E20 Fuel Explained: देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए बेंगलुरु में E20 ईंधन लॉन्च किया है, जो कि 20% इथेनॉल के साथ आने वाला मिक्स पेट्रोल है. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को बेंगलुरु में भारत ऊर्जा सप्ताह (India Energey Week) की शुरुआत की.
उत्सर्जन में कटौती के साथ-साथ विदेशी मुद्रा-निकासी आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ाने के एक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में सोमवार को 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत इथेनॉल के साथ पेट्रोल डाला गया. वर्तमान में, पेट्रोल में (10 प्रतिशत इथेनॉल, 90 प्रतिशत पेट्रोल) मिलाया जाता है और सरकार 2025 तक इस मात्रा को दोगुना करने की सोच रही है.
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ रही है, लेकिन ज्यादातर लोग उन्हें वहन नहीं कर सकते. नतीजतन, E20 या फ्लेक्स फ्यूल वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए एक बढ़िया विकल्प माना जा रहा है. इस कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, "आज भारत विंड पावर कैपेसिटी के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर है. हम इस दशक के अंत तक 50 परसेंट नॉन फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं. बीते 9 वर्षों में पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को हम डेढ़ परसेंट से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर चुके हैं. अब हम 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहे हैं."
उन्होनें कहा कि, "एनर्जी सेक्टर को लेकर भारत की स्ट्रेटजी चार मुख्य पिलर्स पर आधारित है. पहला है, डोमेस्टि एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन को बढ़ावा देना. दूसरा सप्लाई और डाइवर्सिफिकेशन, तीसरा पिलर है बायोफ्यूल, इथेनॉल, कम्प्रेस्ड बायोगैस और सोलर जैसे वैकल्पिक एनर्जी सोर्सेज का विस्तार देना. चौथ प्रमुख वर्टिकल है इलेक्ट्रिक व्हीकल और हाइड्रोजन के जरिए डीकार्बनाइजेशन. एक और सेक्टर है जिसमें भारत लीड ले रहा है, वो ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर."
क्या होता है E20 फ्यूल:
एथिल अल्कोहल या इथेनॉल (C2H5OH) एक जैव ईंधन है जो स्वाभाविक रूप से शुगर को फर्मेंटिंग करके बनाया जाता है. भारत ने जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) की खपत को कम करने के लिए इस जैव ईंधन (Bio Fuel) को पेट्रोल के साथ मिलाने के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम शुरू किया है. इससे पहले सरकार ने E10 लक्ष्य को हासिल करने की घोषणा की थी, यानी देश में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल में 10% इथेनॉल होता है.
साधारण शब्दों में समझें तो, "E20" 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिश्रण को इंगित करता है. "E20" में संख्या "20" पेट्रोल मिश्रण में इथेनॉल के अनुपात को दर्शाती है. सीधे शब्दों में कहा जाए तो संख्या जितनी अधिक होगी, पेट्रोल में इथेनॉल का अनुपात उतना ही अधिक होगा. मौजूदा समय में भारत में बेचे जाने वाले पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण 10 प्रतिशत है, जो कि पहले से कहीं अधिक है. कई रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि सरकार जल्द ही भारत में आम जनता के लिए E20 ईंधन उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है.
क्योंकि इथेनॉल का निर्माण बायोमास से होता है, इसलिए उसे कच्चे तेल की जरूरत नहीं होती. इथेनॉल ज्यादातर मकई और गन्ना जैसी फसलों से प्राप्त होता है. भारत पहले से ही पर्याप्त मात्रा में अनाज और गन्ना पैदा करता है. ऐसे में यहां पर इथेनॉल के प्रोडक्शन को लेकर चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं है.
E20 फ्यूल के क्या है फायदे:
इस फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे प्रदूषण कम होता है, जो कि पर्यावरण के लिए बेहद ही जरूरी है. कम पर्यावरणीय प्रभाव के कारण, बायो फ्यूल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यदि इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है, तो इससे प्रदूषण को काफी हद तक कम करने की क्षमता है. भारत की लगभग 85% ईंधन की जरूरतें आयात से पूरी होती हैं, दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमत भी लगातार बढ़ती जा रही है. फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता को कम करने के लिए ये एक बेहद ही जरूरी कदम है.
भारत में 20% इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के उपयोग से काफी बचत होगी. इसके अलावा नए तकनीक पर जब काम शुरू होता है जो नए रोजगारों के सृजन की भी संभावनाएं बढ़ती हैं. ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग (OEM) सेक्टर के साथ-साथ कंपोनेंट सप्लायर और आफ्टरमार्केट सर्विस प्रोवाइडर सेक्टर में भी नए रोजगार के अवसर मिलते हैं.
E20 फ्यूल वाहनों पर क्या है रिपोर्ट:
भारतीय सड़कों पर अभी ऐसी ज्यादा कारें नहीं हैं जो E20 पेट्रोल मिक्स को हैंडल कर सकें. हालांकि कुछ ऐसे वाहन हैं जिनमें इस फ्यूल का इस्तेमाल किया जा सकता है. हाल ही में हुंडई मोटर इंडिया ने अपने लोकप्रिय एसयूवी रेंज Creta, Venue, और Alcazar को अपडेट किया है, बताया जा रहा है कि ये सभी एसयूवी 2023 MY मॉडल वर्ष के रूप में पेश की गई हैं और ये E20 पेट्रोल पर काम करने में सक्षम हैं. इसके अलावा टाटा मोटर्स ने भी बीते ऑटो एक्सपो में अपने दो टर्बोचार्ज पेट्रोल इंजन (1.2 लीटर और 1.5 लीटर ) को पेश किया था, कहा जा रहा है कि ये इंजन भी E20 पेट्रोल पर दौड़ सकते हैं.
E10 'साधारण वाहन' में E20 फ्यूल का क्या होगा असर:
रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि आप किसी साधारण या ऐसे वाहन जो कि E20 फ्यूल के लिए तैयार नहीं हैं तो उन पर सबसे बड़ा असर उनके माइलेज के रूप में देखने को मिलेगा. यदि आप E0 और E10 फ्यूल वाले चारपहिया वाहन में E20 फ्यूल का इस्तेमाल करते हैं तो चारपहिया वाहन में माइलेज में तकरीबन 6 से 7 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल सकती है. वहीं टू-व्हीलर्स में ये आंकड़ा तकरीबन 3-4% तक कम हो सकता है. मौजूदा समय में E10 वाहनों की बिक्री होती है और इसमें E20 फ्यूल के इस्तेमाल पर माइलेज में तकरीबन 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है.
हालांकि वाहन निर्माता कंपनियां नए फ्यूल के आधार पर वाहनों में बदलाव करने के लिए तैयार हैं. यदि वाहन के इंजन में जरूरी मॉडिफिकेशन के साथ हार्डवेयर में ट्यूनिंग इत्यादि की जाएगी तो ब्लेंडेड फ्यूल से माइलेज में आने वाले गिरावट को कम किया जा सकता है.