउंडर के मुताबिक बैटरी की सेफ्टी इससे बिल्कुल जुदा मामला है. इसका एक सीधा-सा मतलब है कि गाड़ी की बैटरी किसी भी परिस्थिति में बेहतर तरीके से काम करे. इसके लिए अलग तरह की इंजीनियरिंग चाहिए होती है. इसके लिए बैटरी की पर्याप्त टेस्टिंग होना जरूरी है. उनकी इस बात का निष्कर्ष ये निकलता है कि ग्राहक जो भी इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीद रहे हैं, उसके बारे में पता करें कि लॉन्च से पहले कंपनी ने उसकी कितनी टेस्टिंग की है. टेस्टिंग से जुड़ा कितना डेटा कंपनी ने हासिल किया है. क्या बैटरी सेफ्टी के सभी मानकों पर परफेक्ट बैठती है.
भारत के अनुकूल हों बैटरी
इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने की घटनाओं को लेकर एक और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी Ather Energy का कहना है कि अभी इन स्कूटरों में जो बैटरी इस्तेमाल हो रही है, उनमें से अधिकतर का आयात किया गया है. ये सभी बैटरियां ठंडे इलाकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं. ऐसे में इन बैटरियों को इंडिया की जलवायु के अनुकूल बनाना कंपनियों का काम है. एथर एनर्जी की ये बात इस ओर इशारा करती है कि ग्राहक अगर इलेक्ट्रिक स्कूटर की खरीद कर रहे हैं तो वह उस स्कूटर की बैटरी के ‘मूल देश’ (Country of Origin) की डिटेल जरूर देखें.
समझें बैटरी सेफ्टी मैनेजमेंट को
किसी भी इलेक्ट्रिक व्हीकल में बैटरी की सेफ्टी को अधिकतर एक्सपर्ट सबसे जरूरी बताते हैं. इस बारे में iVOOMi Energy के फाउंडर सुनील बंसल का कहना है कि बैटरी की सेफ्टी के लिए उसमें थर्मल मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. वहीं सिंपल एनर्जी के सुहास राजकुमार का कहना है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों में टार्क और स्पीड को बरकरार रखते हुए बैटरी की सेफ्टी तय करने के लिए संतुलन बनाना जरूरी है. इसके साथ-साथ ग्राहकों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए Fast Charging की सुविधा भी देना है. इसके लिए बैटरी की मैकेनिकल इंजीनियरिंग के साथ-साथ उसमें थर्मल मैनेजमेंट और कूलिंग सिस्टम के बीच संतुलन वाला सॉफ्टवेयर होना चाहिए. दोनों एक्सपर्ट की बात ग्राहकों को ये बताती है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने से पहले वह यह जानें कि गाड़ी में बैटरी को कूल रखने के लिए क्या सिस्टम लगाया गया है.
थर्मल अलार्म से बन सकती है बात
इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने की स्थिति नहीं पैदा हो, इसके लिए सोसायटी ऑफ मैन्युफैक्चर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल (SMEV) ने इन गाड़ियों में थर्मल अलार्म लगाने का सुझाव दिया है. अभी कई कारों में इस तरह का फीचर आता है. जबकि Tata Motors ने हाल में अपनी जो CNG गाड़ियां लॉन्च की हैं, उसमें इसे थोड़ा और एडवांस बनाया गया है, जो गाड़ी में आग लगने की स्थिति पैदा होते ही फ्यूल की सप्लाई बंद कर देता है. ऐसे में एक्सपर्ट की ये बात साफ बताती है कि आने वाले दिनों में ग्राहक इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनियों से इस तरह के सेफ्टी फीचर्स की मांग करें.
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