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जिम या कोच नहीं मगरमच्छ से ट्रेनिंग लेता है ये शख्स, खूंखार जीवों के बीच बिताता है पूरा दिन

बगहा में एक युवक ऐसा भी है जो इन मगरमच्छों के बीच अपना दिन बिताता है. नाम है धर्मेंद्र कुमार, उम्र 25 साल. ये युवक खुद को प्रोफेशनल रिंग फाइटिंग के लिए तैयार कर रहा है. वह मगरमच्छों से उनके हमले का स्टाइल सीख रहा है.

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मगरमच्छ से ट्रेनिंग लेते हैं धर्मेंद्र कुमार
मगरमच्छ से ट्रेनिंग लेते हैं धर्मेंद्र कुमार

बिहार के बगहा से एक ऐसी अनोखी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. जहां आम लोग मगरमच्छ का नाम सुनते ही सहम जाते हैं, वहीं एक युवक ऐसा भी है जो इन मगरमच्छों के बीच अपना दिन बिताता है. नाम है धर्मेंद्र कुमार, उम्र 25 साल. ये युवक खुद को प्रोफेशनल रिंग फाइटिंग के लिए तैयार कर रहा है. लेकिन कोई कोच, जिम या ट्रेनर नहीं… बल्कि उसका सबसे बड़ा गुरू है- मगरमच्छ.

धर्मेंद्र रोज सुबह बगहा-1 प्रखंड के छत्रौल गांव से 12 किलोमीटर दूर गोईती क्षेत्र में स्थित जंगल-नुमा इलाके तक पहुंचता है. यहां एक जलधारा में करीब 100 से ज्यादा मगरमच्छ धूप सेंकते हुए दिखते हैं. धर्मेंद्र वहीं पहुंचता है, और फिर शुरू होती है उसकी अजीब लेकिन दिलचस्प ट्रेनिंग. धर्मेंद्र का कहना है कि वो इन मगरमच्छों की चाल, मूवमेंट, और हमला करने की तकनीक को बारीकी से देखता है. वो उनके बगल में लेटता है, पुश-अप करता है, ध्यान लगाता है और फिर उनके मूवमेंट्स की नकल करके उन्हें अपनी फाइटिंग स्टाइल में ढालता है. वह कहता है कि मगरमच्छ न शोर करते हैं, न डरते हैं. उनका हमला अचानक और सटीक होता है. मैं यही सीख रहा हूं.

न कोई कोच, न गियर – मगरमच्छ ही हैं असली मास्टर

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जहां देशभर में युवा जिम जाकर या कोच से सीखकर प्रोफेशनल फाइटर बनने की तैयारी करते हैं, वहीं धर्मेंद्र पूरी तरह से नेचर और मगरमच्छों पर निर्भर है. उसका कहना है कि मगरमच्छ अब उसे समझने लगें हैं, जब वह उनके पास होता है तो वो आक्रामक नहीं होते है. उसने धीरे-धीरे ये भरोसा बनाया है.

क्रोको स्टाइल, मगरमच्छ से इंस्पायर्ड फाइटिंग 

धर्मेंद्र स्टेट लेवल पर मार्शल आर्ट मुकाबले जीत चुका है, लेकिन अब वह एक नई फाइटिंग स्टाइल डेवलप कर रहा है- 'क्रोको स्टाइल'. उसका मानना है कि जैसे ब्रूसली ने सांप और बिल्ली की मूवमेंट से स्टाइल बनाई थी, वैसे ही वह मगरमच्छों की ताकत, सटीकता और टैक्टिक्स को फाइटिंग में बदलना चाहता है.

इंटरनेशनल लेवल पर रिंग फाइटिंग की तैयारी

इस अनोखे प्रयोग को लेकर धर्मेंद्र कहते हैं कि मैं चाहता हूं कि एक दिन दुनिया मुझे उस लड़के के तौर पर जाने जो अपनी स्टाइल खुद लेकर आया – जो किताबों या कोच से नहीं, बल्कि मगरमच्छों से सीखी गई थी. वो इंटरनेशनल लेवल पर फाइटिंग करना चाहता है, लेकिन अपने तरीके से. इन दिनों धर्मेंद्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. वीडियो में वह खुले इलाके में मगरमच्छों के बीच पुश-अप करता, स्ट्रेचिंग करता और उन्हें नजदीक से निहारता दिखाई दे रहा है. धर्मेंद्र के इस वर्कआउट वीडियो को हजारों बार देखा जा चुका है.  कई यूजर्स इसे दमदार और खतरनाक टैलेंट कह रहे हैं.
 
धर्मेंद्र की ये अनोखी दोस्ती और ट्रेनिंग भले ही हैरान करने वाली है, लेकिन वन विभाग और एक्सपर्ट्स इसे खतरनाक मानते हैं. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी जंगली जानवर के इतना करीब जाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है. धर्मेंद्र की कहानी दिलचस्प जरूर है, लेकिन इससे प्रेरित होकर ऐसा करना सही नहीं होगा.

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