बिहार के सहरसा में शिक्षक एकता मंच के राज्यव्यापी आह्वान पर प्रारंभिक, माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक के नियोजित टीचरों के द्वारा सक्षमता परीक्षा को लेकर मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया गया. इस मशाल जुलूस में हजारों शिक्षक और शिक्षिकाएं मौजूद थे. मशाल जुलूस सुपर बाजार से निकलकर डी बी रोड होते हुए शंकर चौक तक गया. साथ ही बिहार सरकार के विरोध में नारे लगाए.
वहीं मशाल जुलूस में शामिल नियोजित शिक्षक संघ के रौशन सिंह धोनी ने कहा, बिहार सरकार की शिक्षा नीति और सक्षमता परीक्षा लेकर शिक्षकों को प्रताड़ित करने और हटाने का फरमान जारी किया है. उसके विरुद्ध बिहार के साढ़े 3 लाख नियोजित शिक्षक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है. इसबार नीतीश सरकार को उखाड़ फेंकेंगे.
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मशाल जुलूस निकालकर सरकार को दी है चेतावनी
सरकार को हमारी बातों को मानना होगा. नीतीश कुमार के विरोध में हम लोग ऐलान कर चुके है कि 13 फरवरी को विधानसभा का घेराव करेंगे. साथ ही पूरे बिहार के साढ़े तीन लाख शिक्षक नीतीश कुमार के तुगलकी फरमान और के के पाठक के तुगलकी फरमान के विरुद्ध हमलोग आंदोलन करेंगे. आज मशाल जुलूस निकालकर सरकार को चेतावनी दी है.
'बिना किसी शर्त के राज्यकर्मी का दर्जा देना होगा'
मशाल जुलूस में शामिल नियोजित शिक्षक शैलेश झा ने कहा, ये मशाल जुलूस सरकार के तुगलकी फरमान के विरोध में निकाले गए हैं. आज शिक्षक जो प्रताड़ना झेल रहा है उसका जिम्मेवार नीतीश कुमार और के के पाठक जी हैं. हम पूछते हैं कि जो शिक्षक का रिटायरमेंट 4 साल और 5 साल बचा हुआ है, वो ट्रांसफर होकर अन्य जिले चले जाएं और उनका सर्विस बुक फिर से बहाल हो. ये कहां का न्याय है. ये तुगलकी फरमान हम लोगों पर नहीं चलेगा. शिक्षकों का एक ही मांग है. बिना किसी शर्त के राज्यकर्मी का दर्जा देना होगा.