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बिहार: नीतीश सरकार ने 7000 लोगों को बांटे अपॉइंटमेंट लेटर, इन विभागों में मिलेगी पोस्टिंग

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने मंगलवार को विभिन्न विभागों में वर्षों से खाली पड़े करीब 7,000 पदों पर भर्ती की घोषणा की. इन पदों पर भर्ती कानूनी अड़चनों की वजह से रुकी हुई थी.

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नीतीश कुमार. (फाइल फोटो)
नीतीश कुमार. (फाइल फोटो)

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने मंगलवार को विभिन्न विभागों में वर्षों से खाली पड़े करीब 7,000 पदों पर भर्ती की घोषणा की. इन पदों पर भर्ती कानूनी अड़चनों की वजह से रुकी हुई थी. एक समारोह में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में 6,341 जूनियर इंजीनियरों (JE) को नियुक्ति पत्र सौंपे गए. इन सभी की पोस्टिंग आठ अलग-अलग विभागों में की जाएगी. इसके अलावा, श्रम विभाग में अनुदेशक (इंस्ट्रक्टर) के पद पर 496 लोगों को भी इसी कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र दिए गए. भर्ती प्रक्रिया का मुख्य जिम्मा जल संसाधन विभाग के पास था, जिसकी कमान जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी संभाल रहे हैं. चौधरी ने इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर पत्रकारों से बातचीत की.

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कानूनी अड़चनों की वजह से रुकी थी भर्ती
चौधरी ने बताया कि बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) ने इन पदों की अधिसूचना 2019 में जारी की थी. लेकिन कई अभ्यर्थियों, जिनमें संविदा पर काम कर रहे कर्मचारी और गैर-सरकारी संस्थानों से डिप्लोमा प्राप्त करने वाले शामिल थे, सभी ने इस भर्ती प्रक्रिया को पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

मंत्री ने कहा, 'मुख्यमंत्री के निर्देश पर हमने इन कानूनी अड़चनों का समाधान निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक प्रस्ताव रखा, जिसे मंजूरी मिल गई और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ी.'

किन विभागों में कितनी भर्तियां हुईं?
जल संसाधन विभाग: 2,338 पद
योजना एवं विकास विभाग: 1,273 पद
ग्रामीण कार्य विभाग: 759 पद
पथ निर्माण विभाग: 503 पद
सरकार का विकास एजेंडा

विजय कुमार चौधरी ने कहा कि 2005 से जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, उनकी सरकार का एकमात्र एजेंडा विकास रहा है. उन्होंने दावा किया कि अब विपक्ष भी यह मानने को मजबूर हो गया है कि बिहार में विकास हुआ है और वे इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं.

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राहुल गांधी के दौरे पर कसा तंज
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 7 फरवरी को पटना दौरे पर पूछे गए सवाल पर चौधरी ने कहा, 'वह अक्सर अपनी ही पार्टी को नुकसान पहुंचाते हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का यह स्वीकार न करना कि जाति जनगणना की पहल नीतीश कुमार ने की थी, 'ईमानदारी की कमी' को दर्शाता है.

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