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'सत्याग्रह की वजह से नहीं, हाथों में हथियार देख भागे अंग्रेज', बिहार के राज्यपाल का बड़ा बयान

बिहार के राज्यपाल ने कहा है कि अंग्रेजों ब्रिटिश शासकों ने सत्याग्रह के कारण भारत नहीं छोड़ा था. अंग्रेजों ने जब लोगों के हाथों में हथियार देखे तो उन्हें लगने लगा कि लोग अब किसी भी हद तक जा सकते हैं. तब उन्होंने भारत छोड़ने का फैसला लिया.

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Governor RV Arlekar (File Photo)
Governor RV Arlekar (File Photo)

बिहार के राज्यपाल ने अंग्रेजों के भारत छोड़ने को लेकर एक बयान दिया है. राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने गोवा में कहा कि ब्रिटिश शासकों ने सत्याग्रह के कारण भारत नहीं छोड़ा. अंग्रेजों ने जब लोगों के हाथों में हथियार देखे तो उन्हें लगने लगा कि लोग अब किसी भी हद तक जा सकते हैं.

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बिहार के राज्यपाल आर्लेकर ने पणजी गोवा में कहा,'आक्रमणकारियों (ब्रिटिशर्स) ने एक कहानी गढ़ने की कोशिश की. लेकिन सच्चाई यह है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम हथियारों के बिना नहीं लड़ा गया. अंग्रेज 'सत्याग्रह' के कारण भारत नहीं छोड़कर गए.'

तत्कालीन सरकार ने भी किया समर्थन

गोवा पर पुर्तगाली आक्रमण का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि अब समय आ गया है कि बिना डरे इतिहास के बारे में सही परिप्रेक्ष्य सामने लाया जाए. उन्होंने कांग्रेस की पिछली सरकारों पर नाम लिए बिना गंभीर आरोप लगाए. राज्यपाल ने कहा,'भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) ने एक कहानी गढ़ी थी कि आप गुलाम बनने के लिए पैदा हुए हैं और तत्कालीन सरकार ने भी इसका समर्थन किया था.'

पूछा, गोवा इनक्विजिशन क्या है?

वह आनंदिता सिंह की लिखित पुस्तक 'भारत के उत्तर पूर्व में स्वतंत्रता संग्राम का संक्षिप्त इतिहास (1498 से 1947)' पर बोल रहे थे. आर्लेकर ने कहा,'गोवा इनक्विजिशन क्या है? अगर हम इसे सामने लाने की कोशिश करते हैं तो गोवा में कुछ लोग परेशान हो जाते हैं. उन्हें दर्द होता है. क्या हमें यह नहीं बताना चाहिए कि आपकी जड़ें क्या हैं? कुछ लोग तब परेशान हो जाते हैं, जब उन्हें यह बताया जाता है कि आपकी जड़ें कहां हैं.'

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'सामने लाना चाहिए अपना दृष्टिकोण'

उन्होंने कहा,'हमें बिना किसी से डरे अपनी बात कहनी चाहिए. जिन लोगों ने हम पर आक्रमण किया, वे कभी हमारे नहीं हो सकते. इसलिए हमें अपना दृष्टिकोण सामने लाना चाहिए. अगर गुवाहाटी जैसी जगहों से लोग हमें अपना इतिहास बता रहे हैं, तो गोवा के लोग अपनी भूमि का सच्चा इतिहास क्यों नहीं लिखते.' बता दें कि आर्लेकर गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

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